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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2029: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2029 में गुरु (बृहस्पति) 29 मार्च को कन्या में, शनि 7 अगस्त को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 24 अगस्त को तुला में, शनि 5 अक्टूबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।

1 जनवरी 2029 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2029 का गोचर कैलेंडर

सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2029

  • 3 जनवरीसुबह 7:50

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 5 जनवरीसुबह 8:08

    शनि मेष 10°10′ पर मार्गी

  • 7 जनवरीरात 2:56

    बुध मकर 9°23′ पर वक्री

  • 10 जनवरीसुबह 8:46

    बुध अस्त (21 जनवरी तक)†

  • 13 जनवरीरात 10:44

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीरात 8:20

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 21 जनवरीदोपहर 3:11

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 जनवरीसुबह 6:07

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 27 जनवरीदोपहर 1:40

    बुध धनु 23°17′ पर मार्गी

फ़रवरी 2029

  • 8 फ़रवरीसुबह 6:29

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 10 फ़रवरीसुबह 7:49

    गुरु (बृहस्पति) तुला 3°10′ पर वक्री

  • 11 फ़रवरीरात 1:37

    शुक्र अस्त (1 मई तक)†

  • 12 फ़रवरीसुबह 11:45

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 फ़रवरीरात 3:11

    मंगल कन्या 19°40′ पर वक्री

  • 20 फ़रवरीसुबह 4:54

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2029

  • 2 मार्चरात 10:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चसुबह 6:08

    बुध अस्त (9 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चसुबह 9:40

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 6:29

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चसुबह 8:50

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 29 मार्चसुबह 6:46

    गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

अप्रैल 2029

  • 4 अप्रैलसुबह 7:42

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 9 अप्रैलसुबह 4:03

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 अप्रैलसुबह 9:54

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 13 अप्रैलशाम 6:11

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलशाम 7:17

    शनि अस्त (22 मई तक)†

  • 24 अप्रैलदोपहर 1:58

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 2029

  • 1 मईदोपहर 12:56

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 1 मईशाम 7:04

    बुध वृषभ 2°25′ पर वक्री

  • 3 मईशाम 4:51

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 4 मईसुबह 9:47

    बुध अस्त (20 मई तक)†

  • 5 मईदोपहर 3:04

    मंगल कन्या 0°40′ पर मार्गी

  • 9 मईशाम 6:17

    बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 मईदोपहर 3:03

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 20 मईरात 10:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 मईसुबह 10:42

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 मईदोपहर 3:21

    बुध मेष 23°18′ पर मार्गी

  • 28 मईरात 3:32

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 2029

  • 8 जूनसुबह 6:49

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 13 जूनशाम 5:24

    गुरु (बृहस्पति) कन्या 23°14′ पर मार्गी

  • 14 जूनरात 9:38

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनशाम 6:11

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 27 जूनसुबह 11:25

    बुध अस्त (22 जुलाई तक)†

  • 28 जूनदोपहर 12:02

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2029

  • 12 जुलाईदोपहर 3:46

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईसुबह 8:29

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईदोपहर 1:46

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 22 जुलाईशाम 5:18

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 जुलाईसुबह 7:41

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 28 जुलाईदोपहर 12:59

    मंगल का तुला में प्रवेश

अगस्त 2029

  • 7 अगस्तरात 10:38

    शनि का वृषभ में प्रवेश

  • 10 अगस्तशाम 4:45

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 16 अगस्तशाम 4:52

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तसुबह 10:54

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 24 अगस्तदोपहर 2:13

    गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश

सितंबर 2029

  • 2 सितंबरसुबह 8:17

    बुध कन्या 7°34′ पर वक्री

  • 5 सितंबरसुबह 7:31

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 6 सितंबरसुबह 4:04

    शनि वृषभ 0°45′ पर वक्री

  • 9 सितंबरसुबह 10:51

    बुध अस्त (22 सितंबर तक)†

  • 14 सितंबरशाम 6:17

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 14 सितंबरशाम 7:00

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 सितंबरशाम 4:46

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबरसुबह 11:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 सितंबररात 10:02

    बुध सिंह 23°11′ पर मार्गी

अक्टूबर 2029

  • 1 अक्टूबरशाम 7:17

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 4 अक्टूबरसुबह 9:35

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 5 अक्टूबरसुबह 11:33

    शनि का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 10 अक्टूबरशाम 7:21

    बुध अस्त (25 नवंबर तक)†

  • 16 अक्टूबरशाम 4:29

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (13 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 4:42

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 22 अक्टूबरशाम 4:43

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 27 अक्टूबररात 3:19

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 30 अक्टूबरसुबह 9:14

    शुक्र का धनु में प्रवेश

नवंबर 2029

  • 10 नवंबररात 12:52

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 13 नवंबरशाम 7:12

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 नवंबररात 3:29

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 25 नवंबररात 12:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 नवंबरशाम 6:30

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2029

  • 5 दिसंबरदोपहर 3:33

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 15 दिसंबरशाम 6:07

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरशाम 6:46

    शुक्र धनु 29°46′ पर वक्री

  • 22 दिसंबररात 12:50

    बुध धनु 23°26′ पर वक्री

  • 25 दिसंबरशाम 5:09

    बुध अस्त (5 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और