मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2021: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2021 में गुरु (बृहस्पति) 5 अप्रैल को कुम्भ में, गुरु (बृहस्पति) 14 सितंबर को मकर में, गुरु (बृहस्पति) 20 नवंबर को कुम्भ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 2021 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2021 का गोचर कैलेंडर

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2021

  • 3 जनवरीरात 11:34

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 4 जनवरीरात 10:25

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 7 जनवरीसुबह 11:11

    शनि अस्त (9 फ़रवरी तक)†

  • 12 जनवरीसुबह 11:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जनवरीरात 2:45

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीरात 11:28

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (12 फ़रवरी तक)†

  • 25 जनवरीसुबह 10:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 27 जनवरीरात 10:00

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 30 जनवरीदोपहर 3:51

    बुध कुम्भ 2°20′ पर वक्री

फ़रवरी 2021

  • 2 फ़रवरीसुबह 10:04

    बुध अस्त (14 फ़रवरी तक)†

  • 4 फ़रवरीशाम 5:34

    बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 9 फ़रवरीरात 8:35

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 फ़रवरीसुबह 5:31

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 फ़रवरीदोपहर 3:42

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीशाम 7:50

    शुक्र अस्त (4 मई तक)†

  • 14 फ़रवरीसुबह 7:27

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 फ़रवरीरात 8:52

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 21 फ़रवरीरात 12:52

    बुध मकर 16°52′ पर मार्गी

  • 21 फ़रवरीरात 11:07

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

मार्च 2021

  • 11 मार्चसुबह 7:04

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चदोपहर 12:34

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चरात 9:31

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 31 मार्चरात 8:14

    बुध का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2021

  • 4 अप्रैलरात 10:18

    बुध अस्त (1 मई तक)†

  • 5 अप्रैलशाम 7:59

    गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 अप्रैलरात 2:00

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 13 अप्रैलरात 8:45

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 13 अप्रैलरात 10:04

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलशाम 4:28

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2021

  • 1 मईरात 1:12

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 1 मईशाम 6:41

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 मईरात 2:15

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 मईसुबह 8:57

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 14 मईशाम 6:56

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 23 मईसुबह 9:44

    शनि मकर 19°22′ पर वक्री

  • 26 मईसुबह 4:04

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 28 मईशाम 7:31

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 29 मईरात 11:33

    बुध मिथुन 0°34′ पर वक्री

जून 2021

  • 2 जूनरात 2:23

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 2 जूनदोपहर 2:35

    बुध अस्त (19 जून तक)†

  • 2 जूनरात 10:00

    बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 जूनरात 1:32

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 19 जूनदोपहर 3:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 जूनदोपहर 3:47

    गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 8°02′ पर वक्री

  • 22 जूनसुबह 9:52

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 22 जूनरात 11:00

    बुध वृषभ 21°58′ पर मार्गी

जुलाई 2021

  • 7 जुलाईसुबह 6:43

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जुलाईदोपहर 12:23

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 17 जुलाईसुबह 4:56

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 19 जुलाईरात 9:47

    बुध अस्त (16 अगस्त तक)†

  • 20 जुलाईदोपहर 1:25

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 25 जुलाईसुबह 7:12

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2021

  • 8 अगस्तरात 9:02

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 11 अगस्तसुबह 7:02

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 16 अगस्तरात 12:06

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अगस्तरात 8:47

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 9:40

    मंगल अस्त (29 नवंबर तक)†

  • 26 अगस्तसुबह 6:48

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2021

  • 5 सितंबररात 8:20

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 5 सितंबररात 11:28

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 14 सितंबरसुबह 9:47

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 सितंबररात 8:43

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबररात 3:41

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 27 सितंबरसुबह 6:09

    बुध तुला 1°19′ पर वक्री

अक्टूबर 2021

  • 1 अक्टूबररात 10:30

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 2 अक्टूबरसुबह 5:17

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 3 अक्टूबररात 8:47

    बुध अस्त (15 अक्टूबर तक)†

  • 11 अक्टूबररात 3:49

    शनि मकर 12°43′ पर मार्गी

  • 15 अक्टूबररात 11:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 8:43

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबरसुबह 6:46

    गुरु (बृहस्पति) मकर 28°10′ पर मार्गी

  • 18 अक्टूबरशाम 4:17

    बुध कन्या 15°58′ पर मार्गी

  • 21 अक्टूबररात 9:33

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 30 अक्टूबरसुबह 11:41

    शुक्र का धनु में प्रवेश

नवंबर 2021

  • 2 नवंबरसुबह 4:25

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 5 नवंबरसुबह 11:22

    बुध अस्त (24 दिसंबर तक)†

  • 16 नवंबरसुबह 7:33

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 20 नवंबरशाम 6:08

    गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 नवंबररात 11:20

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 29 नवंबररात 1:50

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

दिसंबर 2021

  • 5 दिसंबररात 12:29

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 8 दिसंबरसुबह 8:21

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 10 दिसंबररात 12:35

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 15 दिसंबररात 10:14

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 19 दिसंबरसुबह 10:34

    शुक्र मकर 2°20′ पर वक्री

  • 24 दिसंबरसुबह 11:58

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 दिसंबरसुबह 6:00

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 30 दिसंबररात 2:29

    शुक्र का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और