पंचांग · गोचर
गोचर 2032: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2032 में गुरु (बृहस्पति) 5 मार्च को मकर में, शनि 30 मई को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 12 अगस्त को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 23 अक्टूबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।
1 जनवरी 2032 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2031 से, 14 जनवरी 2032 तक
- चन्द्रकर्क में29 दिसंबर 2031 से, 1 जनवरी 2032 तक
- मंगलकुम्भ में22 दिसंबर 2031 से, 30 जनवरी 2032 तक
- बुधवृश्चिक में27 अक्टूबर 2031 से, 2 जनवरी 2032 तक
- गुरु (बृहस्पति)धनु में15 अक्टूबर 2031 से, 5 मार्च 2032 तक
- शुक्रवृश्चिक में24 दिसंबर 2031 से, 18 जनवरी 2032 तक
- शनिवक्रीवृषभ में16 अप्रैल 2030 से, 30 मई 2032 तक
- राहुतुला में30 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
- केतुमेष में30 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
2032 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2032
2 जनवरीसुबह 6:38
बुध का धनु में प्रवेश
9 जनवरीदोपहर 12:40
बुध अस्त (20 फ़रवरी तक)†
14 जनवरीशाम 5:13
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीरात 1:33
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
18 जनवरीरात 12:48
शुक्र का धनु में प्रवेश
21 जनवरीरात 9:42
बुध का मकर में प्रवेश
30 जनवरीरात 2:24
मंगल का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2032
8 फ़रवरीदोपहर 12:02
बुध का कुम्भ में प्रवेश
11 फ़रवरीसुबह 8:10
शुक्र का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 6:09
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीरात 2:28
शनि वृषभ 21°46′ पर मार्गी
20 फ़रवरीरात 2:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 फ़रवरीशाम 7:48
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 2032
5 मार्चरात 2:44
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
6 मार्चदोपहर 1:41
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
7 मार्चसुबह 11:21
बुध मीन 8°05′ पर वक्री
9 मार्चशाम 7:19
बुध अस्त (23 मार्च तक)†
10 मार्चरात 1:30
मंगल का मेष में प्रवेश
14 मार्चसुबह 4:00
सूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्चशाम 7:03
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
23 मार्चसुबह 8:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 मार्चसुबह 10:29
बुध कुम्भ 24°44′ पर मार्गी
30 मार्चरात 8:23
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2032
10 अप्रैलरात 8:37
बुध का मीन में प्रवेश
13 अप्रैलदोपहर 12:30
सूर्य का मेष में प्रवेश
20 अप्रैलशाम 4:09
मंगल का वृषभ में प्रवेश
24 अप्रैलरात 3:24
शुक्र का मेष में प्रवेश
25 अप्रैलदोपहर 2:03
शुक्र अस्त (8 जुलाई तक)†
मई 2032
3 मईशाम 5:24
बुध का मेष में प्रवेश
10 मईदोपहर 12:41
बुध अस्त (4 जून तक)†
12 मईशाम 4:13
मंगल अस्त (3 सितंबर तक)†
14 मईसुबह 9:22
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मईदोपहर 12:01
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
19 मईसुबह 5:41
बुध का वृषभ में प्रवेश
19 मईसुबह 10:30
गुरु (बृहस्पति) मकर 7°50′ पर वक्री
29 मईरात 9:19
शनि अस्त (5 जुलाई तक)†
30 मईशाम 4:13
शनि का मिथुन में प्रवेश
जून 2032
2 जूनसुबह 4:22
बुध का मिथुन में प्रवेश
3 जूनरात 3:55
मंगल का मिथुन में प्रवेश
4 जूनसुबह 4:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 जूनरात 9:46
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
14 जूनदोपहर 3:59
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनसुबह 9:11
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2032
5 जुलाईसुबह 5:04
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
6 जुलाईसुबह 7:52
शुक्र का कर्क में प्रवेश
8 जुलाईशाम 5:30
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
9 जुलाईरात 10:32
बुध कर्क 13°14′ पर वक्री
15 जुलाईरात 10:51
बुध अस्त (31 जुलाई तक)†
16 जुलाईरात 2:52
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईसुबह 10:58
मंगल का कर्क में प्रवेश
30 जुलाईशाम 6:04
शुक्र का सिंह में प्रवेश
31 जुलाईदोपहर 3:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अगस्त 2032
3 अगस्तरात 2:52
बुध कर्क 2°31′ पर मार्गी
12 अगस्तसुबह 11:42
गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
16 अगस्तसुबह 11:19
सूर्य का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तसुबह 7:01
बुध अस्त (23 सितंबर तक)†
24 अगस्तसुबह 5:05
शुक्र का कन्या में प्रवेश
26 अगस्तशाम 6:03
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2032
3 सितंबररात 12:23
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
3 सितंबररात 3:18
मंगल का सिंह में प्रवेश
11 सितंबरसुबह 8:46
बुध का कन्या में प्रवेश
16 सितंबरसुबह 11:19
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरशाम 4:09
गुरु (बृहस्पति) धनु 28°00′ पर मार्गी
17 सितंबरशाम 6:15
शुक्र का तुला में प्रवेश
23 सितंबरशाम 7:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 सितंबरदोपहर 12:12
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2032
12 अक्टूबरसुबह 11:01
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
16 अक्टूबररात 11:20
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरशाम 5:56
शनि मिथुन 12°52′ पर वक्री
20 अक्टूबरशाम 5:55
मंगल का कन्या में प्रवेश
22 अक्टूबरशाम 5:56
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 10:28
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
नवंबर 2032
2 नवंबरसुबह 7:56
बुध वृश्चिक 5°54′ पर वक्री
6 नवंबरसुबह 9:36
शुक्र का धनु में प्रवेश
7 नवंबरदोपहर 3:40
बुध अस्त (18 नवंबर तक)†
11 नवंबररात 1:43
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
15 नवंबररात 10:10
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबररात 9:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 नवंबरसुबह 9:01
बुध तुला 19°49′ पर मार्गी
दिसंबर 2032
1 दिसंबरशाम 6:47
शुक्र का मकर में प्रवेश
5 दिसंबररात 1:47
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
8 दिसंबररात 3:51
मंगल का तुला में प्रवेश
15 दिसंबरदोपहर 12:49
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरसुबह 5:50
बुध अस्त (2 फ़रवरी तक)†
25 दिसंबरदोपहर 3:18
बुध का धनु में प्रवेश
28 दिसंबरसुबह 10:24
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
