पंचांग · गोचर
गोचर 2036: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2036 में राहु 24 मार्च को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 14 अप्रैल को वृषभ में, शनि 27 अगस्त को सिंह में, गुरु (बृहस्पति) 9 सितंबर को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 16 नवंबर को वृषभ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय डैलस के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1 जनवरी 2036 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2035 से, 14 जनवरी 2036 तक
- चन्द्रमकर में30 दिसंबर 2035 से, 2 जनवरी 2036 तक
- मंगलमीन में17 नवंबर 2035 से, 16 जनवरी 2036 तक
- बुधवक्रीमकर में26 दिसंबर 2035 से, 6 जनवरी 2036 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीमेष में6 अप्रैल 2035 से, 14 अप्रैल 2036 तक
- शुक्रमकर में14 दिसंबर 2035 से, 7 जनवरी 2036 तक
- शनिवक्रीकर्क में12 जुलाई 2034 से, 27 अगस्त 2036 तक
- राहुसिंह में5 सितंबर 2034 से, 24 मार्च 2036 तक
- केतुकुम्भ में5 सितंबर 2034 से, 24 मार्च 2036 तक
2036 का गोचर कैलेंडर
सभी समय डैलस के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2036
4 जनवरीसुबह 8:22
बुध अस्त (15 जनवरी तक)†
4 जनवरीरात 10:14
गुरु (बृहस्पति) मेष 16°21′ पर मार्गी
6 जनवरीरात 2:11
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
7 जनवरीरात 10:43
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
14 जनवरीशाम 5:08
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीसुबह 11:53
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जनवरीदोपहर 12:11
मंगल का मेष में प्रवेश
21 जनवरीरात 3:42
बुध धनु 16°23′ पर मार्गी
फ़रवरी 2036
1 फ़रवरीरात 11:06
शुक्र का मीन में प्रवेश
7 फ़रवरीरात 8:08
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 6:07
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
28 फ़रवरीरात 3:41
शुक्र का मेष में प्रवेश
28 फ़रवरीदोपहर 3:54
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2036
2 मार्चरात 1:13
बुध अस्त (2 अप्रैल तक)†
5 मार्चशाम 7:24
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 मार्चसुबह 4:00
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चदोपहर 2:20
बुध का मीन में प्रवेश
24 मार्चसुबह 7:38
राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
24 मार्चसुबह 7:38
केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
28 मार्चसुबह 11:46
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
31 मार्चदोपहर 3:51
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2036
2 अप्रैलसुबह 4:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 अप्रैलशाम 6:07
शनि कर्क 17°58′ पर मार्गी
13 अप्रैलदोपहर 12:27
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलशाम 5:21
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश
22 अप्रैलशाम 7:43
मंगल का मिथुन में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 8:17
बुध मेष 24°16′ पर वक्री
25 अप्रैलशाम 7:11
बुध अस्त (11 मई तक)†
मई 2036
8 मईसुबह 10:56
शुक्र वृषभ 23°10′ पर वक्री
8 मईदोपहर 3:37
गुरु (बृहस्पति) अस्त (7 जून तक)†
11 मईरात 11:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईसुबह 9:16
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईरात 3:30
बुध मेष 14°41′ पर मार्गी
24 मईशाम 7:09
शुक्र अस्त (3 जून तक)†
जून 2036
3 जूनरात 11:45
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
7 जूनसुबह 9:11
बुध का वृषभ में प्रवेश
7 जूनरात 9:48
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
9 जूनशाम 6:33
मंगल का कर्क में प्रवेश
14 जूनदोपहर 3:49
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनसुबह 9:13
शुक्र वृषभ 6°40′ पर मार्गी
20 जूनदोपहर 1:32
बुध अस्त (15 जुलाई तक)†
24 जूनशाम 5:09
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2036
8 जुलाईशाम 4:48
बुध का कर्क में प्रवेश
15 जुलाईसुबह 11:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईरात 2:40
सूर्य का कर्क में प्रवेश
25 जुलाईरात 1:41
बुध का सिंह में प्रवेश
27 जुलाईदोपहर 3:12
मंगल का सिंह में प्रवेश
27 जुलाईशाम 5:37
शनि अस्त (1 सितंबर तक)†
अगस्त 2036
1 अगस्तसुबह 7:18
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
2 अगस्तशाम 6:06
मंगल अस्त (13 नवंबर तक)†
16 अगस्तसुबह 11:03
सूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अगस्तसुबह 4:39
बुध का कन्या में प्रवेश
25 अगस्तदोपहर 2:47
बुध कन्या 0°16′ पर वक्री
27 अगस्तसुबह 9:56
शनि का सिंह में प्रवेश
27 अगस्तरात 11:19
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
31 अगस्तसुबह 6:01
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2036
1 सितंबरशाम 4:47
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
1 सितंबरशाम 6:28
बुध अस्त (15 सितंबर तक)†
9 सितंबरदोपहर 1:15
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
12 सितंबररात 8:24
मंगल का कन्या में प्रवेश
15 सितंबररात 3:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 सितंबरसुबह 11:00
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरदोपहर 12:20
बुध सिंह 16°16′ पर मार्गी
26 सितंबररात 10:42
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 2036
1 अक्टूबरशाम 6:34
बुध का कन्या में प्रवेश
3 अक्टूबरसुबह 6:54
बुध अस्त (15 नवंबर तक)†
13 अक्टूबररात 8:21
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 1°52′ पर वक्री
16 अक्टूबररात 10:59
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबररात 3:03
बुध का तुला में प्रवेश
22 अक्टूबरसुबह 5:43
शुक्र का कन्या में प्रवेश
28 अक्टूबररात 8:37
मंगल का तुला में प्रवेश
नवंबर 2036
6 नवंबरदोपहर 3:15
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
13 नवंबररात 3:19
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
15 नवंबरशाम 5:39
शुक्र का तुला में प्रवेश
15 नवंबरशाम 5:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 नवंबररात 9:50
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरशाम 6:22
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
26 नवंबररात 10:05
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2036
9 दिसंबररात 9:10
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
12 दिसंबरसुबह 7:44
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
12 दिसंबररात 8:28
शनि सिंह 8°31′ पर वक्री
14 दिसंबररात 8:05
बुध धनु 16°41′ पर वक्री
15 दिसंबरदोपहर 12:30
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरशाम 5:18
बुध अस्त (29 दिसंबर तक)†
29 दिसंबरशाम 4:49
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
