पंचांग · गोचर
गोचर 2044: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2044 में गुरु (बृहस्पति) 16 फ़रवरी को मकर में, शनि 23 जून को तुला में, शनि 30 अगस्त को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में।
1 जनवरी 2044 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में17 दिसंबर 2043 से, 15 जनवरी 2044 तक
- चन्द्रधनु में30 दिसंबर 2043 से, 2 जनवरी 2044 तक
- मंगलकन्या में28 दिसंबर 2043 से, 4 मार्च 2044 तक
- बुधवृश्चिक में20 दिसंबर 2043 से, 8 जनवरी 2044 तक
- गुरु (बृहस्पति)धनु में11 सितंबर 2043 से, 16 फ़रवरी 2044 तक
- शुक्रमकर में14 दिसंबर 2043 से, 8 जनवरी 2044 तक
- शनिवृश्चिक में12 दिसंबर 2043 से, 23 जून 2044 तक
- राहुकुम्भ में24 दिसंबर 2043 से, 12 जुलाई 2045 तक
- केतुसिंह में24 दिसंबर 2043 से, 12 जुलाई 2045 तक
2044 का गोचर कैलेंडर
सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2044
8 जनवरीसुबह 6:08
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
8 जनवरीदोपहर 2:35
बुध का धनु में प्रवेश
15 जनवरीसुबह 10:43
सूर्य का मकर में प्रवेश
20 जनवरीसुबह 5:35
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
31 जनवरीरात 12:58
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2044
1 फ़रवरीसुबह 9:36
मंगल कन्या 6°25′ पर वक्री
2 फ़रवरीसुबह 7:47
शुक्र का मीन में प्रवेश
3 फ़रवरीदोपहर 2:20
बुध अस्त (10 मार्च तक)†
13 फ़रवरीरात 11:38
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीदोपहर 3:25
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
18 फ़रवरीसुबह 9:42
बुध का कुम्भ में प्रवेश
28 फ़रवरीदोपहर 3:17
शुक्र का मेष में प्रवेश
मार्च 2044
4 मार्चसुबह 11:58
मंगल का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
5 मार्चदोपहर 12:12
बुध का मीन में प्रवेश
9 मार्चसुबह 8:23
शनि वृश्चिक 5°46′ पर वक्री
10 मार्चरात 9:52
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मार्चरात 8:29
सूर्य का मीन में प्रवेश
28 मार्चदोपहर 12:00
बुध मीन 28°07′ पर वक्री
29 मार्चसुबह 8:31
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
30 मार्चशाम 6:32
बुध अस्त (14 अप्रैल तक)†
अप्रैल 2044
14 अप्रैलरात 3:57
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 10:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 अप्रैलरात 11:04
बुध मीन 16°26′ पर मार्गी
22 अप्रैलसुबह 9:10
मंगल सिंह 17°07′ पर मार्गी
मई 2044
6 मईशाम 6:30
शुक्र वृषभ 20°54′ पर वक्री
10 मईशाम 5:08
बुध का मेष में प्रवेश
15 मईरात 12:49
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईरात 2:02
शुक्र अस्त (2 जून तक)†
24 मईरात 11:15
गुरु (बृहस्पति) मकर 12°29′ पर वक्री
29 मईदोपहर 3:16
बुध का वृषभ में प्रवेश
29 मईशाम 4:23
बुध अस्त (23 जून तक)†
जून 2044
2 जूनसुबह 6:33
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जूनशाम 7:19
बुध का मिथुन में प्रवेश
13 जूनसुबह 8:33
मंगल का कन्या में प्रवेश
15 जूनसुबह 7:25
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनशाम 4:08
शुक्र वृषभ 4°23′ पर मार्गी
23 जूनरात 1:53
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जूनदोपहर 2:12
शनि का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
27 जूनशाम 5:15
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2044
16 जुलाईशाम 6:18
सूर्य का कर्क में प्रवेश
20 जुलाईसुबह 10:18
बुध का सिंह में प्रवेश
27 जुलाईशाम 5:32
शनि तुला 29°06′ पर मार्गी
31 जुलाईशाम 5:51
बुध सिंह 4°53′ पर वक्री
अगस्त 2044
2 अगस्तरात 1:37
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
7 अगस्तदोपहर 2:30
बुध अस्त (22 अगस्त तक)†
9 अगस्तसुबह 4:34
मंगल का तुला में प्रवेश
11 अगस्तशाम 5:20
बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अगस्तरात 2:42
सूर्य का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तसुबह 5:03
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 अगस्तदोपहर 1:42
बुध कर्क 22°34′ पर मार्गी
30 अगस्तसुबह 8:22
शनि का वृश्चिक में प्रवेश
31 अगस्तदोपहर 3:11
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2044
4 सितंबरसुबह 7:29
बुध का सिंह में प्रवेश
10 सितंबरसुबह 8:39
बुध अस्त (17 अक्टूबर तक)†
17 सितंबररात 2:39
सूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सितंबरसुबह 11:20
बुध का कन्या में प्रवेश
23 सितंबररात 12:39
गुरु (बृहस्पति) मकर 2°38′ पर मार्गी
24 सितंबरसुबह 8:55
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
27 सितंबरसुबह 5:00
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 2044
8 अक्टूबरशाम 4:21
बुध का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 10:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 अक्टूबरदोपहर 3:38
सूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टूबरसुबह 11:45
शुक्र का कन्या में प्रवेश
28 अक्टूबरदोपहर 12:15
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2044
5 नवंबरसुबह 4:15
मंगल का धनु में प्रवेश
8 नवंबररात 12:35
शनि अस्त (11 दिसंबर तक)†
16 नवंबररात 12:03
शुक्र का तुला में प्रवेश
16 नवंबरदोपहर 3:29
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबररात 3:21
बुध वृश्चिक 24°08′ पर वक्री
26 नवंबरशाम 7:20
बुध अस्त (7 दिसंबर तक)†
दिसंबर 2044
7 दिसंबरशाम 7:22
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 दिसंबररात 3:12
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
11 दिसंबरदोपहर 3:11
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
11 दिसंबररात 10:01
बुध वृश्चिक 7°52′ पर मार्गी
14 दिसंबरसुबह 11:50
मंगल का मकर में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 6:09
सूर्य का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
