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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2034: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2034 में गुरु (बृहस्पति) 28 मार्च को मीन में, शनि 12 जुलाई को कर्क में, राहु 5 सितंबर को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय मैनचेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 2034 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2034 का गोचर कैलेंडर

सभी समय मैनचेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2034

  • 4 जनवरीशाम 4:47

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 6 जनवरीसुबह 9:08

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 12 जनवरीसुबह 11:34

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीसुबह 10:49

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीदोपहर 1:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 जनवरीशाम 7:42

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 2034

  • 2 फ़रवरीसुबह 11:21

    बुध कुम्भ 4°47′ पर वक्री

  • 5 फ़रवरीसुबह 4:34

    बुध अस्त (17 फ़रवरी तक)†

  • 5 फ़रवरीसुबह 8:47

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 9 फ़रवरीरात 11:49

    बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 12 फ़रवरीरात 11:48

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 फ़रवरीरात 8:17

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 फ़रवरीरात 9:34

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीसुबह 4:00

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 फ़रवरीरात 10:54

    बुध मकर 19°25′ पर मार्गी

  • 24 फ़रवरीसुबह 5:30

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (25 मार्च तक)†

मार्च 2034

  • 1 मार्चसुबह 8:34

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 12 मार्चरात 1:46

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 8:38

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चरात 2:59

    शनि मिथुन 20°02′ पर मार्गी

  • 25 मार्चसुबह 6:21

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 मार्चदोपहर 12:52

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 28 मार्चरात 12:55

    गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश

  • 31 मार्चसुबह 5:29

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

अप्रैल 2034

  • 2 अप्रैलसुबह 6:48

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 7 अप्रैलरात 8:30

    बुध अस्त (4 मई तक)†

  • 14 अप्रैलसुबह 6:04

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 18 अप्रैलसुबह 7:32

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 19 अप्रैलरात 12:45

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

मई 2034

  • 2 मईदोपहर 2:01

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 4 मईसुबह 11:15

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 मईरात 8:22

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 15 मईरात 12:29

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 15 मईरात 2:51

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 23 मईदोपहर 3:16

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2034

  • 2 जूनसुबह 6:22

    बुध मिथुन 3°35′ पर वक्री

  • 6 जूनरात 1:06

    बुध अस्त (23 जून तक)†

  • 8 जूनसुबह 4:09

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 12 जूनरात 11:33

    बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 जूनसुबह 9:22

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनरात 1:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जूनसुबह 6:24

    बुध वृषभ 24°56′ पर मार्गी

  • 26 जूनदोपहर 2:52

    मंगल अस्त (8 अक्टूबर तक)†

  • 29 जूनसुबह 6:21

    शनि अस्त (4 अगस्त तक)†

  • 30 जूनरात 3:58

    मंगल का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2034

  • 4 जुलाईसुबह 7:37

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 7 जुलाईदोपहर 12:21

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 12 जुलाईरात 11:08

    शनि का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईरात 8:11

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 22 जुलाईदोपहर 2:07

    बुध अस्त (18 अगस्त तक)†

  • 26 जुलाईरात 9:36

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2034

  • 1 अगस्तरात 2:31

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 3 अगस्तसुबह 4:24

    गुरु (बृहस्पति) मीन 19°37′ पर वक्री

  • 4 अगस्तदोपहर 2:18

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 अगस्तसुबह 11:24

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 16 अगस्तरात 3:07

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 4:34

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 18 अगस्तरात 10:49

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 अगस्तदोपहर 3:16

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2034

  • 3 सितंबररात 3:45

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 5 सितंबरसुबह 10:40

    राहु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 सितंबरसुबह 10:40

    केतु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 सितंबरसुबह 4:32

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबरसुबह 4:54

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 30 सितंबररात 3:59

    बुध तुला 3°47′ पर वक्री

  • 30 सितंबररात 8:35

    शुक्र तुला 11°47′ पर वक्री

अक्टूबर 2034

  • 2 अक्टूबरसुबह 5:20

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 6 अक्टूबरशाम 4:53

    बुध अस्त (18 अक्टूबर तक)†

  • 7 अक्टूबररात 11:18

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 8 अक्टूबरशाम 7:40

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अक्टूबरशाम 4:56

    शुक्र अस्त (26 अक्टूबर तक)†

  • 17 अक्टूबरशाम 4:33

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबरशाम 5:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 अक्टूबरसुबह 11:22

    बुध कन्या 18°22′ पर मार्गी

  • 26 अक्टूबरशाम 6:34

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 अक्टूबरशाम 4:04

    शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

नवंबर 2034

  • 3 नवंबरसुबह 9:54

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 8 नवंबरदोपहर 2:58

    बुध अस्त (27 दिसंबर तक)†

  • 11 नवंबरदोपहर 2:03

    शुक्र कन्या 26°07′ पर मार्गी

  • 16 नवंबरसुबह 11:31

    शनि कर्क 11°02′ पर वक्री

  • 16 नवंबरदोपहर 3:25

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबररात 8:32

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 22 नवंबरसुबह 10:16

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 26 नवंबरसुबह 4:53

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 29 नवंबररात 2:40

    गुरु (बृहस्पति) मीन 9°41′ पर मार्गी

दिसंबर 2034

  • 11 दिसंबरसुबह 11:18

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 6:08

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 27 दिसंबरशाम 6:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 दिसंबरदोपहर 12:50

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और