पंचांग · गोचर
गोचर 2029: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2029 में गुरु (बृहस्पति) 29 मार्च को कन्या में, शनि 8 अगस्त को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 25 अगस्त को तुला में, शनि 5 अक्टूबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में।
1 जनवरी 2029 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2028 से, 14 जनवरी 2029 तक
- चन्द्रमिथुन में30 दिसंबर 2028 से, 2 जनवरी 2029 तक
- मंगलकन्या में9 दिसंबर 2028 से, 29 जुलाई 2029 तक
- बुधमकर में27 दिसंबर 2028 से, 18 जनवरी 2029 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में26 दिसंबर 2028 से, 29 मार्च 2029 तक
- शुक्रवृश्चिक में10 दिसंबर 2028 से, 3 जनवरी 2029 तक
- शनिवक्रीमेष में23 फ़रवरी 2028 से, 8 अगस्त 2029 तक
- राहुधनु में24 जून 2028 से, 11 जनवरी 2030 तक
- केतुमिथुन में24 जून 2028 से, 11 जनवरी 2030 तक
2029 का गोचर कैलेंडर
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2029
3 जनवरीरात 8:50
शुक्र का धनु में प्रवेश
5 जनवरीरात 9:08
शनि मेष 10°10′ पर मार्गी
7 जनवरीदोपहर 3:56
बुध मकर 9°23′ पर वक्री
10 जनवरीरात 9:46
बुध अस्त (22 जनवरी तक)†
14 जनवरीसुबह 11:44
सूर्य का मकर में प्रवेश
18 जनवरीसुबह 9:20
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
22 जनवरीसुबह 4:11
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 जनवरीशाम 7:07
शुक्र का मकर में प्रवेश
28 जनवरीरात 2:40
बुध धनु 23°17′ पर मार्गी
फ़रवरी 2029
8 फ़रवरीशाम 7:29
बुध का मकर में प्रवेश
10 फ़रवरीरात 8:49
गुरु (बृहस्पति) तुला 3°10′ पर वक्री
11 फ़रवरीदोपहर 2:37
शुक्र अस्त (2 मई तक)†
13 फ़रवरीरात 12:45
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीशाम 4:11
मंगल कन्या 19°40′ पर वक्री
20 फ़रवरीशाम 5:54
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2029
3 मार्चसुबह 11:59
बुध का कुम्भ में प्रवेश
10 मार्चशाम 7:08
बुध अस्त (9 अप्रैल तक)†
14 मार्चरात 9:40
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चशाम 6:29
शुक्र का मीन में प्रवेश
20 मार्चरात 8:50
बुध का मीन में प्रवेश
29 मार्चशाम 6:46
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
अप्रैल 2029
4 अप्रैलशाम 7:42
बुध का मेष में प्रवेश
9 अप्रैलशाम 4:03
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 अप्रैलरात 9:54
शुक्र का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 6:11
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलसुबह 7:17
शनि अस्त (22 मई तक)†
25 अप्रैलरात 1:58
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2029
2 मईरात 12:56
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
2 मईसुबह 7:04
बुध वृषभ 2°25′ पर वक्री
4 मईसुबह 4:51
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
4 मईरात 9:47
बुध अस्त (21 मई तक)†
6 मईरात 3:04
मंगल कन्या 0°40′ पर मार्गी
10 मईसुबह 6:17
बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
15 मईरात 3:03
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
21 मईसुबह 10:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 मईरात 10:42
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मईरात 3:21
बुध मेष 23°18′ पर मार्गी
28 मईदोपहर 3:32
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 2029
8 जूनशाम 6:49
बुध का वृषभ में प्रवेश
14 जूनसुबह 5:24
गुरु (बृहस्पति) कन्या 23°14′ पर मार्गी
15 जूनसुबह 9:38
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
22 जूनसुबह 6:11
शुक्र का कर्क में प्रवेश
27 जूनरात 11:25
बुध अस्त (23 जुलाई तक)†
29 जूनरात 12:02
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2029
13 जुलाईरात 3:46
बुध का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईरात 8:29
सूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुलाईरात 1:46
शुक्र का सिंह में प्रवेश
23 जुलाईसुबह 5:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जुलाईशाम 7:41
बुध का सिंह में प्रवेश
29 जुलाईरात 12:59
मंगल का तुला में प्रवेश
अगस्त 2029
8 अगस्तसुबह 10:38
शनि का वृषभ में प्रवेश
11 अगस्तसुबह 4:45
शुक्र का कन्या में प्रवेश
17 अगस्तसुबह 4:52
सूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अगस्तरात 10:54
बुध का कन्या में प्रवेश
25 अगस्तरात 2:13
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
सितंबर 2029
2 सितंबररात 8:17
बुध कन्या 7°34′ पर वक्री
5 सितंबरशाम 7:31
शुक्र का तुला में प्रवेश
6 सितंबरशाम 4:04
शनि वृषभ 0°45′ पर वक्री
9 सितंबररात 10:51
बुध अस्त (22 सितंबर तक)†
15 सितंबरसुबह 6:17
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
15 सितंबरसुबह 7:00
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
17 सितंबरसुबह 4:46
सूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सितंबररात 11:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 सितंबरसुबह 10:02
बुध सिंह 23°11′ पर मार्गी
अक्टूबर 2029
2 अक्टूबरसुबह 7:17
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
4 अक्टूबररात 9:35
बुध का कन्या में प्रवेश
5 अक्टूबररात 11:33
शनि का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
11 अक्टूबरसुबह 7:21
बुध अस्त (25 नवंबर तक)†
17 अक्टूबरसुबह 4:29
गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 नवंबर तक)†
17 अक्टूबरशाम 4:42
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 4:43
बुध का तुला में प्रवेश
27 अक्टूबरदोपहर 3:19
मंगल का धनु में प्रवेश
30 अक्टूबररात 9:14
शुक्र का धनु में प्रवेश
नवंबर 2029
10 नवंबरदोपहर 1:52
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
14 नवंबरसुबह 8:12
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरशाम 4:29
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
25 नवंबरदोपहर 1:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 नवंबरसुबह 7:30
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2029
6 दिसंबरसुबह 4:33
मंगल का मकर में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 7:07
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबरसुबह 7:46
शुक्र धनु 29°46′ पर वक्री
22 दिसंबरदोपहर 1:50
बुध धनु 23°26′ पर वक्री
26 दिसंबरसुबह 6:09
बुध अस्त (6 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
