पंचांग · गोचर
गोचर 2027: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2027 में गुरु (बृहस्पति) 24 जनवरी को कर्क में, शनि 2 जून को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 25 जून को सिंह में, शनि 19 अक्टूबर को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 26 नवंबर को कन्या में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय एडिसन के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।
1 जनवरी 2027 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2026 से, 14 जनवरी 2027 तक
- चन्द्रतुला में31 दिसंबर 2026 से, 3 जनवरी 2027 तक
- मंगलसिंह में12 नवंबर 2026 से, 9 मार्च 2027 तक
- बुधधनु में21 दिसंबर 2026 से, 9 जनवरी 2027 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीसिंह में31 अक्टूबर 2026 से, 24 जनवरी 2027 तक
- शुक्रतुला में22 नवंबर 2026 से, 1 जनवरी 2027 तक
- शनिमीन में29 मार्च 2025 से, 2 जून 2027 तक
- राहुमकर में5 दिसंबर 2026 से, 23 जून 2028 तक
- केतुकर्क में5 दिसंबर 2026 से, 23 जून 2028 तक
2027 का गोचर कैलेंडर
सभी समय एडिसन के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2027
1 जनवरीदोपहर 12:42
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
9 जनवरीदोपहर 2:01
बुध का मकर में प्रवेश
10 जनवरीसुबह 7:54
मंगल सिंह 16°12′ पर वक्री
14 जनवरीसुबह 10:30
सूर्य का मकर में प्रवेश
23 जनवरीसुबह 8:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जनवरीशाम 4:31
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
27 जनवरीशाम 4:57
बुध का कुम्भ में प्रवेश
29 जनवरीसुबह 8:02
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 2027
9 फ़रवरीदोपहर 12:35
बुध कुम्भ 11°45′ पर वक्री
12 फ़रवरीरात 3:05
बुध अस्त (24 फ़रवरी तक)†
12 फ़रवरीरात 11:28
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
23 फ़रवरीशाम 6:22
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
24 फ़रवरीसुबह 4:37
शुक्र का मकर में प्रवेश
24 फ़रवरीसुबह 8:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 2027
3 मार्चसुबह 7:32
बुध मकर 26°41′ पर मार्गी
9 मार्चदोपहर 2:19
मंगल का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
11 मार्चशाम 6:22
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चरात 9:19
सूर्य का मीन में प्रवेश
21 मार्चसुबह 4:16
शनि अस्त (25 अप्रैल तक)†
21 मार्चसुबह 9:13
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2027
1 अप्रैलसुबह 10:12
मंगल कर्क 26°41′ पर मार्गी
5 अप्रैलसुबह 6:40
बुध का मीन में प्रवेश
12 अप्रैलरात 10:28
गुरु (बृहस्पति) कर्क 22°46′ पर मार्गी
14 अप्रैलसुबह 5:48
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलरात 2:47
बुध अस्त (11 मई तक)†
15 अप्रैलसुबह 5:42
शुक्र का मीन में प्रवेश
21 अप्रैलरात 10:37
बुध का मेष में प्रवेश
25 अप्रैलरात 3:09
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अप्रैलरात 1:36
मंगल का सिंह में प्रवेश
मई 2027
6 मईरात 3:01
बुध का वृषभ में प्रवेश
9 मईरात 11:10
शुक्र का मेष में प्रवेश
11 मईरात 3:12
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मईरात 2:39
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईसुबह 8:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2027
2 जूनशाम 6:14
शनि का मेष में प्रवेश
3 जूनदोपहर 3:02
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
10 जूनदोपहर 2:14
बुध मिथुन 12°07′ पर वक्री
14 जूनरात 8:00
बुध अस्त (1 जुलाई तक)†
15 जूनसुबह 9:14
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
25 जूनशाम 6:46
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
28 जूनसुबह 5:00
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2027
1 जुलाईशाम 4:59
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
4 जुलाईदोपहर 3:40
बुध मिथुन 3°14′ पर मार्गी
4 जुलाईशाम 6:44
मंगल का कन्या में प्रवेश
6 जुलाईसुबह 11:12
शुक्र अस्त (17 सितंबर तक)†
16 जुलाईरात 8:07
सूर्य का कर्क में प्रवेश
22 जुलाईशाम 4:07
शुक्र का कर्क में प्रवेश
29 जुलाईसुबह 5:27
बुध अस्त (26 अगस्त तक)†
30 जुलाईसुबह 8:55
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2027
9 अगस्तदोपहर 1:34
शनि मेष 3°38′ पर वक्री
14 अगस्तरात 2:17
बुध का सिंह में प्रवेश
15 अगस्तरात 11:55
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तसुबह 10:12
गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 सितंबर तक)†
17 अगस्तसुबह 4:31
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तरात 12:04
मंगल का तुला में प्रवेश
26 अगस्तसुबह 10:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अगस्तशाम 4:23
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2027
9 सितंबरसुबह 5:01
शुक्र का कन्या में प्रवेश
14 सितंबरशाम 5:42
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबरसुबह 4:29
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरदोपहर 1:18
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
21 सितंबरसुबह 8:40
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2027
3 अक्टूबरसुबह 8:45
शुक्र का तुला में प्रवेश
7 अक्टूबरसुबह 10:36
बुध तुला 10°41′ पर वक्री
7 अक्टूबरदोपहर 3:43
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
13 अक्टूबरशाम 5:57
बुध अस्त (25 अक्टूबर तक)†
17 अक्टूबरशाम 4:28
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबररात 11:56
शनि का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
20 अक्टूबररात 10:51
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
25 अक्टूबरदोपहर 1:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अक्टूबरदोपहर 12:18
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
28 अक्टूबरसुबह 10:10
बुध कन्या 25°04′ पर मार्गी
नवंबर 2027
5 नवंबरसुबह 7:31
बुध का तुला में प्रवेश
16 नवंबरदोपहर 3:17
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरशाम 6:17
बुध अस्त (5 जनवरी तक)†
17 नवंबररात 10:01
मंगल का धनु में प्रवेश
20 नवंबरदोपहर 3:29
शुक्र का धनु में प्रवेश
25 नवंबरदोपहर 1:52
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबरसुबह 6:52
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश
दिसंबर 2027
14 दिसंबरदोपहर 3:29
बुध का धनु में प्रवेश
14 दिसंबररात 9:31
शुक्र का मकर में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 5:57
सूर्य का धनु में प्रवेश
23 दिसंबररात 10:15
शनि मीन 26°47′ पर मार्गी
27 दिसंबररात 2:20
मंगल का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
