पंचांग · गोचर
गोचर 2042: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2042 में गुरु (बृहस्पति) 2 जनवरी को वृश्चिक में, राहु 5 जून को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 9 जून को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 27 अगस्त को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1 जनवरी 2042 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2041 से, 14 जनवरी 2042 तक
- चन्द्रमेष में31 दिसंबर 2041 से, 2 जनवरी 2042 तक
- मंगलवक्रीसिंह में4 दिसंबर 2041 से, 18 जनवरी 2042 तक
- बुधमकर में27 दिसंबर 2041 से, 22 जनवरी 2042 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में30 जुलाई 2041 से, 2 जनवरी 2042 तक
- शुक्रधनु में18 दिसंबर 2041 से, 11 जनवरी 2042 तक
- शनितुला में25 सितंबर 2041 से, 11 दिसंबर 2043 तक
- राहुमेष में16 नवंबर 2040 से, 5 जून 2042 तक
- केतुतुला में16 नवंबर 2040 से, 5 जून 2042 तक
2042 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2042
2 जनवरीरात 12:49
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
9 जनवरीरात 8:47
बुध मकर 11°46′ पर वक्री
11 जनवरीशाम 6:44
शुक्र का मकर में प्रवेश
13 जनवरीरात 1:15
बुध अस्त (24 जनवरी तक)†
14 जनवरीसुबह 5:59
सूर्य का मकर में प्रवेश
18 जनवरीरात 11:50
मंगल का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
22 जनवरीदोपहर 3:31
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
24 जनवरीसुबह 8:50
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जनवरीसुबह 9:32
बुध धनु 25°43′ पर मार्गी
फ़रवरी 2042
4 फ़रवरीदोपहर 3:58
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
8 फ़रवरीसुबह 11:40
बुध का मकर में प्रवेश
12 फ़रवरीरात 1:08
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
12 फ़रवरीशाम 7:01
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीशाम 4:18
शनि तुला 12°10′ पर वक्री
28 फ़रवरीदोपहर 3:50
शुक्र का मीन में प्रवेश
मार्च 2042
4 मार्चसुबह 6:58
बुध का कुम्भ में प्रवेश
13 मार्चसुबह 8:29
बुध अस्त (11 अप्रैल तक)†
14 मार्चशाम 4:55
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चरात 9:29
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 7°38′ पर वक्री
18 मार्चदोपहर 2:55
मंगल कर्क 13°44′ पर मार्गी
21 मार्चरात 9:37
बुध का मीन में प्रवेश
24 मार्चरात 9:18
शुक्र का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2042
5 अप्रैलरात 8:46
बुध का मेष में प्रवेश
11 अप्रैलरात 8:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 अप्रैलरात 1:23
सूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैलसुबह 8:28
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
24 अप्रैलसुबह 4:50
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2042
5 मईरात 12:12
बुध वृषभ 5°19′ पर वक्री
7 मईशाम 4:31
बुध अस्त (24 मई तक)†
13 मईसुबह 4:36
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
14 मईरात 10:12
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
18 मईरात 2:29
बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
18 मईसुबह 9:32
मंगल का सिंह में प्रवेश
24 मईसुबह 8:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 मईरात 8:32
बुध मेष 26°20′ पर मार्गी
जून 2042
5 जूनशाम 7:29
राहु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
5 जूनशाम 7:29
केतु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
7 जूनदोपहर 1:24
शुक्र का कर्क में प्रवेश
7 जूनरात 8:20
बुध का वृषभ में प्रवेश
9 जूनशाम 6:41
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
15 जूनसुबह 4:43
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
29 जूनरात 11:51
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 जूनरात 2:52
बुध अस्त (25 जुलाई तक)†
जुलाई 2042
2 जुलाईशाम 7:21
शनि तुला 5°26′ पर मार्गी
3 जुलाईशाम 6:55
शुक्र का सिंह में प्रवेश
14 जुलाईसुबह 6:29
बुध का कर्क में प्रवेश
14 जुलाईशाम 7:00
मंगल का कन्या में प्रवेश
16 जुलाईदोपहर 3:30
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईसुबह 8:06
गुरु (बृहस्पति) तुला 27°46′ पर मार्गी
25 जुलाईदोपहर 12:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जुलाईशाम 5:32
बुध का सिंह में प्रवेश
31 जुलाईशाम 6:51
शुक्र का कन्या में प्रवेश
अगस्त 2042
16 अगस्तरात 11:53
सूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अगस्तरात 10:08
बुध का कन्या में प्रवेश
27 अगस्तशाम 4:48
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
सितंबर 2042
1 सितंबरसुबह 7:09
मंगल का तुला में प्रवेश
3 सितंबररात 10:02
शुक्र का तुला में प्रवेश
5 सितंबरसुबह 6:20
बुध कन्या 10°07′ पर वक्री
12 सितंबरसुबह 8:15
बुध अस्त (25 सितंबर तक)†
16 सितंबररात 11:50
सूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सितंबररात 1:03
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
25 सितंबरसुबह 6:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 सितंबरशाम 5:18
बुध सिंह 25°36′ पर मार्गी
28 सितंबररात 3:40
शुक्र तुला 9°20′ पर वक्री
अक्टूबर 2042
5 अक्टूबररात 3:59
बुध का कन्या में प्रवेश
13 अक्टूबरशाम 4:41
बुध अस्त (28 नवंबर तक)†
14 अक्टूबररात 12:14
शुक्र अस्त (24 अक्टूबर तक)†
15 अक्टूबरसुबह 8:37
शनि अस्त (18 नवंबर तक)†
15 अक्टूबरसुबह 11:09
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 11:49
सूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टूबरदोपहर 2:57
शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
24 अक्टूबररात 2:07
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
24 अक्टूबररात 3:40
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2042
8 नवंबररात 10:05
शुक्र कन्या 23°38′ पर मार्गी
11 नवंबरसुबह 10:59
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 10:39
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरसुबह 9:13
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
20 नवंबरशाम 6:00
गुरु (बृहस्पति) अस्त (18 दिसंबर तक)†
25 नवंबरदोपहर 2:47
मंगल का धनु में प्रवेश
28 नवंबररात 1:16
शुक्र का तुला में प्रवेश
28 नवंबरसुबह 11:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2042
1 दिसंबररात 1:16
बुध का धनु में प्रवेश
16 दिसंबररात 1:17
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरदोपहर 2:23
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
24 दिसंबरशाम 6:43
बुध धनु 25°49′ पर वक्री
28 दिसंबरसुबह 9:21
बुध अस्त (8 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
