पंचांग · गोचर
गोचर 2034: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2034 में गुरु (बृहस्पति) 27 मार्च को मीन में, शनि 12 जुलाई को कर्क में, राहु 5 सितंबर को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लॉस एंजेलिस के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2034 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2033 से, 14 जनवरी 2034 तक
- चन्द्रवृषभ में31 दिसंबर 2033 से, 3 जनवरी 2034 तक
- मंगलकुम्भ में23 नवंबर 2033 से, 4 जनवरी 2034 तक
- बुधधनु में18 दिसंबर 2033 से, 6 जनवरी 2034 तक
- गुरु (बृहस्पति)कुम्भ में17 मार्च 2033 से, 27 मार्च 2034 तक
- शुक्रधनु में19 दिसंबर 2033 से, 12 जनवरी 2034 तक
- शनिवक्रीमिथुन में30 मई 2032 से, 12 जुलाई 2034 तक
- राहुकन्या में15 फ़रवरी 2033 से, 5 सितंबर 2034 तक
- केतुमीन में15 फ़रवरी 2033 से, 5 सितंबर 2034 तक
2034 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लॉस एंजेलिस के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2034
4 जनवरीसुबह 8:47
मंगल का मीन में प्रवेश
6 जनवरीरात 1:08
बुध का मकर में प्रवेश
12 जनवरीरात 3:34
शुक्र का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 2:49
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीसुबह 5:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जनवरीसुबह 11:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2034
2 फ़रवरीरात 3:21
बुध कुम्भ 4°47′ पर वक्री
4 फ़रवरीरात 8:34
बुध अस्त (16 फ़रवरी तक)†
5 फ़रवरीरात 12:47
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
9 फ़रवरीदोपहर 3:49
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
12 फ़रवरीदोपहर 3:48
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीदोपहर 12:17
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
15 फ़रवरीदोपहर 1:34
मंगल का मेष में प्रवेश
16 फ़रवरीरात 8:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 फ़रवरीदोपहर 2:54
बुध मकर 19°25′ पर मार्गी
23 फ़रवरीरात 9:30
गुरु (बृहस्पति) अस्त (24 मार्च तक)†
मार्च 2034
1 मार्चरात 12:34
शुक्र का मीन में प्रवेश
11 मार्चशाम 5:46
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चदोपहर 1:38
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चशाम 7:59
शनि मिथुन 20°02′ पर मार्गी
24 मार्चरात 11:21
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मार्चसुबह 5:52
शुक्र का मेष में प्रवेश
27 मार्चशाम 4:55
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
30 मार्चरात 9:29
मंगल का वृषभ में प्रवेश
अप्रैल 2034
1 अप्रैलरात 10:48
बुध का मीन में प्रवेश
7 अप्रैलदोपहर 12:30
बुध अस्त (4 मई तक)†
13 अप्रैलरात 10:04
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलरात 11:32
बुध का मेष में प्रवेश
18 अप्रैलशाम 4:45
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
मई 2034
2 मईसुबह 6:01
बुध का वृषभ में प्रवेश
4 मईरात 3:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 मईदोपहर 12:22
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
14 मईशाम 4:29
मंगल का मिथुन में प्रवेश
14 मईशाम 6:51
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईसुबह 7:16
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2034
1 जूनरात 10:22
बुध मिथुन 3°35′ पर वक्री
5 जूनशाम 5:06
बुध अस्त (22 जून तक)†
7 जूनरात 8:09
शुक्र का कर्क में प्रवेश
12 जूनदोपहर 3:33
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
15 जूनरात 1:22
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
22 जूनशाम 5:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जूनरात 10:24
बुध वृषभ 24°56′ पर मार्गी
26 जूनसुबह 6:52
मंगल अस्त (8 अक्टूबर तक)†
28 जूनरात 10:21
शनि अस्त (4 अगस्त तक)†
29 जूनशाम 7:58
मंगल का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2034
3 जुलाईरात 11:37
शुक्र का सिंह में प्रवेश
7 जुलाईसुबह 4:21
बुध का मिथुन में प्रवेश
12 जुलाईदोपहर 3:08
शनि का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईदोपहर 12:11
सूर्य का कर्क में प्रवेश
22 जुलाईसुबह 6:07
बुध अस्त (18 अगस्त तक)†
26 जुलाईदोपहर 1:36
बुध का कर्क में प्रवेश
31 जुलाईशाम 6:31
शुक्र का कन्या में प्रवेश
अगस्त 2034
2 अगस्तरात 8:24
गुरु (बृहस्पति) मीन 19°37′ पर वक्री
4 अगस्तसुबह 6:18
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
10 अगस्तरात 3:24
बुध का सिंह में प्रवेश
15 अगस्तशाम 7:07
मंगल का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तरात 8:34
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तदोपहर 2:49
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अगस्तसुबह 7:16
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2034
2 सितंबरशाम 7:45
शुक्र का तुला में प्रवेश
5 सितंबररात 2:40
राहु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
5 सितंबररात 2:40
केतु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
16 सितंबररात 8:32
सूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सितंबररात 8:54
बुध का तुला में प्रवेश
29 सितंबरशाम 7:59
बुध तुला 3°47′ पर वक्री
30 सितंबरदोपहर 12:35
शुक्र तुला 11°47′ पर वक्री
अक्टूबर 2034
1 अक्टूबररात 9:20
मंगल का कन्या में प्रवेश
6 अक्टूबरसुबह 8:53
बुध अस्त (18 अक्टूबर तक)†
7 अक्टूबरदोपहर 3:18
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
8 अक्टूबरसुबह 11:40
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
16 अक्टूबरसुबह 8:56
शुक्र अस्त (26 अक्टूबर तक)†
17 अक्टूबरसुबह 8:33
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरसुबह 9:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 अक्टूबररात 3:22
बुध कन्या 18°22′ पर मार्गी
26 अक्टूबरसुबह 10:34
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
28 अक्टूबरसुबह 8:04
शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
नवंबर 2034
3 नवंबररात 2:54
बुध का तुला में प्रवेश
8 नवंबरसुबह 6:58
बुध अस्त (27 दिसंबर तक)†
11 नवंबरसुबह 6:03
शुक्र कन्या 26°07′ पर मार्गी
16 नवंबररात 3:31
शनि कर्क 11°02′ पर वक्री
16 नवंबरसुबह 7:25
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरदोपहर 12:32
मंगल का तुला में प्रवेश
22 नवंबररात 2:16
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
25 नवंबररात 8:53
शुक्र का तुला में प्रवेश
28 नवंबरशाम 6:40
गुरु (बृहस्पति) मीन 9°41′ पर मार्गी
दिसंबर 2034
11 दिसंबररात 3:18
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 10:08
सूर्य का धनु में प्रवेश
27 दिसंबरसुबह 10:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 दिसंबरसुबह 4:50
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
