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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2032: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2032 में गुरु (बृहस्पति) 5 मार्च को मकर में, शनि 30 मई को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 12 अगस्त को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 23 अक्टूबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय डरबन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।

1 जनवरी 2032 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2032 का गोचर कैलेंडर

सभी समय डरबन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2032

  • 2 जनवरीदोपहर 1:38

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 9 जनवरीशाम 7:40

    बुध अस्त (20 फ़रवरी तक)†

  • 15 जनवरीरात 12:13

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीसुबह 8:33

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 18 जनवरीसुबह 7:48

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 22 जनवरीसुबह 4:42

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 30 जनवरीसुबह 9:24

    मंगल का मीन में प्रवेश

फ़रवरी 2032

  • 8 फ़रवरीशाम 7:02

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 11 फ़रवरीदोपहर 3:10

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीदोपहर 1:09

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीसुबह 9:28

    शनि वृषभ 21°46′ पर मार्गी

  • 20 फ़रवरीसुबह 9:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 फ़रवरीरात 2:48

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 2032

  • 5 मार्चसुबह 9:44

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

  • 6 मार्चरात 8:41

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 7 मार्चशाम 6:21

    बुध मीन 8°05′ पर वक्री

  • 10 मार्चरात 2:19

    बुध अस्त (23 मार्च तक)†

  • 10 मार्चसुबह 8:30

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 14 मार्चसुबह 10:00

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चरात 1:03

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 मार्चदोपहर 2:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 मार्चशाम 4:29

    बुध कुम्भ 24°44′ पर मार्गी

  • 31 मार्चरात 2:23

    शुक्र का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2032

  • 11 अप्रैलरात 2:37

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 अप्रैलशाम 6:30

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 20 अप्रैलरात 10:09

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 24 अप्रैलसुबह 9:24

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 25 अप्रैलरात 8:03

    शुक्र अस्त (8 जुलाई तक)†

मई 2032

  • 3 मईरात 11:24

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 10 मईशाम 6:41

    बुध अस्त (4 जून तक)†

  • 12 मईरात 10:13

    मंगल अस्त (3 सितंबर तक)†

  • 14 मईदोपहर 3:22

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 18 मईशाम 6:01

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 19 मईसुबह 11:41

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 19 मईशाम 4:30

    गुरु (बृहस्पति) मकर 7°50′ पर वक्री

  • 30 मईरात 3:19

    शनि अस्त (5 जुलाई तक)†

  • 30 मईरात 10:13

    शनि का मिथुन में प्रवेश

जून 2032

  • 2 जूनसुबह 10:22

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 3 जूनसुबह 9:55

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 4 जूनसुबह 10:18

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जूनरात 3:46

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 14 जूनरात 9:59

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 20 जूनदोपहर 3:11

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2032

  • 5 जुलाईसुबह 11:04

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 6 जुलाईदोपहर 1:52

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 8 जुलाईरात 11:30

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 जुलाईसुबह 4:32

    बुध कर्क 13°14′ पर वक्री

  • 16 जुलाईसुबह 4:51

    बुध अस्त (31 जुलाई तक)†

  • 16 जुलाईसुबह 8:52

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईशाम 4:58

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 31 जुलाईरात 12:04

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 31 जुलाईरात 9:28

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अगस्त 2032

  • 3 अगस्तसुबह 8:52

    बुध कर्क 2°31′ पर मार्गी

  • 12 अगस्तशाम 5:42

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 अगस्तशाम 5:19

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 22 अगस्तदोपहर 1:01

    बुध अस्त (24 सितंबर तक)†

  • 24 अगस्तसुबह 11:05

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 27 अगस्तरात 12:03

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2032

  • 3 सितंबरसुबह 6:23

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 3 सितंबरसुबह 9:18

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 11 सितंबरदोपहर 2:46

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 16 सितंबरशाम 5:19

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबररात 10:09

    गुरु (बृहस्पति) धनु 28°00′ पर मार्गी

  • 18 सितंबररात 12:15

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 24 सितंबररात 1:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 सितंबरशाम 6:12

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2032

  • 12 अक्टूबरशाम 5:01

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 5:20

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 11:56

    शनि मिथुन 12°52′ पर वक्री

  • 20 अक्टूबररात 11:55

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 22 अक्टूबररात 11:56

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरशाम 4:28

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

नवंबर 2032

  • 2 नवंबरदोपहर 1:56

    बुध वृश्चिक 5°54′ पर वक्री

  • 6 नवंबरदोपहर 3:36

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 7 नवंबररात 10:40

    बुध अस्त (19 नवंबर तक)†

  • 11 नवंबरसुबह 8:43

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 नवंबरसुबह 5:10

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरसुबह 4:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 नवंबरशाम 4:01

    बुध तुला 19°49′ पर मार्गी

दिसंबर 2032

  • 2 दिसंबररात 1:47

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 5 दिसंबरसुबह 8:47

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 8 दिसंबरसुबह 10:51

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 15 दिसंबरशाम 7:49

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 18 दिसंबरदोपहर 12:50

    बुध अस्त (2 फ़रवरी तक)†

  • 25 दिसंबररात 10:18

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 28 दिसंबरशाम 5:24

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और