मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2037: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2037 में गुरु (बृहस्पति) 26 अप्रैल को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 16 सितंबर को कर्क में, राहु 11 अक्टूबर को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2037 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2037 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2037

  • 3 जनवरीसुबह 7:59

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 4 जनवरीसुबह 4:27

    बुध धनु 0°23′ पर मार्गी

  • 14 जनवरीसुबह 10:45

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 24 जनवरीशाम 6:47

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 27 जनवरीसुबह 6:06

    शुक्र का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2037

  • 1 फ़रवरीरात 10:15

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 8 फ़रवरीरात 10:41

    शुक्र अस्त (29 अप्रैल तक)†

  • 9 फ़रवरीदोपहर 1:27

    गुरु (बृहस्पति) वृषभ 21°48′ पर मार्गी

  • 11 फ़रवरीसुबह 6:06

    बुध अस्त (17 मार्च तक)†

  • 12 फ़रवरीरात 11:46

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 फ़रवरीसुबह 4:47

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 फ़रवरीशाम 6:19

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2037

  • 7 मार्चसुबह 10:48

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 8 मार्चरात 11:07

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 8:41

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 5:16

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चशाम 7:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 मार्चसुबह 9:49

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 2037

  • 5 अप्रैलसुबह 5:35

    बुध मेष 5°44′ पर वक्री

  • 7 अप्रैलदोपहर 12:42

    बुध अस्त (22 अप्रैल तक)†

  • 9 अप्रैलसुबह 8:38

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 5:11

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलरात 8:40

    बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 अप्रैलसुबह 5:35

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 22 अप्रैलशाम 4:22

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 अप्रैलदोपहर 3:16

    गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश

  • 27 अप्रैलसुबह 10:58

    शनि सिंह 1°37′ पर मार्गी

  • 28 अप्रैलरात 9:26

    बुध मीन 24°43′ पर मार्गी

  • 29 अप्रैलदोपहर 2:14

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 2037

  • 3 मईदोपहर 3:36

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 10 मईशाम 6:22

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 15 मईरात 2:01

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 28 मईरात 12:11

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 28 मईरात 2:24

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 2037

  • 1 जूनरात 11:33

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 5 जूनसुबह 11:29

    बुध अस्त (29 जून तक)†

  • 14 जूनशाम 4:16

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 जुलाई तक)†

  • 15 जूनसुबह 8:32

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जूनदोपहर 3:13

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनशाम 5:18

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 29 जूनरात 10:18

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

जुलाई 2037

  • 1 जुलाईरात 12:44

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 9 जुलाईदोपहर 3:37

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 14 जुलाईरात 10:16

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जुलाईदोपहर 1:25

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 16 जुलाईशाम 7:19

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 20 जुलाईदोपहर 12:21

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2037

  • 8 अगस्तसुबह 11:15

    बुध सिंह 12°37′ पर वक्री

  • 10 अगस्तशाम 5:17

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 11 अगस्तदोपहर 2:32

    शनि अस्त (16 सितंबर तक)†

  • 15 अगस्तदोपहर 12:01

    बुध अस्त (29 अगस्त तक)†

  • 17 अगस्तरात 3:40

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 29 अगस्तशाम 5:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अगस्तशाम 6:07

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 30 अगस्तरात 1:56

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

सितंबर 2037

  • 1 सितंबररात 1:37

    बुध कर्क 29°44′ पर मार्गी

  • 3 सितंबररात 12:29

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 5 सितंबरसुबह 9:38

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 16 सितंबरसुबह 6:49

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 सितंबरदोपहर 2:36

    गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश

  • 17 सितंबररात 3:36

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 7:49

    बुध अस्त (26 अक्टूबर तक)†

  • 24 सितंबररात 11:09

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2037

  • 2 अक्टूबररात 12:33

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 11 अक्टूबररात 9:05

    राहु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 अक्टूबररात 9:05

    केतु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 अक्टूबररात 11:16

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 13 अक्टूबरसुबह 4:35

    मंगल वृषभ 11°53′ पर वक्री

  • 17 अक्टूबरदोपहर 3:35

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 26 अक्टूबरसुबह 6:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 अक्टूबररात 11:12

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 31 अक्टूबरसुबह 6:32

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2037

  • 16 नवंबरसुबह 7:30

    गुरु (बृहस्पति) कर्क 5°24′ पर वक्री

  • 16 नवंबरदोपहर 3:27

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 25 नवंबरशाम 7:06

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 28 नवंबरसुबह 5:28

    मंगल का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 29 नवंबररात 3:30

    बुध धनु 0°50′ पर वक्री

दिसंबर 2037

  • 2 दिसंबरसुबह 6:03

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 3 दिसंबरदोपहर 1:41

    बुध अस्त (14 दिसंबर तक)†

  • 14 दिसंबरदोपहर 12:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 दिसंबरशाम 6:15

    शुक्र धनु 27°08′ पर वक्री

  • 16 दिसंबरसुबह 6:09

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 18 दिसंबररात 9:42

    बुध वृश्चिक 14°34′ पर मार्गी

  • 23 दिसंबरदोपहर 12:05

    मंगल मेष 25°44′ पर मार्गी

  • 26 दिसंबरशाम 4:36

    शनि सिंह 21°52′ पर वक्री

  • 30 दिसंबरसुबह 8:01

    शुक्र अस्त (9 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और