पंचांग · गोचर
गोचर 2043: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2043 में गुरु (बृहस्पति) 27 जनवरी को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 30 जुलाई को वृश्चिक में, गुरु (बृहस्पति) 11 सितंबर को धनु में, शनि 11 दिसंबर को वृश्चिक में, राहु 24 दिसंबर को कुम्भ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1 जनवरी 2043 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2042 से, 14 जनवरी 2043 तक
- चन्द्रसिंह में30 दिसंबर 2042 से, 1 जनवरी 2043 तक
- मंगलधनु में25 नवंबर 2042 से, 4 जनवरी 2043 तक
- बुधवक्रीधनु में1 दिसंबर 2042 से, 5 फ़रवरी 2043 तक
- गुरु (बृहस्पति)वृश्चिक में27 अगस्त 2042 से, 27 जनवरी 2043 तक
- शुक्रतुला में28 नवंबर 2042 से, 1 जनवरी 2043 तक
- शनितुला में26 सितंबर 2041 से, 11 दिसंबर 2043 तक
- राहुमीन में6 जून 2042 से, 24 दिसंबर 2043 तक
- केतुकन्या में6 जून 2042 से, 24 दिसंबर 2043 तक
2043 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2043
1 जनवरीशाम 7:51
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
4 जनवरीरात 1:40
मंगल का मकर में प्रवेश
8 जनवरीशाम 4:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीरात 1:50
बुध धनु 9°34′ पर मार्गी
14 जनवरीशाम 6:00
सूर्य का मकर में प्रवेश
27 जनवरीदोपहर 2:35
गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश
29 जनवरीरात 2:24
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 2043
5 फ़रवरीशाम 6:15
बुध का मकर में प्रवेश
11 फ़रवरीसुबह 5:25
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 6:57
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
22 फ़रवरीरात 10:35
बुध अस्त (27 मार्च तक)†
23 फ़रवरीशाम 6:04
शुक्र का मकर में प्रवेश
25 फ़रवरीदोपहर 12:28
बुध का कुम्भ में प्रवेश
25 फ़रवरीरात 11:08
शनि तुला 24°04′ पर वक्री
मार्च 2043
14 मार्चरात 1:05
बुध का मीन में प्रवेश
15 मार्चरात 3:48
सूर्य का मीन में प्रवेश
20 मार्चशाम 7:06
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
21 मार्चसुबह 6:41
मंगल का मीन में प्रवेश
27 मार्चसुबह 9:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 मार्चदोपहर 2:26
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2043
14 अप्रैलदोपहर 1:16
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलदोपहर 3:02
शुक्र का मीन में प्रवेश
16 अप्रैलसुबह 7:17
बुध मेष 16°18′ पर वक्री
18 अप्रैलदोपहर 3:55
बुध अस्त (4 मई तक)†
20 अप्रैलसुबह 4:44
गुरु (बृहस्पति) धनु 9°08′ पर वक्री
29 अप्रैलरात 3:53
मंगल का मेष में प्रवेश
मई 2043
4 मईसुबह 10:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 मईसुबह 7:29
शुक्र का मेष में प्रवेश
10 मईरात 1:20
बुध मेष 6°09′ पर मार्गी
11 मईरात 10:34
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
15 मईसुबह 10:06
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
जून 2043
2 जूनरात 10:38
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
6 जूनसुबह 6:05
बुध का वृषभ में प्रवेश
8 जूनदोपहर 1:49
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 जूनरात 10:08
बुध अस्त (9 जुलाई तक)†
15 जूनशाम 4:40
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
22 जूनरात 1:49
बुध का मिथुन में प्रवेश
27 जूनदोपहर 12:07
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2043
2 जुलाईसुबह 4:24
शुक्र अस्त (13 सितंबर तक)†
6 जुलाईरात 2:30
बुध का कर्क में प्रवेश
9 जुलाईदोपहर 1:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जुलाईशाम 7:40
शनि तुला 17°22′ पर मार्गी
17 जुलाईरात 3:33
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईसुबह 5:29
मंगल का मिथुन में प्रवेश
21 जुलाईरात 10:58
शुक्र का कर्क में प्रवेश
23 जुलाईसुबह 10:54
बुध का सिंह में प्रवेश
30 जुलाईसुबह 7:36
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
अगस्त 2043
15 अगस्तसुबह 6:47
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तदोपहर 12:00
सूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अगस्तरात 2:32
बुध सिंह 22°52′ पर वक्री
20 अगस्तशाम 7:52
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 29°17′ पर मार्गी
26 अगस्तसुबह 6:16
बुध अस्त (8 सितंबर तक)†
सितंबर 2043
4 सितंबरशाम 6:55
मंगल का कर्क में प्रवेश
8 सितंबरदोपहर 12:08
शुक्र का कन्या में प्रवेश
8 सितंबररात 11:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 सितंबरसुबह 7:44
गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश
11 सितंबरसुबह 8:04
बुध सिंह 9°18′ पर मार्गी
13 सितंबररात 3:46
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबरदोपहर 12:01
सूर्य का कन्या में प्रवेश
27 सितंबरसुबह 4:21
बुध अस्त (7 नवंबर तक)†
29 सितंबरशाम 7:13
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2043
2 अक्टूबरशाम 4:18
शुक्र का तुला में प्रवेश
16 अक्टूबरशाम 7:49
बुध का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबररात 12:03
सूर्य का तुला में प्रवेश
24 अक्टूबरशाम 6:57
मंगल का सिंह में प्रवेश
26 अक्टूबरशाम 7:23
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
27 अक्टूबरशाम 5:10
शनि अस्त (30 नवंबर तक)†
नवंबर 2043
4 नवंबरदोपहर 2:05
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
7 नवंबरशाम 5:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबररात 10:54
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नवंबररात 12:14
शुक्र का धनु में प्रवेश
25 नवंबररात 8:21
बुध का धनु में प्रवेश
30 नवंबरदोपहर 12:42
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2043
8 दिसंबररात 9:57
बुध धनु 9°57′ पर वक्री
11 दिसंबरशाम 5:00
शनि का वृश्चिक में प्रवेश
13 दिसंबररात 12:29
बुध अस्त (23 दिसंबर तक)†
14 दिसंबरसुबह 7:10
शुक्र का मकर में प्रवेश
16 दिसंबरदोपहर 1:32
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबररात 11:38
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
22 दिसंबररात 8:37
गुरु (बृहस्पति) अस्त (19 जनवरी तक)†
23 दिसंबररात 11:23
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 दिसंबररात 3:27
राहु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
24 दिसंबररात 3:27
केतु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
27 दिसंबररात 8:47
मंगल का कन्या में प्रवेश
28 दिसंबरशाम 4:45
बुध वृश्चिक 23°38′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
