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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2031: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2031 में गुरु (बृहस्पति) 17 फ़रवरी को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 14 जून को वृश्चिक में, राहु 31 जुलाई को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 15 अक्टूबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में।

1 जनवरी 2031 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2031 का गोचर कैलेंडर

सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2031

  • 4 जनवरीरात 9:57

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 7 जनवरीरात 9:48

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 15 जनवरीरात 2:39

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 22 जनवरीसुबह 10:15

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 29 जनवरीदोपहर 3:37

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 31 जनवरीरात 3:54

    बुध अस्त (9 मार्च तक)†

फ़रवरी 2031

  • 2 फ़रवरीदोपहर 1:23

    शनि वृषभ 7°43′ पर मार्गी

  • 13 फ़रवरीदोपहर 3:37

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीदोपहर 2:40

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीरात 9:01

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीशाम 6:45

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

मार्च 2031

  • 4 मार्चरात 11:41

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 9 मार्चरात 2:53

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 मार्चरात 3:37

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 15 मार्चदोपहर 12:29

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 26 मार्चसुबह 11:13

    बुध मीन 25°27′ पर वक्री

  • 28 मार्चशाम 5:44

    बुध अस्त (12 अप्रैल तक)†

  • 29 मार्चसुबह 11:00

    मंगल तुला 27°21′ पर वक्री

अप्रैल 2031

  • 6 अप्रैलसुबह 6:12

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 12 अप्रैलसुबह 5:27

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अप्रैलशाम 7:58

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 15 अप्रैलरात 9:16

    गुरु (बृहस्पति) धनु 4°42′ पर वक्री

  • 18 अप्रैलरात 8:46

    बुध मीन 13°33′ पर मार्गी

मई 2031

  • 2 मईसुबह 11:15

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 10 मईरात 8:55

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 15 मईशाम 4:47

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 16 मईसुबह 11:48

    शनि अस्त (21 जून तक)†

  • 27 मईरात 10:53

    बुध अस्त (21 जून तक)†

  • 29 मईरात 1:59

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 30 मईरात 11:09

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जून 2031

  • 12 जूनरात 3:17

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 13 जूनरात 9:30

    मंगल तुला 10°09′ पर मार्गी

  • 14 जूनसुबह 8:56

    गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 जूनरात 11:21

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनसुबह 8:22

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 जूनदोपहर 3:52

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 जूनसुबह 7:01

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2031

  • 10 जुलाईरात 3:39

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 17 जुलाईसुबह 10:12

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 21 जुलाईरात 2:36

    शुक्र सिंह 2°08′ पर वक्री

  • 22 जुलाईसुबह 8:31

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 29 जुलाईशाम 4:16

    बुध सिंह 2°08′ पर वक्री

  • 31 जुलाईदोपहर 12:36

    शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 31 जुलाईदोपहर 1:14

    राहु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 31 जुलाईदोपहर 1:14

    केतु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

अगस्त 2031

  • 5 अगस्तसुबह 11:08

    बुध अस्त (20 अगस्त तक)†

  • 5 अगस्तशाम 7:07

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 6 अगस्तसुबह 9:41

    शुक्र अस्त (16 अगस्त तक)†

  • 15 अगस्तदोपहर 12:12

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 अगस्तदोपहर 2:46

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 24°51′ पर मार्गी

  • 16 अगस्तदोपहर 3:05

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 अगस्तशाम 6:38

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तसुबह 5:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 अगस्तदोपहर 1:58

    बुध कर्क 20°00′ पर मार्गी

सितंबर 2031

  • 2 सितंबररात 3:28

    शुक्र कर्क 15°43′ पर मार्गी

  • 4 सितंबरसुबह 6:07

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 8 सितंबरदोपहर 2:20

    बुध अस्त (15 अक्टूबर तक)†

  • 17 सितंबरशाम 6:38

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 20 सितंबररात 9:46

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2031

  • 2 अक्टूबरशाम 6:36

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 2 अक्टूबररात 8:58

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 5 अक्टूबररात 8:50

    शनि वृषभ 28°44′ पर वक्री

  • 8 अक्टूबरसुबह 4:52

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 15 अक्टूबररात 12:42

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 अक्टूबररात 8:01

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

  • 18 अक्टूबरसुबह 7:38

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 28 अक्टूबरसुबह 6:25

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2031

  • 3 नवंबरसुबह 7:15

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 13 नवंबरसुबह 7:47

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 17 नवंबरसुबह 7:26

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 20 नवंबरसुबह 7:45

    बुध वृश्चिक 21°45′ पर वक्री

  • 25 नवंबररात 1:52

    बुध अस्त (6 दिसंबर तक)†

  • 29 नवंबररात 11:02

    शुक्र का तुला में प्रवेश

दिसंबर 2031

  • 6 दिसंबररात 2:21

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 दिसंबररात 2:53

    बुध वृश्चिक 5°31′ पर मार्गी

  • 16 दिसंबररात 10:03

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 18 दिसंबरशाम 7:10

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (15 जनवरी तक)†

  • 22 दिसंबरशाम 4:04

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 25 दिसंबररात 3:01

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और