पंचांग · गोचर
गोचर 2038: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2038 में गुरु (बृहस्पति) 17 जनवरी को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 11 मई को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 7 अक्टूबर को सिंह में, शनि 22 अक्टूबर को कन्या में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2038 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2037 से, 14 जनवरी 2038 तक
- चन्द्रतुला में30 दिसंबर 2037 से, 1 जनवरी 2038 तक
- मंगलमेष में27 नवंबर 2037 से, 19 जनवरी 2038 तक
- बुधवृश्चिक में1 दिसंबर 2037 से, 5 जनवरी 2038 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीकर्क में16 सितंबर 2037 से, 17 जनवरी 2038 तक
- शुक्रवक्रीधनु में30 अक्टूबर 2037 से, 28 फ़रवरी 2038 तक
- शनिवक्रीसिंह में27 अगस्त 2036 से, 22 अक्टूबर 2038 तक
- राहुमिथुन में11 अक्टूबर 2037 से, 30 अप्रैल 2039 तक
- केतुधनु में11 अक्टूबर 2037 से, 30 अप्रैल 2039 तक
2038 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2038
5 जनवरीरात 2:12
बुध का धनु में प्रवेश
8 जनवरीशाम 4:34
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीरात 3:25
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीसुबह 4:32
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
19 जनवरीसुबह 6:12
मंगल का वृषभ में प्रवेश
21 जनवरीसुबह 5:59
बुध अस्त (1 मार्च तक)†
24 जनवरीरात 2:21
शुक्र धनु 11°45′ पर मार्गी
25 जनवरीदोपहर 2:41
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2038
12 फ़रवरीदोपहर 12:11
बुध का कुम्भ में प्रवेश
12 फ़रवरीशाम 4:25
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
28 फ़रवरीरात 3:19
शुक्र का मकर में प्रवेश
28 फ़रवरीशाम 7:25
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 2038
1 मार्चरात 3:11
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मार्चदोपहर 2:17
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चसुबह 11:08
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 25°20′ पर मार्गी
17 मार्चरात 11:06
बुध मीन 17°59′ पर वक्री
20 मार्चसुबह 6:06
बुध अस्त (3 अप्रैल तक)†
27 मार्चदोपहर 2:55
मंगल का मिथुन में प्रवेश
30 मार्चदोपहर 3:38
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2038
3 अप्रैलसुबह 8:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 अप्रैलसुबह 5:12
बुध मीन 5°26′ पर मार्गी
13 अप्रैलरात 10:45
सूर्य का मेष में प्रवेश
26 अप्रैलशाम 4:33
शुक्र का मीन में प्रवेश
मई 2038
7 मईरात 9:11
बुध का मेष में प्रवेश
10 मईरात 11:53
शनि सिंह 15°00′ पर मार्गी
11 मईसुबह 7:31
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
14 मईशाम 7:34
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
19 मईदोपहर 1:26
मंगल का कर्क में प्रवेश
20 मईसुबह 5:54
बुध अस्त (13 जून तक)†
22 मईदोपहर 2:48
शुक्र का मेष में प्रवेश
24 मईदोपहर 3:21
बुध का वृषभ में प्रवेश
जून 2038
7 जूनदोपहर 12:09
बुध का मिथुन में प्रवेश
13 जूनशाम 4:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनरात 2:06
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनरात 12:27
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
23 जूनदोपहर 1:55
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2038
8 जुलाईदोपहर 12:16
मंगल का सिंह में प्रवेश
12 जुलाईरात 1:41
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईदोपहर 12:55
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईरात 10:07
गुरु (बृहस्पति) अस्त (17 अगस्त तक)†
20 जुलाईरात 11:57
बुध कर्क 24°11′ पर वक्री
27 जुलाईदोपहर 12:20
बुध अस्त (11 अगस्त तक)†
अगस्त 2038
5 अगस्तशाम 7:24
शुक्र का कर्क में प्रवेश
11 अगस्तदोपहर 3:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अगस्तरात 1:49
बुध कर्क 12°40′ पर मार्गी
16 अगस्तरात 9:18
सूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तशाम 6:20
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
25 अगस्तरात 3:14
शनि अस्त (29 सितंबर तक)†
25 अगस्तदोपहर 12:08
मंगल का कन्या में प्रवेश
30 अगस्तसुबह 5:57
शुक्र का सिंह में प्रवेश
31 अगस्तदोपहर 2:50
बुध का सिंह में प्रवेश
31 अगस्तरात 8:57
बुध अस्त (5 अक्टूबर तक)†
सितंबर 2038
8 सितंबररात 11:03
मंगल अस्त (26 दिसंबर तक)†
9 सितंबररात 11:48
शुक्र अस्त (26 नवंबर तक)†
16 सितंबरदोपहर 12:19
बुध का कन्या में प्रवेश
16 सितंबररात 9:16
सूर्य का कन्या में प्रवेश
23 सितंबरसुबह 10:34
शुक्र का कन्या में प्रवेश
29 सितंबरसुबह 11:49
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2038
4 अक्टूबररात 1:44
बुध का तुला में प्रवेश
5 अक्टूबरदोपहर 12:32
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 अक्टूबररात 12:57
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
10 अक्टूबरसुबह 11:09
मंगल का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 9:18
सूर्य का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 11:14
शुक्र का तुला में प्रवेश
22 अक्टूबरसुबह 4:39
शनि का कन्या में प्रवेश
25 अक्टूबररात 12:28
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2038
10 नवंबरसुबह 8:55
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
12 नवंबरसुबह 6:55
बुध वृश्चिक 15°01′ पर वक्री
16 नवंबरसुबह 8:12
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 7:19
बुध अस्त (28 नवंबर तक)†
23 नवंबरसुबह 6:09
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबरदोपहर 3:07
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
28 नवंबरसुबह 9:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 नवंबरदोपहर 3:54
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
दिसंबर 2038
2 दिसंबरसुबह 4:30
बुध तुला 28°50′ पर मार्गी
4 दिसंबरसुबह 6:58
शुक्र का धनु में प्रवेश
5 दिसंबररात 11:46
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
15 दिसंबररात 10:55
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबररात 12:22
गुरु (बृहस्पति) सिंह 7°04′ पर वक्री
26 दिसंबरसुबह 11:18
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
28 दिसंबरसुबह 5:22
शुक्र का मकर में प्रवेश
30 दिसंबररात 2:51
बुध का धनु में प्रवेश
31 दिसंबररात 12:18
बुध अस्त (12 फ़रवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
