पंचांग · गोचर
गोचर 2030: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2030 में राहु 11 जनवरी को वृश्चिक में, गुरु (बृहस्पति) 25 जनवरी को वृश्चिक में, शनि 17 अप्रैल को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 1 मई को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 23 सितंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।
1 जनवरी 2030 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2029 से, 14 जनवरी 2030 तक
- चन्द्रतुला में30 दिसंबर 2029 से, 1 जनवरी 2030 तक
- मंगलमकर में6 दिसंबर 2029 से, 13 जनवरी 2030 तक
- बुधवक्रीधनु में30 नवंबर 2029 से, 5 फ़रवरी 2030 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में25 अगस्त 2029 से, 25 जनवरी 2030 तक
- शुक्रवक्रीधनु में31 अक्टूबर 2029 से, 28 फ़रवरी 2030 तक
- शनिवक्रीमेष में6 अक्टूबर 2029 से, 17 अप्रैल 2030 तक
- राहुधनु में24 जून 2028 से, 11 जनवरी 2030 तक
- केतुमिथुन में24 जून 2028 से, 11 जनवरी 2030 तक
2030 का गोचर कैलेंडर
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2030
2 जनवरीरात 3:23
शुक्र अस्त (12 जनवरी तक)†
6 जनवरीसुबह 11:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 जनवरीदोपहर 1:47
राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
11 जनवरीदोपहर 1:47
केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
11 जनवरीशाम 6:45
बुध धनु 7°10′ पर मार्गी
12 जनवरीरात 1:20
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
13 जनवरीशाम 4:51
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
14 जनवरीरात 10:52
सूर्य का मकर में प्रवेश
19 जनवरीशाम 5:23
शनि मेष 23°49′ पर मार्गी
25 जनवरीसुबह 7:45
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
27 जनवरीसुबह 10:34
शुक्र धनु 14°22′ पर मार्गी
फ़रवरी 2030
5 फ़रवरीरात 2:26
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 11:53
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
20 फ़रवरीसुबह 5:19
बुध अस्त (25 मार्च तक)†
20 फ़रवरीरात 11:00
मंगल का मीन में प्रवेश
24 फ़रवरीदोपहर 1:55
बुध का कुम्भ में प्रवेश
28 फ़रवरीसुबह 10:32
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2030
12 मार्चरात 11:59
बुध का मीन में प्रवेश
14 मार्चरात 3:15
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 3°22′ पर वक्री
15 मार्चसुबह 8:46
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चदोपहर 2:32
मंगल अस्त (27 जुलाई तक)†
25 मार्चसुबह 4:33
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 मार्चशाम 7:19
बुध का मेष में प्रवेश
31 मार्चदोपहर 1:56
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2030
1 अप्रैलरात 3:04
मंगल का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलदोपहर 2:32
बुध मेष 13°31′ पर वक्री
14 अप्रैलशाम 4:15
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलरात 10:41
बुध अस्त (1 मई तक)†
17 अप्रैलदोपहर 1:56
शनि का वृषभ में प्रवेश
27 अप्रैलशाम 6:04
शुक्र का मीन में प्रवेश
मई 2030
1 मईदोपहर 1:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
1 मईरात 8:54
शनि अस्त (6 जून तक)†
1 मईरात 10:26
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
7 मईसुबह 8:15
बुध मेष 3°10′ पर मार्गी
11 मईरात 9:15
मंगल का वृषभ में प्रवेश
15 मईदोपहर 1:04
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईशाम 6:15
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2030
5 जूनसुबह 10:23
बुध का वृषभ में प्रवेश
6 जूनशाम 7:20
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जूनशाम 4:18
बुध अस्त (7 जुलाई तक)†
15 जूनशाम 7:39
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनसुबह 4:58
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
20 जूनरात 9:06
बुध का मिथुन में प्रवेश
23 जूनशाम 5:27
मंगल का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2030
4 जुलाईरात 11:14
बुध का कर्क में प्रवेश
7 जुलाईसुबह 6:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 जुलाईसुबह 6:52
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
15 जुलाईदोपहर 1:44
गुरु (बृहस्पति) तुला 23°29′ पर मार्गी
17 जुलाईसुबह 6:31
सूर्य का कर्क में प्रवेश
22 जुलाईशाम 6:13
बुध का सिंह में प्रवेश
27 जुलाईरात 3:44
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अगस्त 2030
7 अगस्तरात 12:58
शुक्र का कर्क में प्रवेश
7 अगस्तशाम 4:33
मंगल का कर्क में प्रवेश
16 अगस्तदोपहर 1:19
बुध सिंह 20°13′ पर वक्री
17 अगस्तदोपहर 2:58
सूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अगस्तशाम 4:41
बुध अस्त (6 सितंबर तक)†
31 अगस्तसुबह 11:44
शुक्र का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2030
6 सितंबरदोपहर 12:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 सितंबररात 9:27
बुध सिंह 6°50′ पर मार्गी
13 सितंबररात 1:48
शुक्र अस्त (30 नवंबर तक)†
17 सितंबरदोपहर 2:57
सूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सितंबरसुबह 8:59
शनि वृषभ 14°40′ पर वक्री
23 सितंबरसुबह 7:43
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
23 सितंबरशाम 4:56
मंगल का सिंह में प्रवेश
24 सितंबरशाम 4:26
शुक्र का कन्या में प्रवेश
24 सितंबरशाम 7:27
बुध अस्त (4 नवंबर तक)†
28 सितंबरशाम 6:49
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2030
15 अक्टूबरशाम 7:30
बुध का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबररात 3:58
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरशाम 6:04
शुक्र का तुला में प्रवेश
नवंबर 2030
3 नवंबरशाम 5:23
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
4 नवंबरशाम 5:53
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 नवंबरशाम 4:38
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
12 नवंबररात 2:17
मंगल का कन्या में प्रवेश
17 नवंबररात 3:47
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 4:26
गुरु (बृहस्पति) अस्त (15 दिसंबर तक)†
25 नवंबरदोपहर 12:39
बुध का धनु में प्रवेश
30 नवंबररात 1:02
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2030
5 दिसंबरदोपहर 2:31
शुक्र का धनु में प्रवेश
6 दिसंबरदोपहर 3:47
बुध धनु 7°35′ पर वक्री
10 दिसंबररात 8:17
बुध अस्त (21 दिसंबर तक)†
15 दिसंबररात 1:21
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
16 दिसंबररात 12:44
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
16 दिसंबरशाम 6:26
सूर्य का धनु में प्रवेश
21 दिसंबरशाम 7:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 दिसंबरसुबह 10:14
बुध वृश्चिक 21°16′ पर मार्गी
29 दिसंबरदोपहर 12:44
शुक्र का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
