पंचांग · गोचर
गोचर 2048: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2048 में गुरु (बृहस्पति) 27 मार्च को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 12 अगस्त को मिथुन में, राहु 17 अगस्त को वृश्चिक में, गुरु (बृहस्पति) 27 दिसंबर को वृषभ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लॉस एंजेलिस के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2048 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2047 से, 14 जनवरी 2048 तक
- चन्द्रमिथुन में30 दिसंबर 2047 से, 2 जनवरी 2048 तक
- मंगलतुला में18 दिसंबर 2047 से, 10 फ़रवरी 2048 तक
- बुधमकर में31 दिसंबर 2047 से, 7 मार्च 2048 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीमेष में10 अक्टूबर 2047 से, 27 मार्च 2048 तक
- शुक्रवृश्चिक में23 दिसंबर 2047 से, 17 जनवरी 2048 तक
- शनिधनु में7 दिसंबर 2046 से, 6 मार्च 2049 तक
- राहुधनु में29 जनवरी 2047 से, 17 अगस्त 2048 तक
- केतुमिथुन में29 जनवरी 2047 से, 17 अगस्त 2048 तक
2048 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लॉस एंजेलिस के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2048
9 जनवरीशाम 6:34
गुरु (बृहस्पति) मेष 21°09′ पर मार्गी
14 जनवरीरात 3:20
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीशाम 4:46
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीरात 2:42
शुक्र का धनु में प्रवेश
19 जनवरीशाम 5:47
बुध मकर 21°01′ पर वक्री
22 जनवरीशाम 5:09
बुध अस्त (3 फ़रवरी तक)†
फ़रवरी 2048
3 फ़रवरीसुबह 6:03
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 फ़रवरीदोपहर 2:45
बुध मकर 5°10′ पर मार्गी
10 फ़रवरीसुबह 7:49
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
10 फ़रवरीसुबह 9:05
शुक्र का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 5:45
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2048
5 मार्चदोपहर 1:53
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
7 मार्चसुबह 10:28
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चरात 3:37
सूर्य का मीन में प्रवेश
23 मार्चसुबह 5:09
बुध अस्त (20 अप्रैल तक)†
26 मार्चरात 12:15
बुध का मीन में प्रवेश
27 मार्चरात 8:37
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश
29 मार्चरात 8:01
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2048
10 अप्रैलसुबह 5:16
बुध का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलदोपहर 12:05
सूर्य का मेष में प्रवेश
20 अप्रैलसुबह 8:50
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 अप्रैलशाम 5:51
शुक्र अस्त (4 जुलाई तक)†
23 अप्रैलरात 2:36
शुक्र का मेष में प्रवेश
24 अप्रैलरात 12:20
शनि धनु 21°28′ पर वक्री
25 अप्रैलदोपहर 3:48
बुध का वृषभ में प्रवेश
30 अप्रैलसुबह 9:48
मंगल वृश्चिक 25°51′ पर वक्री
मई 2048
13 मईदोपहर 1:25
गुरु (बृहस्पति) अस्त (12 जून तक)†
14 मईसुबह 8:53
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईशाम 6:31
बुध वृषभ 16°36′ पर वक्री
17 मईसुबह 10:58
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
18 मईशाम 6:40
बुध अस्त (4 जून तक)†
जून 2048
4 जूनशाम 5:29
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 जूनदोपहर 2:57
बुध वृषभ 7°58′ पर मार्गी
10 जूनरात 8:36
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
12 जूनरात 8:26
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जूनदोपहर 3:24
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2048
3 जुलाईदोपहर 3:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
4 जुलाईरात 3:34
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
5 जुलाईसुबह 6:47
शुक्र का कर्क में प्रवेश
8 जुलाईदोपहर 1:37
बुध अस्त (3 अगस्त तक)†
10 जुलाईदोपहर 3:42
मंगल वृश्चिक 10°59′ पर मार्गी
16 जुलाईरात 2:14
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईशाम 7:08
बुध का कर्क में प्रवेश
29 जुलाईशाम 5:20
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2048
2 अगस्तशाम 4:21
बुध का सिंह में प्रवेश
3 अगस्तदोपहर 2:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 अगस्तदोपहर 12:45
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
16 अगस्तसुबह 10:39
सूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तसुबह 5:20
राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अगस्तसुबह 5:20
केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
21 अगस्तदोपहर 2:45
बुध का कन्या में प्रवेश
23 अगस्तसुबह 5:00
शुक्र का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2048
7 सितंबरदोपहर 2:58
मंगल का धनु में प्रवेश
12 सितंबरसुबह 10:29
शनि धनु 14°50′ पर मार्गी
14 सितंबरशाम 6:08
बुध कन्या 19°47′ पर वक्री
16 सितंबरसुबह 10:38
सूर्य का कन्या में प्रवेश
16 सितंबरशाम 7:10
शुक्र का तुला में प्रवेश
21 सितंबरदोपहर 3:49
बुध अस्त (4 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 2048
4 अक्टूबरसुबह 4:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अक्टूबरशाम 5:30
बुध कन्या 4°50′ पर मार्गी
11 अक्टूबरदोपहर 1:25
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
16 अक्टूबररात 10:40
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरसुबह 8:41
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 6°29′ पर वक्री
23 अक्टूबरसुबह 7:06
बुध अस्त (9 दिसंबर तक)†
24 अक्टूबररात 9:27
मंगल का मकर में प्रवेश
27 अक्टूबररात 11:12
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2048
5 नवंबरदोपहर 1:12
शुक्र का धनु में प्रवेश
15 नवंबरसुबह 6:09
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
15 नवंबररात 9:31
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2048
1 दिसंबररात 3:15
शुक्र का मकर में प्रवेश
4 दिसंबरसुबह 11:52
बुध का धनु में प्रवेश
5 दिसंबरसुबह 8:56
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
9 दिसंबररात 10:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 दिसंबरदोपहर 12:11
सूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिसंबरसुबह 5:57
शनि अस्त (24 जनवरी तक)†
25 दिसंबरदोपहर 1:17
बुध का मकर में प्रवेश
27 दिसंबरसुबह 10:36
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
28 दिसंबररात 3:56
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
