पंचांग · गोचर
गोचर 2040: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2040 में गुरु (बृहस्पति) 6 अप्रैल को सिंह में, गुरु (बृहस्पति) 29 जून को कन्या में, राहु 16 नवंबर को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 3 दिसंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय डरबन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
1 जनवरी 2040 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2039 से, 15 जनवरी 2040 तक
- चन्द्रकर्क में31 दिसंबर 2039 से, 3 जनवरी 2040 तक
- मंगलवक्रीमिथुन में8 सितंबर 2039 से, 21 अप्रैल 2040 तक
- बुधधनु में23 दिसंबर 2039 से, 11 जनवरी 2040 तक
- गुरु (बृहस्पति)कन्या में4 नवंबर 2039 से, 6 अप्रैल 2040 तक
- शुक्रवृश्चिक में24 दिसंबर 2039 से, 17 जनवरी 2040 तक
- शनिकन्या में12 जुलाई 2039 से, 27 जनवरी 2041 तक
- राहुवृषभ में30 अप्रैल 2039 से, 16 नवंबर 2040 तक
- केतुवृश्चिक में30 अप्रैल 2039 से, 16 नवंबर 2040 तक
2040 का गोचर कैलेंडर
सभी समय डरबन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2040
11 जनवरीसुबह 8:34
बुध का मकर में प्रवेश
15 जनवरीरात 1:41
सूर्य का मकर में प्रवेश
16 जनवरीदोपहर 3:00
गुरु (बृहस्पति) कन्या 7°26′ पर वक्री
17 जनवरीरात 10:26
शुक्र का धनु में प्रवेश
21 जनवरीसुबह 5:42
शनि कन्या 17°37′ पर वक्री
26 जनवरीशाम 4:12
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जनवरीसुबह 6:06
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2040
9 फ़रवरीदोपहर 1:52
मंगल मिथुन 8°37′ पर मार्गी
11 फ़रवरीसुबह 5:19
शुक्र का मकर में प्रवेश
12 फ़रवरीदोपहर 3:38
बुध कुम्भ 14°13′ पर वक्री
13 फ़रवरीदोपहर 2:41
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
15 फ़रवरीसुबह 5:17
बुध अस्त (27 फ़रवरी तक)†
27 फ़रवरीदोपहर 1:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 2040
1 मार्चरात 11:09
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
5 मार्चदोपहर 1:20
बुध मकर 29°17′ पर मार्गी
6 मार्चसुबह 10:29
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
9 मार्चसुबह 8:27
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चसुबह 11:33
सूर्य का मीन में प्रवेश
30 मार्चदोपहर 3:53
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2040
5 अप्रैलरात 8:45
बुध का मीन में प्रवेश
6 अप्रैलसुबह 6:12
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
13 अप्रैलरात 8:01
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलसुबह 5:44
बुध अस्त (13 मई तक)†
21 अप्रैलसुबह 4:42
मंगल का कर्क में प्रवेश
22 अप्रैलशाम 7:08
बुध का मेष में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 11:28
शुक्र अस्त (6 जुलाई तक)†
23 अप्रैलरात 10:40
शुक्र का मेष में प्रवेश
मई 2040
7 मईरात 12:02
बुध का वृषभ में प्रवेश
13 मईरात 1:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईशाम 4:52
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मईसुबह 6:15
गुरु (बृहस्पति) सिंह 27°28′ पर मार्गी
18 मईसुबह 7:09
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
23 मईदोपहर 12:53
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2040
6 जूनरात 8:26
शनि कन्या 10°49′ पर मार्गी
11 जूनशाम 4:51
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
13 जूनरात 2:18
बुध मिथुन 15°07′ पर वक्री
14 जूनरात 11:27
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनदोपहर 3:12
मंगल का सिंह में प्रवेश
17 जूनदोपहर 12:09
बुध अस्त (4 जुलाई तक)†
29 जूनदोपहर 2:18
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश
जुलाई 2040
4 जुलाईसुबह 7:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 जुलाईरात 3:00
शुक्र का कर्क में प्रवेश
6 जुलाईशाम 5:57
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
7 जुलाईसुबह 4:21
बुध मिथुन 6°07′ पर मार्गी
16 जुलाईसुबह 10:18
सूर्य का कर्क में प्रवेश
30 जुलाईदोपहर 1:22
शुक्र का सिंह में प्रवेश
31 जुलाईरात 3:01
बुध का कर्क में प्रवेश
31 जुलाईरात 3:51
बुध अस्त (28 अगस्त तक)†
अगस्त 2040
5 अगस्तशाम 5:07
मंगल का कन्या में प्रवेश
14 अगस्तरात 11:18
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तशाम 6:42
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तरात 12:41
शुक्र का कन्या में प्रवेश
28 अगस्तशाम 4:26
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अगस्तसुबह 9:21
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2040
16 सितंबरशाम 6:38
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरदोपहर 2:19
शुक्र का तुला में प्रवेश
20 सितंबरसुबह 8:58
शनि अस्त (25 अक्टूबर तक)†
20 सितंबरदोपहर 1:29
गुरु (बृहस्पति) अस्त (19 अक्टूबर तक)†
21 सितंबरसुबह 6:18
मंगल का तुला में प्रवेश
21 सितंबरसुबह 11:00
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2040
9 अक्टूबरदोपहर 2:04
बुध तुला 13°06′ पर वक्री
12 अक्टूबरसुबह 7:47
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
15 अक्टूबरशाम 7:22
बुध अस्त (27 अक्टूबर तक)†
17 अक्टूबरसुबह 6:36
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबररात 3:47
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
19 अक्टूबरसुबह 10:05
मंगल अस्त (24 फ़रवरी तक)†
25 अक्टूबररात 1:16
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
25 अक्टूबरसुबह 5:19
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
27 अक्टूबरदोपहर 1:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबरसुबह 11:06
बुध कन्या 27°26′ पर मार्गी
नवंबर 2040
3 नवंबररात 10:44
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
4 नवंबररात 11:42
बुध का तुला में प्रवेश
6 नवंबरसुबह 7:25
शुक्र का धनु में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 6:24
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबररात 11:31
राहु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
16 नवंबररात 11:31
केतु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
19 नवंबरसुबह 7:34
बुध अस्त (7 जनवरी तक)†
26 नवंबरसुबह 7:15
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2040
1 दिसंबरशाम 7:29
शुक्र का मकर में प्रवेश
3 दिसंबरशाम 5:44
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 5:49
मंगल का धनु में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 9:34
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 9:03
सूर्य का धनु में प्रवेश
28 दिसंबरदोपहर 3:28
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
