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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2024: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2024 में गुरु (बृहस्पति) 1 मई को वृषभ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2024 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2024 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2024

  • 2 जनवरीसुबह 8:37

    बुध वृश्चिक 27°59′ पर मार्गी

  • 7 जनवरीरात 9:10

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 15 जनवरीरात 2:39

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 16 जनवरीरात 10:07

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 जनवरीरात 8:53

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2024

  • 1 फ़रवरीदोपहर 2:20

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 5 फ़रवरीरात 9:37

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 8 फ़रवरीरात 9:28

    बुध अस्त (15 मार्च तक)†

  • 12 फ़रवरीसुबह 4:49

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीसुबह 4:57

    शनि अस्त (17 मार्च तक)†

  • 13 फ़रवरीदोपहर 3:39

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 फ़रवरीसुबह 5:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2024

  • 7 मार्चसुबह 9:33

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 7 मार्चसुबह 10:43

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चदोपहर 12:32

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 15 मार्चरात 1:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 मार्चशाम 6:03

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 17 मार्चसुबह 4:33

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 मार्चरात 2:52

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 31 मार्चशाम 4:43

    शुक्र का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2024

  • 2 अप्रैलरात 3:44

    बुध मेष 3°02′ पर वक्री

  • 4 अप्रैलसुबह 10:34

    बुध अस्त (19 अप्रैल तक)†

  • 9 अप्रैलरात 9:46

    बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 13 अप्रैलरात 9:00

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 19 अप्रैलसुबह 10:21

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 अप्रैलसुबह 8:34

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 24 अप्रैलरात 11:55

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 25 अप्रैलशाम 6:24

    बुध मीन 21°47′ पर मार्गी

  • 28 अप्रैलसुबह 7:36

    शुक्र अस्त (11 जुलाई तक)†

मई 2024

  • 1 मईदोपहर 12:44

    गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश

  • 3 मईरात 10:59

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (3 जून तक)†

  • 10 मईशाम 6:48

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 14 मईशाम 5:49

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 19 मईसुबह 8:40

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 31 मईदोपहर 12:13

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 2024

  • 1 जूनदोपहर 3:31

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 2 जूनशाम 6:19

    बुध अस्त (27 जून तक)†

  • 3 जूनसुबह 4:19

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जूनशाम 6:26

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 14 जूनरात 11:03

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनरात 12:22

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 27 जूनसुबह 4:27

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जूनदोपहर 12:21

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 30 जूनरात 12:03

    शनि कुम्भ 25°14′ पर वक्री

जुलाई 2024

  • 7 जुलाईसुबह 4:27

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 11 जुलाईसुबह 8:31

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जुलाईशाम 6:51

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 16 जुलाईसुबह 11:13

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 19 जुलाईरात 8:35

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 31 जुलाईदोपहर 2:29

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2024

  • 5 अगस्तसुबह 10:25

    बुध सिंह 9°55′ पर वक्री

  • 12 अगस्तसुबह 9:54

    बुध अस्त (26 अगस्त तक)†

  • 16 अगस्तशाम 7:38

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 22 अगस्तसुबह 6:44

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 25 अगस्तरात 1:12

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 26 अगस्तदोपहर 3:17

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 26 अगस्तशाम 6:19

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अगस्तरात 2:44

    बुध कर्क 27°13′ पर मार्गी

सितंबर 2024

  • 4 सितंबरसुबह 11:35

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 14 सितंबरदोपहर 12:54

    बुध अस्त (22 अक्टूबर तक)†

  • 16 सितंबरशाम 7:37

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 18 सितंबरदोपहर 1:53

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 23 सितंबरसुबह 10:08

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2024

  • 9 अक्टूबरदोपहर 12:18

    गुरु (बृहस्पति) वृषभ 27°08′ पर वक्री

  • 10 अक्टूबरसुबह 11:16

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 13 अक्टूबरसुबह 5:56

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 7:37

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबरदोपहर 2:11

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 22 अक्टूबरशाम 7:03

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अक्टूबररात 10:35

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2024

  • 7 नवंबररात 3:27

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 15 नवंबररात 8:21

    शनि कुम्भ 18°29′ पर मार्गी

  • 16 नवंबरसुबह 7:27

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 26 नवंबरसुबह 8:12

    बुध वृश्चिक 28°28′ पर वक्री

  • 30 नवंबररात 8:22

    बुध अस्त (11 दिसंबर तक)†

दिसंबर 2024

  • 2 दिसंबरसुबह 11:53

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 7 दिसंबरसुबह 4:59

    मंगल कर्क 11°58′ पर वक्री

  • 11 दिसंबरशाम 7:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 दिसंबररात 10:05

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबररात 2:26

    बुध वृश्चिक 12°11′ पर मार्गी

  • 28 दिसंबररात 11:35

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और