पंचांग · गोचर
गोचर 2022: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2022 में राहु 12 अप्रैल को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 13 अप्रैल को मीन में, शनि 29 अप्रैल को कुम्भ में, शनि 12 जुलाई को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय मैनचेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1 जनवरी 2022 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2021 से, 14 जनवरी 2022 तक
- चन्द्रवृश्चिक में30 दिसंबर 2021 से, 1 जनवरी 2022 तक
- मंगलवृश्चिक में5 दिसंबर 2021 से, 16 जनवरी 2022 तक
- बुधमकर में29 दिसंबर 2021 से, 6 मार्च 2022 तक
- गुरु (बृहस्पति)कुम्भ में20 नवंबर 2021 से, 13 अप्रैल 2022 तक
- शुक्रवक्रीधनु में30 दिसंबर 2021 से, 27 फ़रवरी 2022 तक
- शनिमकर में24 जनवरी 2020 से, 29 अप्रैल 2022 तक
- राहुवृषभ में23 सितंबर 2020 से, 12 अप्रैल 2022 तक
- केतुवृश्चिक में23 सितंबर 2020 से, 12 अप्रैल 2022 तक
2022 का गोचर कैलेंडर
सभी समय मैनचेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2022
4 जनवरीरात 1:57
शुक्र अस्त (13 जनवरी तक)†
13 जनवरीरात 11:44
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीसुबह 8:59
सूर्य का मकर में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 11:41
बुध मकर 16°11′ पर वक्री
16 जनवरीसुबह 11:00
मंगल का धनु में प्रवेश
17 जनवरीदोपहर 1:39
बुध अस्त (28 जनवरी तक)†
19 जनवरीरात 1:52
शनि अस्त (21 फ़रवरी तक)†
28 जनवरीरात 11:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जनवरीसुबह 8:47
शुक्र धनु 16°55′ पर मार्गी
फ़रवरी 2022
4 फ़रवरीसुबह 4:13
बुध मकर 0°13′ पर मार्गी
12 फ़रवरीरात 9:56
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
19 फ़रवरीसुबह 4:38
गुरु (बृहस्पति) अस्त (20 मार्च तक)†
21 फ़रवरीदोपहर 2:46
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीसुबह 10:18
मंगल का मकर में प्रवेश
27 फ़रवरीसुबह 4:49
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2022
6 मार्चसुबह 5:52
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चशाम 6:46
सूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्चसुबह 10:48
बुध अस्त (16 अप्रैल तक)†
20 मार्चरात 2:59
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
24 मार्चसुबह 5:27
बुध का मीन में प्रवेश
31 मार्चसुबह 4:10
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2022
7 अप्रैलसुबह 10:45
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
8 अप्रैलसुबह 7:29
बुध का मेष में प्रवेश
12 अप्रैलसुबह 10:59
राहु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
12 अप्रैलसुबह 10:59
केतु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
13 अप्रैलसुबह 11:19
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 4:11
सूर्य का मेष में प्रवेश
16 अप्रैलसुबह 7:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 अप्रैलशाम 7:43
बुध का वृषभ में प्रवेश
27 अप्रैलदोपहर 1:46
शुक्र का मीन में प्रवेश
29 अप्रैलरात 3:25
शनि का कुम्भ में प्रवेश
मई 2022
10 मईदोपहर 12:46
बुध वृषभ 10°41′ पर वक्री
13 मईसुबह 8:30
बुध अस्त (30 मई तक)†
15 मईरात 12:59
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईसुबह 5:02
मंगल का मीन में प्रवेश
23 मईदोपहर 3:56
शुक्र का मेष में प्रवेश
30 मईसुबह 4:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
जून 2022
3 जूनसुबह 9:01
बुध वृषभ 1°55′ पर मार्गी
4 जूनरात 10:13
शनि कुम्भ 1°05′ पर वक्री
15 जूनसुबह 7:33
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनरात 3:45
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
27 जूनरात 1:09
मंगल का मेष में प्रवेश
जुलाई 2022
2 जुलाईसुबह 5:14
बुध का मिथुन में प्रवेश
4 जुलाईदोपहर 12:59
बुध अस्त (30 जुलाई तक)†
12 जुलाईसुबह 10:35
शनि का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
13 जुलाईसुबह 6:19
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईशाम 6:25
सूर्य का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईशाम 7:38
बुध का कर्क में प्रवेश
28 जुलाईरात 9:20
गुरु (बृहस्पति) मीन 14°33′ पर वक्री
30 जुलाईसुबह 5:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 जुलाईरात 11:13
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2022
7 अगस्तरात 12:49
शुक्र का कर्क में प्रवेश
10 अगस्तशाम 4:38
मंगल का वृषभ में प्रवेश
17 अगस्तरात 2:52
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 9:32
बुध का कन्या में प्रवेश
31 अगस्तसुबह 11:47
शुक्र का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2022
10 सितंबरसुबह 4:37
बुध कन्या 14°45′ पर वक्री
14 सितंबररात 10:20
शुक्र अस्त (2 दिसंबर तक)†
17 सितंबररात 2:51
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 4:50
बुध अस्त (29 सितंबर तक)†
24 सितंबरशाम 4:32
शुक्र का कन्या में प्रवेश
29 सितंबररात 10:41
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2022
2 अक्टूबरसुबह 10:07
बुध कन्या 0°02′ पर मार्गी
16 अक्टूबररात 2:02
मंगल का मिथुन में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 2:52
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरदोपहर 3:12
बुध अस्त (4 दिसंबर तक)†
18 अक्टूबरशाम 5:09
शुक्र का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 5:39
शनि मकर 24°25′ पर मार्गी
26 अक्टूबरसुबह 9:17
बुध का तुला में प्रवेश
30 अक्टूबरदोपहर 1:21
मंगल मिथुन 1°26′ पर वक्री
नवंबर 2022
11 नवंबरदोपहर 2:38
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
13 नवंबरदोपहर 3:25
मंगल का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
13 नवंबरदोपहर 3:49
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरदोपहर 1:44
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
23 नवंबररात 11:17
गुरु (बृहस्पति) मीन 4°38′ पर मार्गी
दिसंबर 2022
2 दिसंबररात 1:07
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
3 दिसंबररात 1:16
बुध का धनु में प्रवेश
4 दिसंबरसुबह 9:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 दिसंबरदोपहर 12:26
शुक्र का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 4:27
सूर्य का धनु में प्रवेश
27 दिसंबररात 11:28
बुध का मकर में प्रवेश
29 दिसंबरसुबह 9:31
बुध मकर 0°11′ पर वक्री
29 दिसंबरसुबह 10:32
शुक्र का मकर में प्रवेश
30 दिसंबरशाम 6:42
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
