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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2044: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2044 में गुरु (बृहस्पति) 16 फ़रवरी को मकर में, शनि 23 जून को तुला में, शनि 30 अगस्त को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

1 जनवरी 2044 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2044 का गोचर कैलेंडर

सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2044

  • 8 जनवरीरात 1:23

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 8 जनवरीसुबह 9:50

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 15 जनवरीसुबह 5:58

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 20 जनवरीरात 12:50

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 जनवरीरात 8:13

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2044

  • 1 फ़रवरीसुबह 4:51

    मंगल कन्या 6°25′ पर वक्री

  • 2 फ़रवरीरात 3:02

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 3 फ़रवरीसुबह 9:35

    बुध अस्त (10 मार्च तक)†

  • 13 फ़रवरीशाम 6:53

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीसुबह 10:40

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

  • 18 फ़रवरीसुबह 4:57

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 28 फ़रवरीसुबह 10:32

    शुक्र का मेष में प्रवेश

मार्च 2044

  • 4 मार्चसुबह 7:13

    मंगल का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 मार्चसुबह 7:27

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 9 मार्चरात 3:38

    शनि वृश्चिक 5°46′ पर वक्री

  • 10 मार्चशाम 5:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मार्चदोपहर 3:44

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 28 मार्चसुबह 7:15

    बुध मीन 28°07′ पर वक्री

  • 29 मार्चरात 3:46

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 30 मार्चदोपहर 1:47

    बुध अस्त (14 अप्रैल तक)†

अप्रैल 2044

  • 14 अप्रैलरात 12:12

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 6:22

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 अप्रैलशाम 7:19

    बुध मीन 16°26′ पर मार्गी

  • 22 अप्रैलसुबह 5:25

    मंगल सिंह 17°07′ पर मार्गी

मई 2044

  • 6 मईदोपहर 2:45

    शुक्र वृषभ 20°54′ पर वक्री

  • 10 मईदोपहर 1:23

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 14 मईरात 9:04

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 22 मईरात 10:17

    शुक्र अस्त (2 जून तक)†

  • 24 मईशाम 7:30

    गुरु (बृहस्पति) मकर 12°29′ पर वक्री

  • 29 मईसुबह 11:31

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 29 मईदोपहर 12:38

    बुध अस्त (22 जून तक)†

जून 2044

  • 2 जूनरात 2:48

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जूनदोपहर 3:34

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 13 जूनसुबह 4:48

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 15 जूनरात 3:40

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 18 जूनदोपहर 12:23

    शुक्र वृषभ 4°23′ पर मार्गी

  • 22 जूनरात 10:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 जूनसुबह 10:27

    शनि का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 27 जूनदोपहर 1:30

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2044

  • 16 जुलाईदोपहर 2:33

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 20 जुलाईसुबह 6:33

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 27 जुलाईदोपहर 1:47

    शनि तुला 29°06′ पर मार्गी

  • 31 जुलाईदोपहर 2:06

    बुध सिंह 4°53′ पर वक्री

अगस्त 2044

  • 1 अगस्तरात 9:52

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 7 अगस्तसुबह 10:45

    बुध अस्त (22 अगस्त तक)†

  • 9 अगस्तरात 12:49

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 11 अगस्तदोपहर 1:35

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 अगस्तरात 10:57

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 22 अगस्तरात 1:18

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 अगस्तसुबह 9:57

    बुध कर्क 22°34′ पर मार्गी

  • 30 अगस्तसुबह 4:37

    शनि का वृश्चिक में प्रवेश

  • 31 अगस्तसुबह 11:26

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

सितंबर 2044

  • 4 सितंबररात 3:44

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 10 सितंबरसुबह 4:54

    बुध अस्त (17 अक्टूबर तक)†

  • 16 सितंबररात 10:54

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबरसुबह 7:35

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबररात 8:54

    गुरु (बृहस्पति) मकर 2°38′ पर मार्गी

  • 24 सितंबरसुबह 5:10

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 सितंबररात 1:15

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 2044

  • 8 अक्टूबरसुबह 11:36

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 5:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 10:53

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 22 अक्टूबरसुबह 7:00

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 28 अक्टूबरसुबह 7:30

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2044

  • 4 नवंबररात 11:30

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 7 नवंबरशाम 7:50

    शनि अस्त (11 दिसंबर तक)†

  • 15 नवंबरशाम 7:18

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 16 नवंबरसुबह 10:44

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 21 नवंबररात 10:36

    बुध वृश्चिक 24°08′ पर वक्री

  • 26 नवंबरदोपहर 2:35

    बुध अस्त (7 दिसंबर तक)†

दिसंबर 2044

  • 7 दिसंबरदोपहर 2:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 दिसंबररात 10:27

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 11 दिसंबरसुबह 10:26

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 दिसंबरशाम 5:16

    बुध वृश्चिक 7°52′ पर मार्गी

  • 14 दिसंबरसुबह 7:05

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 16 दिसंबररात 1:24

    सूर्य का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और