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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2030: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2030 में राहु 11 जनवरी को वृश्चिक में, गुरु (बृहस्पति) 25 जनवरी को वृश्चिक में, शनि 17 अप्रैल को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 1 मई को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 23 सितंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2030 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2030 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2030

  • 1 जनवरीशाम 7:53

    शुक्र अस्त (11 जनवरी तक)†

  • 6 जनवरीसुबह 4:26

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 जनवरीसुबह 6:17

    राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 जनवरीसुबह 6:17

    केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 जनवरीसुबह 11:15

    बुध धनु 7°10′ पर मार्गी

  • 11 जनवरीशाम 5:50

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 जनवरीसुबह 9:21

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 जनवरीदोपहर 3:22

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 19 जनवरीसुबह 9:53

    शनि मेष 23°49′ पर मार्गी

  • 25 जनवरीरात 12:15

    गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 जनवरीरात 3:04

    शुक्र धनु 14°22′ पर मार्गी

फ़रवरी 2030

  • 4 फ़रवरीशाम 6:56

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 4:23

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 19 फ़रवरीरात 9:49

    बुध अस्त (24 मार्च तक)†

  • 20 फ़रवरीदोपहर 3:30

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीसुबह 6:25

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीरात 3:02

    शुक्र का मकर में प्रवेश

मार्च 2030

  • 12 मार्चशाम 4:29

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 मार्चशाम 7:45

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 3°22′ पर वक्री

  • 15 मार्चरात 1:16

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 7:02

    मंगल अस्त (26 जुलाई तक)†

  • 24 मार्चरात 9:03

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मार्चसुबह 11:49

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 31 मार्चसुबह 6:26

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 31 मार्चशाम 7:34

    मंगल का मेष में प्रवेश

अप्रैल 2030

  • 13 अप्रैलसुबह 8:02

    बुध मेष 13°31′ पर वक्री

  • 14 अप्रैलसुबह 9:45

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 15 अप्रैलशाम 4:11

    बुध अस्त (1 मई तक)†

  • 17 अप्रैलसुबह 7:26

    शनि का वृषभ में प्रवेश

  • 27 अप्रैलसुबह 11:34

    शुक्र का मीन में प्रवेश

मई 2030

  • 1 मईसुबह 6:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 1 मईदोपहर 2:24

    शनि अस्त (6 जून तक)†

  • 1 मईदोपहर 3:56

    गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 7 मईरात 1:45

    बुध मेष 3°10′ पर मार्गी

  • 11 मईदोपहर 2:45

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 6:34

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 23 मईसुबह 11:45

    शुक्र का मेष में प्रवेश

जून 2030

  • 5 जूनरात 3:53

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 6 जूनदोपहर 12:50

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जूनसुबह 9:48

    बुध अस्त (6 जुलाई तक)†

  • 15 जूनदोपहर 1:09

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनरात 10:28

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 20 जूनदोपहर 2:36

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 10:57

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2030

  • 4 जुलाईशाम 4:44

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 6 जुलाईरात 11:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 जुलाईरात 12:22

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जुलाईसुबह 7:14

    गुरु (बृहस्पति) तुला 23°29′ पर मार्गी

  • 17 जुलाईरात 12:01

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 22 जुलाईसुबह 11:43

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 26 जुलाईरात 9:14

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

अगस्त 2030

  • 6 अगस्तशाम 6:28

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 7 अगस्तसुबह 10:03

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 16 अगस्तसुबह 6:49

    बुध सिंह 20°13′ पर वक्री

  • 17 अगस्तसुबह 8:28

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 23 अगस्तसुबह 10:11

    बुध अस्त (6 सितंबर तक)†

  • 31 अगस्तसुबह 5:14

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2030

  • 6 सितंबरसुबह 6:27

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 सितंबरदोपहर 2:57

    बुध सिंह 6°50′ पर मार्गी

  • 12 सितंबरशाम 7:18

    शुक्र अस्त (29 नवंबर तक)†

  • 17 सितंबरसुबह 8:27

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबररात 2:29

    शनि वृषभ 14°40′ पर वक्री

  • 23 सितंबररात 1:13

    गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश

  • 23 सितंबरसुबह 10:26

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 24 सितंबरसुबह 9:56

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 24 सितंबरदोपहर 12:57

    बुध अस्त (4 नवंबर तक)†

  • 28 सितंबरदोपहर 12:19

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2030

  • 15 अक्टूबरदोपहर 12:00

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 17 अक्टूबररात 8:28

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबरसुबह 10:34

    शुक्र का तुला में प्रवेश

नवंबर 2030

  • 3 नवंबरसुबह 9:53

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 4 नवंबरसुबह 10:23

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 नवंबरसुबह 9:08

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 11 नवंबरशाम 6:47

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 8:17

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 8:56

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 दिसंबर तक)†

  • 25 नवंबरसुबह 5:09

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 29 नवंबरशाम 5:32

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

दिसंबर 2030

  • 5 दिसंबरसुबह 7:01

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 6 दिसंबरसुबह 8:17

    बुध धनु 7°35′ पर वक्री

  • 10 दिसंबरदोपहर 12:47

    बुध अस्त (21 दिसंबर तक)†

  • 14 दिसंबरशाम 5:51

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 दिसंबरशाम 5:14

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 दिसंबरसुबह 10:56

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 21 दिसंबरसुबह 11:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 दिसंबररात 2:44

    बुध वृश्चिक 21°16′ पर मार्गी

  • 29 दिसंबरसुबह 5:14

    शुक्र का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और