पंचांग · गोचर
गोचर 2032: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2032 में गुरु (बृहस्पति) 5 मार्च को मकर में, शनि 31 मई को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 13 अगस्त को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 24 अक्टूबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सिडनी के स्थानीय समय (Australia/Sydney, AEDT/AEST) में।
1 जनवरी 2032 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2031 से, 15 जनवरी 2032 तक
- चन्द्रकर्क में30 दिसंबर 2031 से, 2 जनवरी 2032 तक
- मंगलकुम्भ में22 दिसंबर 2031 से, 30 जनवरी 2032 तक
- बुधवृश्चिक में28 अक्टूबर 2031 से, 2 जनवरी 2032 तक
- गुरु (बृहस्पति)धनु में15 अक्टूबर 2031 से, 5 मार्च 2032 तक
- शुक्रवृश्चिक में25 दिसंबर 2031 से, 18 जनवरी 2032 तक
- शनिवक्रीवृषभ में17 अप्रैल 2030 से, 31 मई 2032 तक
- राहुतुला में31 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
- केतुमेष में31 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
2032 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सिडनी के स्थानीय समय (Australia/Sydney, AEDT/AEST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2032
2 जनवरीरात 10:38
बुध का धनु में प्रवेश
10 जनवरीसुबह 4:40
बुध अस्त (20 फ़रवरी तक)†
15 जनवरीसुबह 9:13
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीशाम 5:33
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
18 जनवरीशाम 4:48
शुक्र का धनु में प्रवेश
22 जनवरीदोपहर 1:42
बुध का मकर में प्रवेश
30 जनवरीशाम 6:24
मंगल का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2032
9 फ़रवरीसुबह 4:02
बुध का कुम्भ में प्रवेश
12 फ़रवरीरात 12:10
शुक्र का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीरात 10:09
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीशाम 6:28
शनि वृषभ 21°46′ पर मार्गी
20 फ़रवरीशाम 6:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीसुबह 11:48
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 2032
5 मार्चशाम 6:44
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
7 मार्चसुबह 5:41
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
8 मार्चरात 3:21
बुध मीन 8°05′ पर वक्री
10 मार्चसुबह 11:19
बुध अस्त (23 मार्च तक)†
10 मार्चशाम 5:30
मंगल का मेष में प्रवेश
14 मार्चशाम 7:00
सूर्य का मीन में प्रवेश
20 मार्चसुबह 10:03
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
23 मार्चरात 11:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मार्चरात 1:29
बुध कुम्भ 24°44′ पर मार्गी
31 मार्चसुबह 11:23
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2032
11 अप्रैलसुबह 10:37
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलरात 2:30
सूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलसुबह 6:09
मंगल का वृषभ में प्रवेश
24 अप्रैलशाम 5:24
शुक्र का मेष में प्रवेश
26 अप्रैलसुबह 4:03
शुक्र अस्त (9 जुलाई तक)†
मई 2032
4 मईसुबह 7:24
बुध का मेष में प्रवेश
11 मईरात 2:41
बुध अस्त (4 जून तक)†
13 मईसुबह 6:13
मंगल अस्त (3 सितंबर तक)†
14 मईरात 11:22
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
19 मईरात 2:01
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
19 मईशाम 7:41
बुध का वृषभ में प्रवेश
20 मईरात 12:30
गुरु (बृहस्पति) मकर 7°50′ पर वक्री
30 मईसुबह 11:19
शनि अस्त (5 जुलाई तक)†
31 मईसुबह 6:13
शनि का मिथुन में प्रवेश
जून 2032
2 जूनशाम 6:22
बुध का मिथुन में प्रवेश
3 जूनशाम 5:55
मंगल का मिथुन में प्रवेश
4 जूनशाम 6:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जूनसुबह 11:46
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
15 जूनसुबह 5:59
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनरात 11:11
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2032
5 जुलाईशाम 7:04
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
6 जुलाईरात 9:52
शुक्र का कर्क में प्रवेश
9 जुलाईसुबह 7:30
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
10 जुलाईदोपहर 12:32
बुध कर्क 13°14′ पर वक्री
16 जुलाईदोपहर 12:51
बुध अस्त (1 अगस्त तक)†
16 जुलाईशाम 4:52
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईरात 12:58
मंगल का कर्क में प्रवेश
31 जुलाईसुबह 8:04
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2032
1 अगस्तसुबह 5:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
3 अगस्तशाम 4:52
बुध कर्क 2°31′ पर मार्गी
13 अगस्तरात 1:42
गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अगस्तरात 1:19
सूर्य का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तरात 9:01
बुध अस्त (24 सितंबर तक)†
24 अगस्तशाम 7:05
शुक्र का कन्या में प्रवेश
27 अगस्तसुबह 8:03
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2032
3 सितंबरदोपहर 2:23
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
3 सितंबरशाम 5:18
मंगल का सिंह में प्रवेश
11 सितंबररात 10:46
बुध का कन्या में प्रवेश
17 सितंबररात 1:19
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरसुबह 6:09
गुरु (बृहस्पति) धनु 28°00′ पर मार्गी
18 सितंबरसुबह 8:15
शुक्र का तुला में प्रवेश
24 सितंबरसुबह 9:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 सितंबररात 2:12
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2032
13 अक्टूबररात 2:01
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 2:20
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरसुबह 8:56
शनि मिथुन 12°52′ पर वक्री
21 अक्टूबरसुबह 8:55
मंगल का कन्या में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 8:56
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
24 अक्टूबररात 1:28
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
नवंबर 2032
2 नवंबररात 10:56
बुध वृश्चिक 5°54′ पर वक्री
7 नवंबररात 12:36
शुक्र का धनु में प्रवेश
8 नवंबरसुबह 7:40
बुध अस्त (19 नवंबर तक)†
11 नवंबरशाम 5:43
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
16 नवंबरदोपहर 2:10
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नवंबरदोपहर 1:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 नवंबररात 1:01
बुध तुला 19°49′ पर मार्गी
दिसंबर 2032
2 दिसंबरसुबह 10:47
शुक्र का मकर में प्रवेश
5 दिसंबरशाम 5:47
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
8 दिसंबरशाम 7:51
मंगल का तुला में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 4:49
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबररात 9:50
बुध अस्त (2 फ़रवरी तक)†
26 दिसंबरसुबह 7:18
बुध का धनु में प्रवेश
29 दिसंबररात 2:24
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
