पंचांग · गोचर
गोचर 2033: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2033 में राहु 16 फ़रवरी को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 18 मार्च को कुम्भ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।
1 जनवरी 2033 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2032 से, 14 जनवरी 2033 तक
- चन्द्रधनु में31 दिसंबर 2032 से, 2 जनवरी 2033 तक
- मंगलतुला में8 दिसंबर 2032 से, 28 जनवरी 2033 तक
- बुधधनु में26 दिसंबर 2032 से, 14 जनवरी 2033 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में24 अक्टूबर 2032 से, 18 मार्च 2033 तक
- शुक्रकुम्भ में29 दिसंबर 2032 से, 29 जनवरी 2033 तक
- शनिवक्रीमिथुन में31 मई 2032 से, 13 जुलाई 2034 तक
- राहुतुला में31 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
- केतुमेष में31 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
2033 का गोचर कैलेंडर
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2033
14 जनवरीसुबह 6:35
बुध का मकर में प्रवेश
14 जनवरीशाम 5:30
सूर्य का मकर में प्रवेश
20 जनवरीसुबह 7:39
गुरु (बृहस्पति) अस्त (17 फ़रवरी तक)†
28 जनवरीरात 2:17
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
29 जनवरीसुबह 4:00
शुक्र का मीन में प्रवेश
31 जनवरीरात 8:01
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2033
2 फ़रवरीरात 9:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 फ़रवरीसुबह 6:27
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीशाम 7:42
राहु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
16 फ़रवरीशाम 7:42
केतु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
17 फ़रवरीदोपहर 3:26
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
19 फ़रवरीसुबह 10:19
बुध कुम्भ 21°15′ पर वक्री
21 फ़रवरीरात 9:59
बुध अस्त (6 मार्च तक)†
28 फ़रवरीसुबह 4:39
शुक्र मीन 14°13′ पर वक्री
मार्च 2033
2 मार्चसुबह 5:31
शनि मिथुन 5°53′ पर मार्गी
6 मार्चदोपहर 1:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 मार्चदोपहर 3:57
बुध कुम्भ 6°43′ पर मार्गी
15 मार्चरात 3:17
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चसुबह 5:51
शुक्र अस्त (26 मार्च तक)†
18 मार्चसुबह 9:29
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
25 मार्चरात 3:01
मंगल का धनु में प्रवेश
26 मार्चसुबह 4:52
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2033
1 अप्रैलसुबह 7:10
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
9 अप्रैलरात 1:34
बुध का मीन में प्रवेश
11 अप्रैलरात 3:28
शुक्र कुम्भ 28°02′ पर मार्गी
14 अप्रैलसुबह 10:46
सूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलसुबह 11:28
शुक्र का मीन में प्रवेश
24 अप्रैलरात 11:47
बुध अस्त (20 मई तक)†
26 अप्रैलरात 10:39
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2033
11 मईसुबह 7:50
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 मईसुबह 7:38
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
20 मईसुबह 8:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मईदोपहर 12:44
बुध का मिथुन में प्रवेश
27 मईसुबह 11:43
मंगल धनु 18°11′ पर वक्री
31 मईशाम 7:16
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2033
14 जूनदोपहर 3:19
शनि अस्त (21 जुलाई तक)†
15 जूनदोपहर 2:13
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनरात 10:04
बुध मिथुन 23°37′ पर वक्री
26 जूनसुबह 9:35
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 13°00′ पर वक्री
26 जूनरात 8:12
बुध अस्त (13 जुलाई तक)†
29 जूनदोपहर 2:46
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2033
13 जुलाईसुबह 9:03
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईरात 2:20
बुध मिथुन 14°11′ पर मार्गी
17 जुलाईरात 1:04
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईरात 12:20
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 जुलाईसुबह 7:00
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2033
2 अगस्तरात 2:28
मंगल धनु 5°28′ पर मार्गी
3 अगस्तशाम 5:53
बुध का कर्क में प्रवेश
7 अगस्तसुबह 10:40
बुध अस्त (5 सितंबर तक)†
17 अगस्तसुबह 9:28
सूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अगस्तसुबह 5:50
बुध का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 10:10
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2033
4 सितंबरसुबह 6:19
बुध का कन्या में प्रवेश
5 सितंबररात 11:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 सितंबररात 8:27
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 9:26
सूर्य का कन्या में प्रवेश
24 सितंबररात 1:59
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2033
9 अक्टूबररात 3:31
मंगल का मकर में प्रवेश
9 अक्टूबरसुबह 7:38
शुक्र का कन्या में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 11:02
बुध तुला 19°56′ पर वक्री
17 अक्टूबररात 10:26
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 10:31
बुध अस्त (4 नवंबर तक)†
23 अक्टूबररात 8:35
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 3°08′ पर मार्गी
नवंबर 2033
2 नवंबरसुबह 9:55
शुक्र का तुला में प्रवेश
2 नवंबरशाम 7:34
शनि मिथुन 27°00′ पर वक्री
4 नवंबररात 12:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 नवंबररात 1:39
बुध तुला 4°07′ पर मार्गी
16 नवंबररात 10:19
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
23 नवंबररात 10:41
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
24 नवंबरसुबह 6:36
शुक्र अस्त (15 फ़रवरी तक)†
26 नवंबरसुबह 7:58
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
28 नवंबरसुबह 10:36
बुध अस्त (16 जनवरी तक)†
29 नवंबररात 11:42
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2033
16 दिसंबरदोपहर 1:03
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबरसुबह 6:04
बुध का धनु में प्रवेश
20 दिसंबरसुबह 4:21
शुक्र का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
