पंचांग · गोचर
गोचर 2046: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2046 में गुरु (बृहस्पति) 13 मार्च को मीन में, शनि 8 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सुवा के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।
1 जनवरी 2046 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2045 से, 15 जनवरी 2046 तक
- चन्द्रकन्या में30 दिसंबर 2045 से, 1 जनवरी 2046 तक
- मंगलकन्या में21 नवंबर 2045 से, 20 जनवरी 2046 तक
- बुधधनु में27 दिसंबर 2045 से, 15 जनवरी 2046 तक
- गुरु (बृहस्पति)कुम्भ में2 मार्च 2045 से, 13 मार्च 2046 तक
- शुक्रवक्रीधनु में31 अक्टूबर 2045 से, 1 मार्च 2046 तक
- शनिवृश्चिक में30 अगस्त 2044 से, 8 दिसंबर 2046 तक
- राहुमकर में12 जुलाई 2045 से, 29 जनवरी 2047 तक
- केतुकर्क में12 जुलाई 2045 से, 29 जनवरी 2047 तक
2046 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सुवा के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2046
7 जनवरीरात 12:44
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जनवरीरात 12:31
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीशाम 5:13
बुध का मकर में प्रवेश
20 जनवरीशाम 4:03
मंगल का तुला में प्रवेश
22 जनवरीसुबह 10:58
शुक्र धनु 9°11′ पर मार्गी
फ़रवरी 2046
2 फ़रवरीसुबह 5:29
बुध का कुम्भ में प्रवेश
5 फ़रवरीशाम 7:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 फ़रवरीदोपहर 1:30
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
22 फ़रवरीसुबह 6:00
बुध कुम्भ 23°45′ पर वक्री
24 फ़रवरीशाम 5:01
बुध अस्त (9 मार्च तक)†
मार्च 2046
1 मार्चसुबह 9:36
शुक्र का मकर में प्रवेश
1 मार्चदोपहर 2:47
गुरु (बृहस्पति) अस्त (30 मार्च तक)†
9 मार्चसुबह 11:36
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 मार्चदोपहर 2:06
मंगल तुला 11°44′ पर वक्री
13 मार्चसुबह 7:47
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
15 मार्चसुबह 10:18
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चदोपहर 2:12
बुध कुम्भ 9°22′ पर मार्गी
30 मार्चशाम 6:00
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मार्चसुबह 7:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2046
2 अप्रैलरात 2:13
शनि वृश्चिक 28°44′ पर वक्री
10 अप्रैलसुबह 4:45
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलशाम 6:41
सूर्य का मेष में प्रवेश
27 अप्रैलसुबह 4:21
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 अप्रैलसुबह 8:00
मंगल का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
27 अप्रैलशाम 7:45
बुध अस्त (23 मई तक)†
28 अप्रैलसुबह 11:52
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2046
12 मईरात 11:34
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 मईदोपहर 3:27
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
23 मईरात 12:48
शुक्र का मेष में प्रवेश
23 मईरात 1:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मईरात 8:49
बुध का मिथुन में प्रवेश
29 मईरात 3:35
मंगल कन्या 23°36′ पर मार्गी
जून 2046
15 जूनरात 9:59
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनसुबह 9:26
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
25 जूनरात 2:57
बुध मिथुन 26°37′ पर वक्री
30 जूनसुबह 5:25
बुध अस्त (16 जुलाई तक)†
जुलाई 2046
1 जुलाईशाम 7:21
मंगल का तुला में प्रवेश
12 जुलाईसुबह 10:05
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईदोपहर 3:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 जुलाईसुबह 8:51
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईसुबह 7:51
बुध मिथुन 17°01′ पर मार्गी
अगस्त 2046
4 अगस्तरात 11:25
बुध का कर्क में प्रवेश
6 अगस्तरात 3:28
शुक्र का कर्क में प्रवेश
8 अगस्तदोपहर 3:56
गुरु (बृहस्पति) मीन 24°30′ पर वक्री
10 अगस्तरात 3:17
बुध अस्त (9 सितंबर तक)†
17 अगस्तशाम 5:18
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 8:41
बुध का सिंह में प्रवेश
21 अगस्तसुबह 7:46
शनि वृश्चिक 22°06′ पर मार्गी
30 अगस्तरात 12:47
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
30 अगस्तदोपहर 1:52
शुक्र का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2046
5 सितंबरशाम 6:30
बुध का कन्या में प्रवेश
8 सितंबरसुबह 11:34
शुक्र अस्त (24 नवंबर तक)†
9 सितंबररात 1:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबरशाम 5:19
सूर्य का कन्या में प्रवेश
23 सितंबरशाम 6:26
शुक्र का कन्या में प्रवेश
25 सितंबरसुबह 6:08
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2046
13 अक्टूबरदोपहर 1:40
मंगल का धनु में प्रवेश
17 अक्टूबरशाम 7:07
शुक्र का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरसुबह 5:22
सूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टूबरसुबह 6:55
बुध तुला 22°21′ पर वक्री
26 अक्टूबरसुबह 4:19
बुध अस्त (6 नवंबर तक)†
नवंबर 2046
6 नवंबरशाम 4:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 नवंबरशाम 7:26
बुध तुला 6°29′ पर मार्गी
10 नवंबरशाम 5:53
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 5:15
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबररात 10:29
मंगल का मकर में प्रवेश
24 नवंबररात 10:05
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2046
1 दिसंबरसुबह 6:14
शनि अस्त (3 जनवरी तक)†
1 दिसंबरसुबह 7:21
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
1 दिसंबरशाम 6:34
बुध अस्त (19 जनवरी तक)†
4 दिसंबरदोपहर 1:23
गुरु (बृहस्पति) मीन 14°33′ पर मार्गी
4 दिसंबरशाम 4:04
शुक्र का धनु में प्रवेश
8 दिसंबरसुबह 5:06
शनि का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरशाम 7:59
सूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिसंबरदोपहर 3:57
बुध का धनु में प्रवेश
28 दिसंबरदोपहर 2:38
शुक्र का मकर में प्रवेश
31 दिसंबरशाम 4:44
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
