पंचांग · गोचर
गोचर 2039: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2039 में गुरु (बृहस्पति) 3 मार्च को कर्क में, शनि 6 अप्रैल को सिंह में, राहु 1 मई को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 2 जून को सिंह में, शनि 13 जुलाई को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 4 नवंबर को कन्या में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में।
1 जनवरी 2039 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2038 से, 15 जनवरी 2039 तक
- चन्द्रकुम्भ में30 दिसंबर 2038 से, 1 जनवरी 2039 तक
- मंगलवृश्चिक में24 नवंबर 2038 से, 4 जनवरी 2039 तक
- बुधधनु में30 दिसंबर 2038 से, 19 जनवरी 2039 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीसिंह में7 अक्टूबर 2038 से, 3 मार्च 2039 तक
- शुक्रमकर में28 दिसंबर 2038 से, 22 जनवरी 2039 तक
- शनिकन्या में22 अक्टूबर 2038 से, 6 अप्रैल 2039 तक
- राहुमिथुन में12 अक्टूबर 2037 से, 1 मई 2039 तक
- केतुधनु में12 अक्टूबर 2037 से, 1 मई 2039 तक
2039 का गोचर कैलेंडर
सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2039
4 जनवरीरात 8:48
मंगल का धनु में प्रवेश
8 जनवरीरात 9:55
शनि कन्या 4°53′ पर वक्री
15 जनवरीसुबह 4:12
सूर्य का मकर में प्रवेश
19 जनवरीरात 2:57
बुध का मकर में प्रवेश
22 जनवरीरात 12:05
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2039
5 फ़रवरीदोपहर 2:38
बुध का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 7:11
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 फ़रवरीशाम 5:11
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीरात 2:19
मंगल का मकर में प्रवेश
15 फ़रवरीसुबह 4:47
शुक्र का मीन में प्रवेश
26 फ़रवरीसुबह 7:58
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 2039
1 मार्चदोपहर 2:41
बुध मीन 0°52′ पर वक्री
3 मार्चरात 11:33
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
3 मार्चरात 11:56
बुध अस्त (17 मार्च तक)†
4 मार्चरात 10:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
11 मार्चशाम 6:17
शुक्र का मेष में प्रवेश
15 मार्चदोपहर 2:02
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चरात 3:02
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 मार्चसुबह 5:50
बुध कुम्भ 16°58′ पर मार्गी
25 मार्चसुबह 6:44
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2039
5 अप्रैलरात 9:56
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
6 अप्रैलरात 12:48
शनि का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
12 अप्रैलरात 1:28
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलरात 9:28
सूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैलरात 12:39
गुरु (बृहस्पति) कर्क 27°02′ पर मार्गी
मई 2039
1 मईसुबह 4:03
राहु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
1 मईसुबह 4:03
केतु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
1 मईरात 10:42
बुध का मेष में प्रवेश
2 मईसुबह 5:19
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
3 मईरात 3:36
मंगल का मीन में प्रवेश
4 मईरात 10:33
बुध अस्त (29 मई तक)†
15 मईशाम 6:17
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मईरात 8:24
बुध का वृषभ में प्रवेश
25 मईदोपहर 1:07
शनि सिंह 28°04′ पर मार्गी
29 मईरात 8:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 मईरात 11:55
शुक्र का कर्क में प्रवेश
31 मईरात 2:44
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2039
2 जूनसुबह 10:18
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश
11 जूनशाम 7:07
मंगल का मेष में प्रवेश
16 जूनरात 12:50
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनशाम 4:55
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2039
3 जुलाईसुबह 7:16
बुध कर्क 4°58′ पर वक्री
8 जुलाईरात 9:18
बुध अस्त (24 जुलाई तक)†
13 जुलाईसुबह 6:06
शनि का कन्या में प्रवेश
15 जुलाईदोपहर 2:31
बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
17 जुलाईसुबह 11:39
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईशाम 6:04
शुक्र कर्क 29°51′ पर वक्री
23 जुलाईदोपहर 2:58
मंगल का वृषभ में प्रवेश
24 जुलाईरात 11:11
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 जुलाईदोपहर 12:37
बुध मिथुन 24°50′ पर मार्गी
अगस्त 2039
4 अगस्तरात 1:44
शुक्र अस्त (14 अगस्त तक)†
6 अगस्तदोपहर 2:27
बुध का कर्क में प्रवेश
14 अगस्तसुबह 7:06
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
16 अगस्तरात 10:17
बुध अस्त (17 सितंबर तक)†
17 अगस्तरात 8:02
सूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अगस्तसुबह 11:12
गुरु (बृहस्पति) अस्त (19 सितंबर तक)†
24 अगस्तदोपहर 2:01
बुध का सिंह में प्रवेश
30 अगस्तशाम 7:45
शुक्र कर्क 13°26′ पर मार्गी
सितंबर 2039
8 सितंबरसुबह 11:10
शनि अस्त (13 अक्टूबर तक)†
8 सितंबरशाम 4:29
मंगल का मिथुन में प्रवेश
9 सितंबरसुबह 6:30
बुध का कन्या में प्रवेश
17 सितंबररात 2:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबरशाम 7:58
सूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सितंबरशाम 4:41
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
27 सितंबररात 11:42
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2039
3 अक्टूबरसुबह 10:29
शुक्र का सिंह में प्रवेश
13 अक्टूबरदोपहर 12:35
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
18 अक्टूबरसुबह 8:56
सूर्य का तुला में प्रवेश
27 अक्टूबरदोपहर 2:23
बुध तुला 29°08′ पर वक्री
नवंबर 2039
2 नवंबरसुबह 5:31
बुध अस्त (13 नवंबर तक)†
3 नवंबररात 3:56
शुक्र का कन्या में प्रवेश
4 नवंबरसुबह 11:58
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश
13 नवंबरदोपहर 2:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबररात 9:08
बुध तुला 13°09′ पर मार्गी
17 नवंबरसुबह 8:46
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
24 नवंबरसुबह 7:13
मंगल मिथुन 27°20′ पर वक्री
29 नवंबरदोपहर 3:59
शुक्र का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2039
4 दिसंबरसुबह 4:53
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
10 दिसंबरशाम 4:51
बुध अस्त (27 जनवरी तक)†
16 दिसंबररात 11:26
सूर्य का धनु में प्रवेश
23 दिसंबररात 11:16
बुध का धनु में प्रवेश
24 दिसंबरशाम 6:26
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
