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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2023: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2023 में शनि 17 जनवरी को कुम्भ में, गुरु (बृहस्पति) 22 अप्रैल को मेष में, राहु 30 अक्टूबर को मीन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2023 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2023 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2023

  • 2 जनवरीरात 2:35

    बुध अस्त (13 जनवरी तक)†

  • 13 जनवरीरात 2:30

    मंगल वृषभ 13°57′ पर मार्गी

  • 13 जनवरीसुबह 5:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जनवरीरात 8:43

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीशाम 5:47

    शनि का कुम्भ में प्रवेश

  • 18 जनवरीशाम 6:42

    बुध धनु 13°58′ पर मार्गी

  • 22 जनवरीदोपहर 3:52

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 31 जनवरीरात 2:59

    शनि अस्त (5 मार्च तक)†

फ़रवरी 2023

  • 7 फ़रवरीसुबह 7:27

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 9:42

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीरात 8:00

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 27 फ़रवरीशाम 4:46

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीसुबह 8:14

    बुध अस्त (31 मार्च तक)†

मार्च 2023

  • 5 मार्चरात 8:38

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 मार्चसुबह 8:25

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 13 मार्चसुबह 4:58

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 15 मार्चसुबह 6:32

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 10:47

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 28 मार्चसुबह 8:59

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (27 अप्रैल तक)†

  • 31 मार्चदोपहर 2:54

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 31 मार्चरात 9:13

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 2023

  • 6 अप्रैलसुबह 10:57

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 14 अप्रैलदोपहर 2:57

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 21 अप्रैलदोपहर 2:04

    बुध मेष 21°26′ पर वक्री

  • 22 अप्रैलसुबह 5:08

    गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश

  • 23 अप्रैलरात 11:59

    बुध अस्त (10 मई तक)†

  • 27 अप्रैलरात 1:49

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 2023

  • 2 मईदोपहर 1:48

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 10 मईरात 12:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 मईदोपहर 1:46

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 8:47

    बुध मेष 11°40′ पर मार्गी

  • 15 मईसुबह 11:43

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 30 मईशाम 7:36

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जून 2023

  • 7 जूनशाम 7:48

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 जूनशाम 6:14

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनरात 10:24

    शनि कुम्भ 13°02′ पर वक्री

  • 19 जूनसुबह 7:25

    बुध अस्त (14 जुलाई तक)†

  • 24 जूनदोपहर 12:42

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2023

  • 1 जुलाईरात 2:13

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 7 जुलाईरात 3:58

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 8 जुलाईदोपहर 12:12

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 14 जुलाईरात 2:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 जुलाईसुबह 5:04

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 23 जुलाईसुबह 7:01

    शुक्र सिंह 4°25′ पर वक्री

  • 25 जुलाईसुबह 4:29

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2023

  • 7 अगस्तसुबह 11:07

    शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 8 अगस्तदोपहर 1:54

    शुक्र अस्त (18 अगस्त तक)†

  • 17 अगस्तदोपहर 1:29

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 18 अगस्तदोपहर 3:49

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 18 अगस्तशाम 7:18

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 अगस्तरात 1:28

    बुध सिंह 27°40′ पर वक्री

  • 31 अगस्तसुबह 5:19

    बुध अस्त (13 सितंबर तक)†

सितंबर 2023

  • 4 सितंबरसुबह 6:51

    शुक्र कर्क 18°01′ पर मार्गी

  • 4 सितंबरशाम 7:24

    गुरु (बृहस्पति) मेष 21°24′ पर वक्री

  • 13 सितंबरशाम 5:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 सितंबररात 1:51

    बुध सिंह 13°49′ पर मार्गी

  • 17 सितंबरदोपहर 1:28

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 24 सितंबरशाम 5:29

    मंगल अस्त (16 जनवरी तक)†

अक्टूबर 2023

  • 1 अक्टूबररात 8:32

    बुध अस्त (13 नवंबर तक)†

  • 1 अक्टूबररात 8:37

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 2 अक्टूबररात 12:58

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 3 अक्टूबरशाम 5:54

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 1:27

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 19 अक्टूबररात 1:15

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 30 अक्टूबरशाम 6:26

    राहु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 30 अक्टूबरशाम 6:26

    केतु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

नवंबर 2023

  • 3 नवंबरसुबह 5:11

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 4 नवंबरदोपहर 1:05

    शनि कुम्भ 6°20′ पर मार्गी

  • 6 नवंबरशाम 4:23

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 13 नवंबरशाम 4:32

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 नवंबरसुबह 10:43

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबररात 1:16

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 नवंबरसुबह 5:51

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 30 नवंबररात 1:02

    शुक्र का तुला में प्रवेश

दिसंबर 2023

  • 13 दिसंबरदोपहर 12:38

    बुध धनु 14°18′ पर वक्री

  • 16 दिसंबरदोपहर 3:55

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 17 दिसंबरसुबह 11:38

    बुध अस्त (28 दिसंबर तक)†

  • 25 दिसंबरसुबह 6:43

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 दिसंबररात 12:16

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 28 दिसंबरसुबह 10:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 दिसंबरसुबह 10:59

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 31 दिसंबरसुबह 8:26

    गुरु (बृहस्पति) मेष 11°23′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और