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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2041: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2041 में शनि 28 जनवरी को तुला में, शनि 6 फ़रवरी को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 6 मई को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 31 जुलाई को तुला में, शनि 26 सितंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में।

1 जनवरी 2041 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2041 का गोचर कैलेंडर

सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2041

  • 3 जनवरीसुबह 11:40

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 7 जनवरीरात 8:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जनवरीशाम 4:18

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 24 जनवरीरात 2:47

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 26 जनवरीशाम 4:44

    बुध मकर 27°53′ पर वक्री

  • 28 जनवरीसुबह 6:13

    शनि का तुला में प्रवेश

  • 29 जनवरीदोपहर 12:50

    बुध अस्त (10 फ़रवरी तक)†

  • 29 जनवरीशाम 7:33

    शुक्र का मीन में प्रवेश

फ़रवरी 2041

  • 2 फ़रवरीरात 2:00

    शनि तुला 0°01′ पर वक्री

  • 6 फ़रवरीरात 10:06

    शनि का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 10 फ़रवरीसुबह 6:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 फ़रवरीसुबह 5:19

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीसुबह 6:34

    गुरु (बृहस्पति) तुला 7°20′ पर वक्री

  • 16 फ़रवरीरात 8:57

    बुध मकर 12°14′ पर मार्गी

  • 24 फ़रवरीशाम 6:36

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 फ़रवरीशाम 4:35

    शुक्र मीन 11°46′ पर वक्री

मार्च 2041

  • 3 मार्चदोपहर 2:18

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चशाम 5:08

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 मार्चशाम 6:06

    शुक्र अस्त (23 मार्च तक)†

  • 15 मार्चरात 2:13

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 23 मार्चशाम 4:55

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 मार्चशाम 4:51

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 30 मार्चसुबह 6:47

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 31 मार्चदोपहर 3:54

    बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†

अप्रैल 2041

  • 8 अप्रैलदोपहर 2:39

    शुक्र कुम्भ 25°37′ पर मार्गी

  • 10 अप्रैलरात 8:01

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 9:43

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलशाम 7:01

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 24 अप्रैलसुबह 10:52

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 27 अप्रैलरात 10:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अप्रैलसुबह 10:16

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 2041

  • 6 मईरात 10:09

    गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 मईसुबह 6:33

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 19 मईशाम 7:22

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 25 मईरात 1:07

    बुध वृषभ 25°03′ पर वक्री

  • 28 मईसुबह 9:39

    बुध अस्त (14 जून तक)†

  • 31 मईशाम 5:29

    शुक्र का मेष में प्रवेश

जून 2041

  • 14 जूनसुबह 10:43

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जूनदोपहर 1:06

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनरात 11:11

    बुध वृषभ 16°30′ पर मार्गी

  • 18 जूनशाम 4:02

    गुरु (बृहस्पति) कन्या 27°25′ पर मार्गी

  • 20 जूनसुबह 11:14

    शनि कन्या 23°16′ पर मार्गी

  • 29 जूनसुबह 6:26

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 29 जूनसुबह 9:51

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

जुलाई 2041

  • 6 जुलाईरात 10:37

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जुलाईरात 2:22

    बुध अस्त (11 अगस्त तक)†

  • 16 जुलाईरात 11:56

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 23 जुलाईसुबह 9:58

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 25 जुलाईरात 8:12

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 31 जुलाईसुबह 9:27

    गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश

अगस्त 2041

  • 7 अगस्तरात 1:21

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 11 अगस्तशाम 5:47

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 अगस्तशाम 6:30

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 8:19

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तसुबह 10:07

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 24 अगस्तरात 11:20

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2041

  • 14 सितंबरसुबह 7:45

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 8:15

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 23 सितंबररात 12:13

    बुध कन्या 26°49′ पर वक्री

  • 26 सितंबरसुबह 10:09

    शनि का तुला में प्रवेश

  • 29 सितंबररात 12:47

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 29 सितंबरशाम 5:47

    बुध अस्त (12 अक्टूबर तक)†

अक्टूबर 2041

  • 3 अक्टूबरदोपहर 12:01

    शनि अस्त (6 नवंबर तक)†

  • 8 अक्टूबरशाम 6:34

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 12 अक्टूबररात 1:32

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अक्टूबरशाम 4:21

    बुध कन्या 11°37′ पर मार्गी

  • 17 अक्टूबररात 9:12

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 21 अक्टूबरदोपहर 2:29

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (18 नवंबर तक)†

  • 31 अक्टूबररात 10:31

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 31 अक्टूबररात 10:40

    बुध अस्त (19 दिसंबर तक)†

नवंबर 2041

  • 1 नवंबररात 8:41

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 6 नवंबररात 9:37

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 नवंबररात 9:02

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 18 नवंबरशाम 4:53

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 19 नवंबरसुबह 10:59

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 21 नवंबरशाम 4:02

    शुक्र अस्त (12 फ़रवरी तक)†

  • 25 नवंबरशाम 6:41

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2041

  • 5 दिसंबररात 3:27

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 8 दिसंबरदोपहर 1:20

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 11:42

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 19 दिसंबरदोपहर 1:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 19 दिसंबरदोपहर 3:02

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 28 दिसंबरसुबह 5:08

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 28 दिसंबरशाम 4:05

    मंगल सिंह 3°13′ पर वक्री

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और