पंचांग · गोचर
गोचर 2030: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2030 में राहु 10 जनवरी को वृश्चिक में, गुरु (बृहस्पति) 24 जनवरी को वृश्चिक में, शनि 16 अप्रैल को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 1 मई को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 22 सितंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2030 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2029 से, 14 जनवरी 2030 तक
- चन्द्रवृश्चिक में31 दिसंबर 2029 से, 2 जनवरी 2030 तक
- मंगलमकर में5 दिसंबर 2029 से, 12 जनवरी 2030 तक
- बुधवक्रीधनु में29 नवंबर 2029 से, 4 फ़रवरी 2030 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में24 अगस्त 2029 से, 24 जनवरी 2030 तक
- शुक्रवक्रीधनु में30 अक्टूबर 2029 से, 27 फ़रवरी 2030 तक
- शनिवक्रीमेष में5 अक्टूबर 2029 से, 16 अप्रैल 2030 तक
- राहुधनु में23 जून 2028 से, 10 जनवरी 2030 तक
- केतुमिथुन में23 जून 2028 से, 10 जनवरी 2030 तक
2030 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2030
1 जनवरीसुबह 6:23
शुक्र अस्त (11 जनवरी तक)†
5 जनवरीदोपहर 2:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 जनवरीशाम 4:47
राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
10 जनवरीशाम 4:47
केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
10 जनवरीरात 9:45
बुध धनु 7°10′ पर मार्गी
11 जनवरीसुबह 4:20
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जनवरीशाम 7:51
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
14 जनवरीरात 1:52
सूर्य का मकर में प्रवेश
18 जनवरीरात 8:23
शनि मेष 23°49′ पर मार्गी
24 जनवरीसुबह 10:45
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
26 जनवरीदोपहर 1:34
शुक्र धनु 14°22′ पर मार्गी
फ़रवरी 2030
4 फ़रवरीसुबह 5:26
बुध का मकर में प्रवेश
12 फ़रवरीदोपहर 2:53
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
19 फ़रवरीसुबह 8:19
बुध अस्त (24 मार्च तक)†
20 फ़रवरीरात 2:00
मंगल का मीन में प्रवेश
23 फ़रवरीशाम 4:55
बुध का कुम्भ में प्रवेश
27 फ़रवरीदोपहर 1:32
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2030
12 मार्चरात 3:59
बुध का मीन में प्रवेश
13 मार्चसुबह 7:15
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 3°22′ पर वक्री
14 मार्चदोपहर 12:46
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चशाम 6:32
मंगल अस्त (26 जुलाई तक)†
24 मार्चसुबह 8:33
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मार्चरात 11:19
बुध का मेष में प्रवेश
30 मार्चशाम 5:56
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
31 मार्चसुबह 7:04
मंगल का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2030
12 अप्रैलशाम 7:32
बुध मेष 13°31′ पर वक्री
13 अप्रैलरात 9:15
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलरात 3:41
बुध अस्त (30 अप्रैल तक)†
16 अप्रैलशाम 6:56
शनि का वृषभ में प्रवेश
26 अप्रैलरात 11:04
शुक्र का मीन में प्रवेश
30 अप्रैलशाम 6:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2030
1 मईरात 1:54
शनि अस्त (6 जून तक)†
1 मईरात 3:26
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
6 मईदोपहर 1:15
बुध मेष 3°10′ पर मार्गी
11 मईरात 2:15
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 मईशाम 6:04
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
22 मईरात 11:15
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2030
4 जूनदोपहर 3:23
बुध का वृषभ में प्रवेश
6 जूनरात 12:20
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
11 जूनरात 9:18
बुध अस्त (6 जुलाई तक)†
15 जूनरात 12:39
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनसुबह 9:58
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
20 जूनरात 2:06
बुध का मिथुन में प्रवेश
22 जूनरात 10:27
मंगल का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2030
4 जुलाईसुबह 4:14
बुध का कर्क में प्रवेश
6 जुलाईसुबह 11:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जुलाईसुबह 11:52
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
14 जुलाईशाम 6:44
गुरु (बृहस्पति) तुला 23°29′ पर मार्गी
16 जुलाईसुबह 11:31
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईरात 11:13
बुध का सिंह में प्रवेश
26 जुलाईसुबह 8:44
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अगस्त 2030
6 अगस्तसुबह 5:58
शुक्र का कर्क में प्रवेश
6 अगस्तरात 9:33
मंगल का कर्क में प्रवेश
15 अगस्तशाम 6:19
बुध सिंह 20°13′ पर वक्री
16 अगस्तशाम 7:58
सूर्य का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तरात 9:41
बुध अस्त (5 सितंबर तक)†
30 अगस्तशाम 4:44
शुक्र का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2030
5 सितंबरशाम 5:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 सितंबररात 2:27
बुध सिंह 6°50′ पर मार्गी
12 सितंबरसुबह 6:48
शुक्र अस्त (29 नवंबर तक)†
16 सितंबरशाम 7:57
सूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सितंबरदोपहर 1:59
शनि वृषभ 14°40′ पर वक्री
22 सितंबरदोपहर 12:43
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
22 सितंबररात 9:56
मंगल का सिंह में प्रवेश
23 सितंबररात 9:26
शुक्र का कन्या में प्रवेश
24 सितंबररात 12:27
बुध अस्त (3 नवंबर तक)†
27 सितंबररात 11:49
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2030
14 अक्टूबररात 11:30
बुध का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 7:58
सूर्य का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबररात 10:04
शुक्र का तुला में प्रवेश
नवंबर 2030
2 नवंबररात 9:23
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
3 नवंबररात 8:53
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 नवंबरशाम 7:38
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
11 नवंबरसुबह 5:17
मंगल का कन्या में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 6:47
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 7:26
गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 दिसंबर तक)†
24 नवंबरदोपहर 3:39
बुध का धनु में प्रवेश
29 नवंबरसुबह 4:02
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2030
4 दिसंबरशाम 5:31
शुक्र का धनु में प्रवेश
5 दिसंबरशाम 6:47
बुध धनु 7°35′ पर वक्री
9 दिसंबररात 11:17
बुध अस्त (20 दिसंबर तक)†
14 दिसंबरसुबह 4:21
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
15 दिसंबररात 3:44
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
15 दिसंबररात 9:26
सूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिसंबररात 10:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 दिसंबरदोपहर 1:14
बुध वृश्चिक 21°16′ पर मार्गी
28 दिसंबरदोपहर 3:44
शुक्र का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
