पंचांग · गोचर
गोचर 2046: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2046 में गुरु (बृहस्पति) 12 मार्च को मीन में, शनि 7 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय न्यूयॉर्क के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।
1 जनवरी 2046 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2045 से, 14 जनवरी 2046 तक
- चन्द्रतुला में31 दिसंबर 2045 से, 2 जनवरी 2046 तक
- मंगलकन्या में20 नवंबर 2045 से, 19 जनवरी 2046 तक
- बुधधनु में27 दिसंबर 2045 से, 15 जनवरी 2046 तक
- गुरु (बृहस्पति)कुम्भ में1 मार्च 2045 से, 12 मार्च 2046 तक
- शुक्रवक्रीधनु में30 अक्टूबर 2045 से, 28 फ़रवरी 2046 तक
- शनिवृश्चिक में29 अगस्त 2044 से, 7 दिसंबर 2046 तक
- राहुमकर में12 जुलाई 2045 से, 29 जनवरी 2047 तक
- केतुकर्क में12 जुलाई 2045 से, 29 जनवरी 2047 तक
2046 का गोचर कैलेंडर
सभी समय न्यूयॉर्क के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2046
6 जनवरीसुबह 7:44
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीसुबह 7:31
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीरात 12:13
बुध का मकर में प्रवेश
19 जनवरीरात 11:03
मंगल का तुला में प्रवेश
21 जनवरीशाम 5:58
शुक्र धनु 9°11′ पर मार्गी
फ़रवरी 2046
1 फ़रवरीदोपहर 12:29
बुध का कुम्भ में प्रवेश
5 फ़रवरीरात 2:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 फ़रवरीरात 8:30
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
21 फ़रवरीदोपहर 1:00
बुध कुम्भ 23°45′ पर वक्री
24 फ़रवरीरात 12:01
बुध अस्त (8 मार्च तक)†
28 फ़रवरीशाम 4:36
शुक्र का मकर में प्रवेश
28 फ़रवरीरात 9:47
गुरु (बृहस्पति) अस्त (30 मार्च तक)†
मार्च 2046
8 मार्चशाम 6:36
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 मार्चरात 9:06
मंगल तुला 11°44′ पर वक्री
12 मार्चदोपहर 3:47
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
14 मार्चशाम 6:18
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चरात 10:12
बुध कुम्भ 9°22′ पर मार्गी
30 मार्चरात 2:00
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
30 मार्चदोपहर 3:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 2046
1 अप्रैलसुबह 10:13
शनि वृश्चिक 28°44′ पर वक्री
9 अप्रैलदोपहर 12:45
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलरात 2:41
सूर्य का मेष में प्रवेश
26 अप्रैलदोपहर 12:21
शुक्र का मीन में प्रवेश
26 अप्रैलशाम 4:00
मंगल का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
27 अप्रैलरात 3:45
बुध अस्त (22 मई तक)†
27 अप्रैलशाम 7:52
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2046
12 मईसुबह 7:34
बुध का वृषभ में प्रवेश
14 मईरात 11:27
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
22 मईसुबह 8:48
शुक्र का मेष में प्रवेश
22 मईसुबह 9:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मईसुबह 4:49
बुध का मिथुन में प्रवेश
28 मईसुबह 11:35
मंगल कन्या 23°36′ पर मार्गी
जून 2046
15 जूनसुबह 5:59
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनशाम 5:26
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
24 जूनसुबह 10:57
बुध मिथुन 26°37′ पर वक्री
29 जूनदोपहर 1:25
बुध अस्त (15 जुलाई तक)†
जुलाई 2046
1 जुलाईरात 3:21
मंगल का तुला में प्रवेश
11 जुलाईशाम 6:05
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
15 जुलाईरात 11:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईशाम 4:51
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईदोपहर 3:51
बुध मिथुन 17°01′ पर मार्गी
अगस्त 2046
4 अगस्तसुबह 7:25
बुध का कर्क में प्रवेश
5 अगस्तसुबह 11:28
शुक्र का कर्क में प्रवेश
7 अगस्तरात 11:56
गुरु (बृहस्पति) मीन 24°30′ पर वक्री
9 अगस्तसुबह 11:17
बुध अस्त (8 सितंबर तक)†
17 अगस्तरात 1:18
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तसुबह 4:41
बुध का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तदोपहर 3:46
शनि वृश्चिक 22°06′ पर मार्गी
29 अगस्तसुबह 8:47
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
29 अगस्तरात 9:52
शुक्र का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2046
5 सितंबररात 2:30
बुध का कन्या में प्रवेश
7 सितंबरशाम 7:34
शुक्र अस्त (24 नवंबर तक)†
8 सितंबरसुबह 9:47
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबररात 1:19
सूर्य का कन्या में प्रवेश
23 सितंबररात 2:26
शुक्र का कन्या में प्रवेश
24 सितंबरदोपहर 2:08
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2046
12 अक्टूबररात 9:40
मंगल का धनु में प्रवेश
17 अक्टूबररात 3:07
शुक्र का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 1:22
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरदोपहर 2:55
बुध तुला 22°21′ पर वक्री
25 अक्टूबरदोपहर 12:19
बुध अस्त (5 नवंबर तक)†
नवंबर 2046
5 नवंबररात 11:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 नवंबररात 2:26
बुध तुला 6°29′ पर मार्गी
10 नवंबररात 12:53
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरदोपहर 12:15
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबरसुबह 5:29
मंगल का मकर में प्रवेश
24 नवंबरसुबह 5:05
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
30 नवंबरदोपहर 1:14
शनि अस्त (2 जनवरी तक)†
30 नवंबरदोपहर 2:21
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2046
1 दिसंबररात 1:34
बुध अस्त (18 जनवरी तक)†
3 दिसंबररात 8:23
गुरु (बृहस्पति) मीन 14°33′ पर मार्गी
3 दिसंबररात 11:04
शुक्र का धनु में प्रवेश
7 दिसंबरदोपहर 12:06
शनि का धनु में प्रवेश
16 दिसंबररात 2:59
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबररात 10:57
बुध का धनु में प्रवेश
27 दिसंबररात 9:38
शुक्र का मकर में प्रवेश
30 दिसंबररात 11:44
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
