पंचांग · गोचर
गोचर 2027: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2027 में गुरु (बृहस्पति) 25 जनवरी को कर्क में, शनि 3 जून को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 26 जून को सिंह में, शनि 20 अक्टूबर को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 26 नवंबर को कन्या में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 2027 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2026 से, 14 जनवरी 2027 तक
- चन्द्रकन्या में29 दिसंबर 2026 से, 1 जनवरी 2027 तक
- मंगलसिंह में12 नवंबर 2026 से, 10 मार्च 2027 तक
- बुधधनु में22 दिसंबर 2026 से, 10 जनवरी 2027 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीसिंह में31 अक्टूबर 2026 से, 25 जनवरी 2027 तक
- शुक्रतुला में22 नवंबर 2026 से, 1 जनवरी 2027 तक
- शनिमीन में29 मार्च 2025 से, 3 जून 2027 तक
- राहुमकर में6 दिसंबर 2026 से, 24 जून 2028 तक
- केतुकर्क में6 दिसंबर 2026 से, 24 जून 2028 तक
2027 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2027
1 जनवरीरात 11:12
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
10 जनवरीरात 12:31
बुध का मकर में प्रवेश
10 जनवरीशाम 6:24
मंगल सिंह 16°12′ पर वक्री
14 जनवरीरात 9:00
सूर्य का मकर में प्रवेश
23 जनवरीशाम 6:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जनवरीरात 3:01
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
28 जनवरीरात 3:27
बुध का कुम्भ में प्रवेश
29 जनवरीशाम 6:32
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 2027
9 फ़रवरीरात 11:05
बुध कुम्भ 11°45′ पर वक्री
12 फ़रवरीदोपहर 1:35
बुध अस्त (24 फ़रवरी तक)†
13 फ़रवरीसुबह 9:58
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
24 फ़रवरीसुबह 4:52
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
24 फ़रवरीदोपहर 3:07
शुक्र का मकर में प्रवेश
24 फ़रवरीशाम 7:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 2027
3 मार्चशाम 6:02
बुध मकर 26°41′ पर मार्गी
10 मार्चरात 12:49
मंगल का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
12 मार्चसुबह 4:52
बुध का कुम्भ में प्रवेश
15 मार्चसुबह 6:49
सूर्य का मीन में प्रवेश
21 मार्चदोपहर 1:46
शनि अस्त (25 अप्रैल तक)†
21 मार्चशाम 6:43
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2027
1 अप्रैलशाम 7:42
मंगल कर्क 26°41′ पर मार्गी
5 अप्रैलशाम 4:10
बुध का मीन में प्रवेश
13 अप्रैलसुबह 7:58
गुरु (बृहस्पति) कर्क 22°46′ पर मार्गी
14 अप्रैलदोपहर 3:18
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलदोपहर 12:17
बुध अस्त (11 मई तक)†
15 अप्रैलदोपहर 3:12
शुक्र का मीन में प्रवेश
22 अप्रैलसुबह 8:07
बुध का मेष में प्रवेश
25 अप्रैलदोपहर 12:39
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अप्रैलसुबह 11:06
मंगल का सिंह में प्रवेश
मई 2027
6 मईदोपहर 12:31
बुध का वृषभ में प्रवेश
10 मईसुबह 8:40
शुक्र का मेष में प्रवेश
11 मईदोपहर 12:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मईदोपहर 12:09
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईशाम 6:24
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2027
3 जूनरात 3:44
शनि का मेष में प्रवेश
4 जूनरात 12:32
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
10 जूनरात 11:44
बुध मिथुन 12°07′ पर वक्री
15 जूनसुबह 5:30
बुध अस्त (2 जुलाई तक)†
15 जूनशाम 6:44
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
26 जूनसुबह 4:16
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
28 जूनदोपहर 2:30
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2027
2 जुलाईरात 2:29
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 जुलाईरात 1:10
बुध मिथुन 3°14′ पर मार्गी
5 जुलाईसुबह 4:14
मंगल का कन्या में प्रवेश
6 जुलाईरात 8:42
शुक्र अस्त (17 सितंबर तक)†
17 जुलाईसुबह 5:37
सूर्य का कर्क में प्रवेश
23 जुलाईरात 1:37
शुक्र का कर्क में प्रवेश
29 जुलाईदोपहर 2:57
बुध अस्त (26 अगस्त तक)†
30 जुलाईशाम 6:25
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2027
9 अगस्तरात 11:04
शनि मेष 3°38′ पर वक्री
14 अगस्तसुबह 11:47
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तसुबह 9:25
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तशाम 7:42
गुरु (बृहस्पति) अस्त (15 सितंबर तक)†
17 अगस्तदोपहर 2:01
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तसुबह 9:34
मंगल का तुला में प्रवेश
26 अगस्तशाम 7:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अगस्तरात 1:53
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2027
9 सितंबरदोपहर 2:31
शुक्र का कन्या में प्रवेश
15 सितंबररात 3:12
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबरदोपहर 1:59
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबररात 10:48
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
21 सितंबरशाम 6:10
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2027
3 अक्टूबरशाम 6:15
शुक्र का तुला में प्रवेश
7 अक्टूबररात 8:06
बुध तुला 10°41′ पर वक्री
8 अक्टूबररात 1:13
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
14 अक्टूबररात 3:27
बुध अस्त (25 अक्टूबर तक)†
18 अक्टूबररात 1:58
सूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टूबरसुबह 9:26
शनि का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
21 अक्टूबरसुबह 8:21
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
25 अक्टूबररात 11:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अक्टूबररात 9:48
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
28 अक्टूबरशाम 7:40
बुध कन्या 25°04′ पर मार्गी
नवंबर 2027
5 नवंबरशाम 5:01
बुध का तुला में प्रवेश
17 नवंबररात 1:47
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 4:47
बुध अस्त (5 जनवरी तक)†
18 नवंबरसुबह 8:31
मंगल का धनु में प्रवेश
21 नवंबररात 1:59
शुक्र का धनु में प्रवेश
26 नवंबररात 12:22
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबरशाम 5:22
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश
दिसंबर 2027
15 दिसंबररात 1:59
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 8:01
शुक्र का मकर में प्रवेश
16 दिसंबरशाम 4:27
सूर्य का धनु में प्रवेश
24 दिसंबरसुबह 8:45
शनि मीन 26°47′ पर मार्गी
27 दिसंबरदोपहर 12:50
मंगल का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
