पंचांग · गोचर
गोचर 2040: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2040 में गुरु (बृहस्पति) 6 अप्रैल को सिंह में, गुरु (बृहस्पति) 30 जून को कन्या में, राहु 17 नवंबर को मेष में, गुरु (बृहस्पति) 4 दिसंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।
1 जनवरी 2040 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में17 दिसंबर 2039 से, 15 जनवरी 2040 तक
- चन्द्रमिथुन में29 दिसंबर 2039 से, 1 जनवरी 2040 तक
- मंगलवक्रीमिथुन में8 सितंबर 2039 से, 21 अप्रैल 2040 तक
- बुधधनु में24 दिसंबर 2039 से, 11 जनवरी 2040 तक
- गुरु (बृहस्पति)कन्या में4 नवंबर 2039 से, 6 अप्रैल 2040 तक
- शुक्रवृश्चिक में24 दिसंबर 2039 से, 18 जनवरी 2040 तक
- शनिकन्या में13 जुलाई 2039 से, 28 जनवरी 2041 तक
- राहुवृषभ में1 मई 2039 से, 17 नवंबर 2040 तक
- केतुवृश्चिक में1 मई 2039 से, 17 नवंबर 2040 तक
2040 का गोचर कैलेंडर
सभी समय वेलिंगटन के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2040
11 जनवरीशाम 7:34
बुध का मकर में प्रवेश
15 जनवरीदोपहर 12:41
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीरात 2:00
गुरु (बृहस्पति) कन्या 7°26′ पर वक्री
18 जनवरीसुबह 9:26
शुक्र का धनु में प्रवेश
21 जनवरीशाम 4:42
शनि कन्या 17°37′ पर वक्री
27 जनवरीरात 3:12
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जनवरीशाम 5:06
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2040
10 फ़रवरीरात 12:52
मंगल मिथुन 8°37′ पर मार्गी
11 फ़रवरीशाम 4:19
शुक्र का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीरात 2:38
बुध कुम्भ 14°13′ पर वक्री
14 फ़रवरीरात 1:41
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
15 फ़रवरीशाम 4:17
बुध अस्त (28 फ़रवरी तक)†
28 फ़रवरीरात 12:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 2040
2 मार्चसुबह 10:09
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
6 मार्चरात 12:20
बुध मकर 29°17′ पर मार्गी
6 मार्चरात 9:29
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
9 मार्चशाम 7:27
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चरात 10:33
सूर्य का मीन में प्रवेश
31 मार्चरात 2:53
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2040
6 अप्रैलसुबह 6:45
बुध का मीन में प्रवेश
6 अप्रैलशाम 4:12
गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
14 अप्रैलसुबह 6:01
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलदोपहर 3:44
बुध अस्त (13 मई तक)†
21 अप्रैलदोपहर 2:42
मंगल का कर्क में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 5:08
बुध का मेष में प्रवेश
23 अप्रैलरात 9:28
शुक्र अस्त (7 जुलाई तक)†
24 अप्रैलसुबह 8:40
शुक्र का मेष में प्रवेश
मई 2040
7 मईसुबह 10:02
बुध का वृषभ में प्रवेश
13 मईसुबह 11:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मईरात 2:52
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मईशाम 4:15
गुरु (बृहस्पति) सिंह 27°28′ पर मार्गी
18 मईशाम 5:09
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
23 मईरात 10:53
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2040
7 जूनसुबह 6:26
शनि कन्या 10°49′ पर मार्गी
12 जूनरात 2:51
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
13 जूनदोपहर 12:18
बुध मिथुन 15°07′ पर वक्री
15 जूनसुबह 9:27
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनरात 1:12
मंगल का सिंह में प्रवेश
17 जूनरात 10:09
बुध अस्त (4 जुलाई तक)†
30 जूनरात 12:18
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश
जुलाई 2040
4 जुलाईशाम 5:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 जुलाईदोपहर 1:00
शुक्र का कर्क में प्रवेश
7 जुलाईरात 3:57
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
7 जुलाईदोपहर 2:21
बुध मिथुन 6°07′ पर मार्गी
16 जुलाईरात 8:18
सूर्य का कर्क में प्रवेश
30 जुलाईरात 11:22
शुक्र का सिंह में प्रवेश
31 जुलाईदोपहर 1:01
बुध का कर्क में प्रवेश
31 जुलाईदोपहर 1:51
बुध अस्त (29 अगस्त तक)†
अगस्त 2040
6 अगस्तरात 3:07
मंगल का कन्या में प्रवेश
15 अगस्तसुबह 9:18
बुध का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तसुबह 4:42
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तसुबह 10:41
शुक्र का कन्या में प्रवेश
29 अगस्तरात 2:26
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अगस्तशाम 7:21
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2040
17 सितंबरसुबह 4:38
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबररात 12:19
शुक्र का तुला में प्रवेश
20 सितंबरशाम 6:58
शनि अस्त (25 अक्टूबर तक)†
20 सितंबररात 11:29
गुरु (बृहस्पति) अस्त (19 अक्टूबर तक)†
21 सितंबरशाम 4:18
मंगल का तुला में प्रवेश
21 सितंबररात 9:00
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2040
10 अक्टूबररात 1:04
बुध तुला 13°06′ पर वक्री
12 अक्टूबरशाम 6:47
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
16 अक्टूबरसुबह 6:22
बुध अस्त (28 अक्टूबर तक)†
17 अक्टूबरशाम 5:36
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरदोपहर 2:47
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
19 अक्टूबररात 9:05
मंगल अस्त (24 फ़रवरी तक)†
25 अक्टूबरदोपहर 12:16
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
25 अक्टूबरशाम 4:19
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
28 अक्टूबररात 12:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबररात 10:06
बुध कन्या 27°26′ पर मार्गी
नवंबर 2040
4 नवंबरसुबह 9:44
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
5 नवंबरसुबह 10:42
बुध का तुला में प्रवेश
6 नवंबरशाम 6:25
शुक्र का धनु में प्रवेश
16 नवंबरशाम 5:24
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 10:31
राहु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
17 नवंबरसुबह 10:31
केतु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
19 नवंबरशाम 6:34
बुध अस्त (7 जनवरी तक)†
26 नवंबरशाम 6:15
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2040
2 दिसंबरसुबह 6:29
शुक्र का मकर में प्रवेश
4 दिसंबरसुबह 4:44
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
15 दिसंबरशाम 4:49
मंगल का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 8:34
बुध का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 8:03
सूर्य का धनु में प्रवेश
29 दिसंबररात 2:28
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
