पंचांग · गोचर
गोचर 2037: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2037 में गुरु (बृहस्पति) 26 अप्रैल को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 16 सितंबर को कर्क में, राहु 11 अक्टूबर को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय कैलगरी के स्थानीय समय (America/Edmonton, MDT) में।
1 जनवरी 2037 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2036 से, 13 जनवरी 2037 तक
- चन्द्रमिथुन में31 दिसंबर 2036 से, 2 जनवरी 2037 तक
- मंगलवृश्चिक में12 दिसंबर 2036 से, 24 जनवरी 2037 तक
- बुधवक्रीधनु में26 नवंबर 2036 से, 1 फ़रवरी 2037 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीवृषभ में16 नवंबर 2036 से, 26 अप्रैल 2037 तक
- शुक्रवृश्चिक में9 दिसंबर 2036 से, 2 जनवरी 2037 तक
- शनिवक्रीसिंह में27 अगस्त 2036 से, 22 अक्टूबर 2038 तक
- राहुकर्क में24 मार्च 2036 से, 11 अक्टूबर 2037 तक
- केतुमकर में24 मार्च 2036 से, 11 अक्टूबर 2037 तक
2037 का गोचर कैलेंडर
सभी समय कैलगरी के स्थानीय समय (America/Edmonton, MDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2037
2 जनवरीरात 8:29
शुक्र का धनु में प्रवेश
3 जनवरीशाम 4:57
बुध धनु 0°23′ पर मार्गी
13 जनवरीरात 11:15
सूर्य का मकर में प्रवेश
24 जनवरीसुबह 7:17
मंगल का धनु में प्रवेश
26 जनवरीशाम 6:36
शुक्र का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2037
1 फ़रवरीसुबह 10:45
बुध का मकर में प्रवेश
8 फ़रवरीसुबह 11:11
शुक्र अस्त (29 अप्रैल तक)†
9 फ़रवरीरात 1:57
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 21°48′ पर मार्गी
10 फ़रवरीशाम 6:36
बुध अस्त (17 मार्च तक)†
12 फ़रवरीदोपहर 12:16
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
19 फ़रवरीशाम 5:17
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
20 फ़रवरीसुबह 6:49
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2037
6 मार्चरात 11:18
मंगल का मकर में प्रवेश
8 मार्चसुबह 11:37
बुध का मीन में प्रवेश
14 मार्चसुबह 9:11
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चशाम 5:46
शुक्र का मीन में प्रवेश
17 मार्चसुबह 8:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मार्चरात 10:19
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2037
4 अप्रैलशाम 6:05
बुध मेष 5°44′ पर वक्री
7 अप्रैलरात 1:12
बुध अस्त (22 अप्रैल तक)†
8 अप्रैलरात 9:08
शुक्र का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलशाम 5:41
सूर्य का मेष में प्रवेश
16 अप्रैलसुबह 9:10
बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
16 अप्रैलशाम 6:05
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
22 अप्रैलसुबह 4:52
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अप्रैलरात 3:46
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
26 अप्रैलरात 11:28
शनि सिंह 1°37′ पर मार्गी
28 अप्रैलसुबह 9:56
बुध मीन 24°43′ पर मार्गी
29 अप्रैलरात 2:44
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2037
3 मईसुबह 4:06
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
10 मईसुबह 6:52
बुध का मेष में प्रवेश
14 मईदोपहर 2:31
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
27 मईदोपहर 12:41
मंगल का मीन में प्रवेश
27 मईदोपहर 2:54
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 2037
1 जूनदोपहर 12:03
बुध का वृषभ में प्रवेश
4 जूनरात 11:59
बुध अस्त (29 जून तक)†
14 जूनसुबह 4:46
गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 जुलाई तक)†
14 जूनरात 9:02
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनरात 3:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
21 जूनसुबह 5:48
शुक्र का कर्क में प्रवेश
29 जूनसुबह 10:48
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जूनदोपहर 1:14
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2037
9 जुलाईसुबह 4:07
मंगल का मेष में प्रवेश
14 जुलाईसुबह 10:46
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईरात 1:55
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 7:49
सूर्य का कर्क में प्रवेश
20 जुलाईरात 12:51
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2037
7 अगस्तरात 11:45
बुध सिंह 12°37′ पर वक्री
10 अगस्तसुबह 5:47
शुक्र का कन्या में प्रवेश
11 अगस्तरात 3:02
शनि अस्त (15 सितंबर तक)†
15 अगस्तरात 12:31
बुध अस्त (29 अगस्त तक)†
16 अगस्तशाम 4:10
सूर्य का सिंह में प्रवेश
29 अगस्तसुबह 5:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 अगस्तसुबह 6:37
मंगल का वृषभ में प्रवेश
29 अगस्तदोपहर 2:26
बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
31 अगस्तदोपहर 2:07
बुध कर्क 29°44′ पर मार्गी
सितंबर 2037
2 सितंबरदोपहर 12:59
बुध का सिंह में प्रवेश
4 सितंबररात 10:08
शुक्र का तुला में प्रवेश
15 सितंबरशाम 7:19
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
16 सितंबररात 3:06
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
16 सितंबरशाम 4:06
सूर्य का कन्या में प्रवेश
16 सितंबररात 8:19
बुध अस्त (25 अक्टूबर तक)†
24 सितंबरसुबह 11:39
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2037
1 अक्टूबरदोपहर 1:03
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
11 अक्टूबरसुबह 9:35
राहु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
11 अक्टूबरसुबह 9:35
केतु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
11 अक्टूबरसुबह 11:46
बुध का तुला में प्रवेश
12 अक्टूबरशाम 5:05
मंगल वृषभ 11°53′ पर वक्री
17 अक्टूबरसुबह 4:05
सूर्य का तुला में प्रवेश
25 अक्टूबरशाम 6:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबरसुबह 11:42
शुक्र का धनु में प्रवेश
30 अक्टूबरशाम 7:02
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2037
15 नवंबररात 8:00
गुरु (बृहस्पति) कर्क 5°24′ पर वक्री
16 नवंबररात 3:57
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
25 नवंबरसुबह 7:36
बुध का धनु में प्रवेश
27 नवंबरशाम 5:58
मंगल का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
28 नवंबरशाम 4:00
बुध धनु 0°50′ पर वक्री
दिसंबर 2037
1 दिसंबरशाम 6:33
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
3 दिसंबररात 2:11
बुध अस्त (14 दिसंबर तक)†
14 दिसंबररात 1:22
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 दिसंबरसुबह 6:45
शुक्र धनु 27°08′ पर वक्री
15 दिसंबरशाम 6:39
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरसुबह 10:12
बुध वृश्चिक 14°34′ पर मार्गी
23 दिसंबररात 12:35
मंगल मेष 25°44′ पर मार्गी
26 दिसंबरसुबह 5:06
शनि सिंह 21°52′ पर वक्री
29 दिसंबररात 8:31
शुक्र अस्त (8 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
