पंचांग · गोचर
गोचर 2023: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2023 में शनि 17 जनवरी को कुम्भ में, गुरु (बृहस्पति) 21 अप्रैल को मेष में, राहु 30 अक्टूबर को मीन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1 जनवरी 2023 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2022 से, 14 जनवरी 2023 तक
- चन्द्रमेष में31 दिसंबर 2022 से, 2 जनवरी 2023 तक
- मंगलवक्रीवृषभ में13 नवंबर 2022 से, 12 मार्च 2023 तक
- बुधवक्रीधनु में30 दिसंबर 2022 से, 6 फ़रवरी 2023 तक
- गुरु (बृहस्पति)मीन में13 अप्रैल 2022 से, 21 अप्रैल 2023 तक
- शुक्रमकर में29 दिसंबर 2022 से, 22 जनवरी 2023 तक
- शनिमकर में12 जुलाई 2022 से, 17 जनवरी 2023 तक
- राहुमेष में12 अप्रैल 2022 से, 30 अक्टूबर 2023 तक
- केतुतुला में12 अप्रैल 2022 से, 30 अक्टूबर 2023 तक
2023 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2023
1 जनवरीदोपहर 3:05
बुध अस्त (12 जनवरी तक)†
12 जनवरीदोपहर 3:00
मंगल वृषभ 13°57′ पर मार्गी
12 जनवरीशाम 5:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीसुबह 9:13
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीसुबह 6:17
शनि का कुम्भ में प्रवेश
18 जनवरीसुबह 7:12
बुध धनु 13°58′ पर मार्गी
22 जनवरीसुबह 4:22
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
30 जनवरीदोपहर 3:29
शनि अस्त (5 मार्च तक)†
फ़रवरी 2023
6 फ़रवरीशाम 7:57
बुध का मकर में प्रवेश
12 फ़रवरीरात 10:12
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
15 फ़रवरीसुबह 8:30
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 फ़रवरीसुबह 5:16
बुध का कुम्भ में प्रवेश
27 फ़रवरीरात 8:44
बुध अस्त (31 मार्च तक)†
मार्च 2023
5 मार्चसुबह 9:08
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
11 मार्चरात 8:55
शुक्र का मेष में प्रवेश
12 मार्चशाम 6:28
मंगल का मिथुन में प्रवेश
14 मार्चरात 8:02
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चरात 12:17
बुध का मीन में प्रवेश
27 मार्चरात 10:29
गुरु (बृहस्पति) अस्त (26 अप्रैल तक)†
31 मार्चसुबह 4:24
बुध का मेष में प्रवेश
31 मार्चसुबह 10:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2023
6 अप्रैलरात 12:27
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 4:27
सूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलरात 3:34
बुध मेष 21°26′ पर वक्री
21 अप्रैलशाम 6:38
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश
23 अप्रैलदोपहर 1:29
बुध अस्त (9 मई तक)†
26 अप्रैलदोपहर 3:19
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2023
2 मईरात 3:18
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
9 मईदोपहर 2:22
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 मईरात 3:16
मंगल का कर्क में प्रवेश
14 मईरात 10:17
बुध मेष 11°40′ पर मार्गी
15 मईरात 1:13
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
30 मईसुबह 9:06
शुक्र का कर्क में प्रवेश
जून 2023
7 जूनसुबह 9:18
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 जूनसुबह 7:44
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनसुबह 11:54
शनि कुम्भ 13°02′ पर वक्री
18 जूनरात 8:55
बुध अस्त (13 जुलाई तक)†
24 जूनरात 2:12
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 जूनदोपहर 3:43
मंगल का सिंह में प्रवेश
जुलाई 2023
6 जुलाईशाम 5:28
शुक्र का सिंह में प्रवेश
8 जुलाईरात 1:42
बुध का कर्क में प्रवेश
13 जुलाईशाम 4:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईशाम 6:34
सूर्य का कर्क में प्रवेश
22 जुलाईरात 8:31
शुक्र सिंह 4°25′ पर वक्री
24 जुलाईशाम 5:59
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2023
7 अगस्तरात 12:37
शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
8 अगस्तरात 3:24
शुक्र अस्त (18 अगस्त तक)†
17 अगस्तरात 2:59
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तसुबह 5:19
मंगल का कन्या में प्रवेश
18 अगस्तसुबह 8:48
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अगस्तदोपहर 2:58
बुध सिंह 27°40′ पर वक्री
30 अगस्तशाम 6:49
बुध अस्त (13 सितंबर तक)†
सितंबर 2023
3 सितंबररात 8:21
शुक्र कर्क 18°01′ पर मार्गी
4 सितंबरसुबह 8:54
गुरु (बृहस्पति) मेष 21°24′ पर वक्री
13 सितंबरसुबह 6:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 सितंबरदोपहर 3:21
बुध सिंह 13°49′ पर मार्गी
17 सितंबररात 2:58
सूर्य का कन्या में प्रवेश
24 सितंबरसुबह 6:59
मंगल अस्त (16 जनवरी तक)†
अक्टूबर 2023
1 अक्टूबरसुबह 10:02
बुध अस्त (13 नवंबर तक)†
1 अक्टूबरसुबह 10:07
बुध का कन्या में प्रवेश
1 अक्टूबरदोपहर 2:28
शुक्र का सिंह में प्रवेश
3 अक्टूबरसुबह 7:24
मंगल का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 2:57
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरदोपहर 2:45
बुध का तुला में प्रवेश
30 अक्टूबरसुबह 7:56
राहु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
30 अक्टूबरसुबह 7:56
केतु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
नवंबर 2023
2 नवंबरशाम 6:41
शुक्र का कन्या में प्रवेश
4 नवंबररात 2:35
शनि कुम्भ 6°20′ पर मार्गी
6 नवंबरसुबह 4:53
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
13 नवंबरसुबह 5:02
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 नवंबररात 11:13
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरदोपहर 1:46
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबरशाम 6:21
बुध का धनु में प्रवेश
29 नवंबरदोपहर 1:32
शुक्र का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2023
13 दिसंबररात 1:08
बुध धनु 14°18′ पर वक्री
16 दिसंबरसुबह 4:25
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबररात 12:08
बुध अस्त (27 दिसंबर तक)†
24 दिसंबरशाम 7:13
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
27 दिसंबरदोपहर 12:46
मंगल का धनु में प्रवेश
27 दिसंबररात 11:22
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 दिसंबररात 11:29
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
30 दिसंबररात 8:56
गुरु (बृहस्पति) मेष 11°23′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
