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पंचांग · गोचर

गोचर 2029: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2029 में गुरु (बृहस्पति) 29 मार्च को कन्या में, शनि 8 अगस्त को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 24 अगस्त को तुला में, शनि 5 अक्टूबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2029 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2029 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2029

  • 3 जनवरीशाम 6:20

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 5 जनवरीशाम 6:38

    शनि मेष 10°10′ पर मार्गी

  • 7 जनवरीदोपहर 1:26

    बुध मकर 9°23′ पर वक्री

  • 10 जनवरीशाम 7:16

    बुध अस्त (22 जनवरी तक)†

  • 14 जनवरीसुबह 9:14

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 18 जनवरीसुबह 6:50

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 22 जनवरीरात 1:41

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 जनवरीशाम 4:37

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 28 जनवरीरात 12:10

    बुध धनु 23°17′ पर मार्गी

फ़रवरी 2029

  • 8 फ़रवरीशाम 4:59

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 10 फ़रवरीशाम 6:19

    गुरु (बृहस्पति) तुला 3°10′ पर वक्री

  • 11 फ़रवरीदोपहर 12:07

    शुक्र अस्त (1 मई तक)†

  • 12 फ़रवरीरात 10:15

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 फ़रवरीदोपहर 1:41

    मंगल कन्या 19°40′ पर वक्री

  • 20 फ़रवरीदोपहर 3:24

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2029

  • 3 मार्चसुबह 9:29

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चशाम 4:38

    बुध अस्त (9 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चशाम 7:10

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चदोपहर 3:59

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चशाम 6:20

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 29 मार्चशाम 4:16

    गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

अप्रैल 2029

  • 4 अप्रैलशाम 5:12

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 9 अप्रैलदोपहर 1:33

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 अप्रैलशाम 7:24

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलरात 3:41

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 17 अप्रैलसुबह 4:47

    शनि अस्त (22 मई तक)†

  • 24 अप्रैलरात 11:28

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 2029

  • 1 मईरात 10:26

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 2 मईसुबह 4:34

    बुध वृषभ 2°25′ पर वक्री

  • 4 मईरात 2:21

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 4 मईशाम 7:17

    बुध अस्त (21 मई तक)†

  • 6 मईरात 12:34

    मंगल कन्या 0°40′ पर मार्गी

  • 10 मईरात 3:47

    बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 मईरात 12:33

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 21 मईसुबह 8:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 मईरात 8:12

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 मईरात 12:51

    बुध मेष 23°18′ पर मार्गी

  • 28 मईदोपहर 1:02

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 2029

  • 8 जूनशाम 4:19

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 14 जूनरात 2:54

    गुरु (बृहस्पति) कन्या 23°14′ पर मार्गी

  • 15 जूनसुबह 7:08

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 22 जूनरात 3:41

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 27 जूनरात 8:55

    बुध अस्त (23 जुलाई तक)†

  • 28 जूनरात 9:32

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2029

  • 13 जुलाईरात 1:16

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईशाम 5:59

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईरात 11:16

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 23 जुलाईरात 2:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 जुलाईशाम 5:11

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 28 जुलाईरात 10:29

    मंगल का तुला में प्रवेश

अगस्त 2029

  • 8 अगस्तसुबह 8:08

    शनि का वृषभ में प्रवेश

  • 11 अगस्तरात 2:15

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 17 अगस्तरात 2:22

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तरात 8:24

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 24 अगस्तरात 11:43

    गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश

सितंबर 2029

  • 2 सितंबरशाम 5:47

    बुध कन्या 7°34′ पर वक्री

  • 5 सितंबरशाम 5:01

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 6 सितंबरदोपहर 1:34

    शनि वृषभ 0°45′ पर वक्री

  • 9 सितंबररात 8:21

    बुध अस्त (22 सितंबर तक)†

  • 15 सितंबररात 3:47

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 सितंबरसुबह 4:30

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 सितंबररात 2:16

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबररात 9:25

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 सितंबरसुबह 7:32

    बुध सिंह 23°11′ पर मार्गी

अक्टूबर 2029

  • 2 अक्टूबरसुबह 4:47

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 4 अक्टूबरशाम 7:05

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 5 अक्टूबररात 9:03

    शनि का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 अक्टूबरसुबह 4:51

    बुध अस्त (25 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबररात 1:59

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरदोपहर 2:12

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबररात 2:13

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 27 अक्टूबरदोपहर 12:49

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 30 अक्टूबरशाम 6:44

    शुक्र का धनु में प्रवेश

नवंबर 2029

  • 10 नवंबरसुबह 11:22

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 14 नवंबरसुबह 5:42

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 नवंबरदोपहर 1:59

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 25 नवंबरसुबह 11:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 नवंबरसुबह 5:00

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2029

  • 6 दिसंबररात 2:03

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 4:37

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 17 दिसंबरसुबह 5:16

    शुक्र धनु 29°46′ पर वक्री

  • 22 दिसंबरसुबह 11:20

    बुध धनु 23°26′ पर वक्री

  • 26 दिसंबररात 3:39

    बुध अस्त (6 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और