पंचांग · गोचर
गोचर 2049: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2049 में शनि 6 मार्च को मकर में, गुरु (बृहस्पति) 3 अप्रैल को मिथुन में, शनि 10 जुलाई को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 27 अगस्त को कर्क में, शनि 4 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सुवा के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।
1 जनवरी 2049 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2048 से, 14 जनवरी 2049 तक
- चन्द्रतुला में30 दिसंबर 2048 से, 1 जनवरी 2049 तक
- मंगलकुम्भ में6 दिसंबर 2048 से, 15 जनवरी 2049 तक
- बुधमकर में26 दिसंबर 2048 से, 10 जनवरी 2049 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीवृषभ में28 दिसंबर 2048 से, 3 अप्रैल 2049 तक
- शुक्रकुम्भ में28 दिसंबर 2048 से, 30 जनवरी 2049 तक
- शनिधनु में8 दिसंबर 2046 से, 6 मार्च 2049 तक
- राहुवृश्चिक में18 अगस्त 2048 से, 7 मार्च 2050 तक
- केतुवृषभ में18 अगस्त 2048 से, 7 मार्च 2050 तक
2049 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सुवा के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2049
3 जनवरीसुबह 11:14
बुध मकर 4°59′ पर वक्री
6 जनवरीशाम 7:41
बुध अस्त (18 जनवरी तक)†
10 जनवरीशाम 6:22
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जनवरीशाम 6:55
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीदोपहर 2:36
मंगल का मीन में प्रवेश
18 जनवरीरात 12:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जनवरीशाम 6:19
बुध धनु 18°49′ पर मार्गी
25 जनवरीसुबह 9:06
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जनवरीरात 8:09
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2049
8 फ़रवरीसुबह 11:40
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 7:54
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
14 फ़रवरीदोपहर 12:40
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 26°25′ पर मार्गी
23 फ़रवरीसुबह 8:41
शुक्र मीन 9°20′ पर वक्री
25 फ़रवरीदोपहर 2:28
मंगल का मेष में प्रवेश
मार्च 2049
1 मार्चरात 8:04
बुध का कुम्भ में प्रवेश
5 मार्चरात 11:03
बुध अस्त (5 अप्रैल तक)†
6 मार्चरात 8:39
शनि का मकर में प्रवेश
11 मार्चसुबह 10:22
शुक्र अस्त (21 मार्च तक)†
15 मार्चसुबह 4:47
सूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्चसुबह 7:04
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
18 मार्चरात 9:13
बुध का मीन में प्रवेश
21 मार्चसुबह 9:03
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2049
2 अप्रैलरात 9:08
बुध का मेष में प्रवेश
3 अप्रैलशाम 6:43
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
5 अप्रैलदोपहर 2:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अप्रैलसुबह 6:38
शुक्र कुम्भ 23°12′ पर मार्गी
9 अप्रैलरात 12:32
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 अप्रैलदोपहर 1:16
सूर्य का मेष में प्रवेश
26 अप्रैलसुबह 10:10
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 अप्रैलसुबह 6:19
बुध मेष 27°07′ पर वक्री
29 अप्रैलशाम 6:23
बुध अस्त (16 मई तक)†
मई 2049
6 मईरात 8:38
शनि मकर 2°52′ पर वक्री
15 मईसुबह 10:05
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मईरात 1:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 मईरात 1:57
बुध मेष 17°43′ पर मार्गी
23 मईसुबह 4:21
मंगल का मिथुन में प्रवेश
31 मईशाम 7:30
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2049
8 जूनरात 9:51
बुध का वृषभ में प्रवेश
10 जूनशाम 7:04
मंगल अस्त (25 सितंबर तक)†
15 जूनशाम 4:36
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जूनशाम 7:05
गुरु (बृहस्पति) अस्त (20 जुलाई तक)†
23 जूनरात 11:05
बुध अस्त (18 जुलाई तक)†
27 जूनरात 12:34
बुध का मिथुन में प्रवेश
29 जूनरात 2:33
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2049
7 जुलाईरात 9:53
मंगल का कर्क में प्रवेश
10 जुलाईसुबह 10:42
शनि का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
11 जुलाईरात 12:59
बुध का कर्क में प्रवेश
17 जुलाईरात 3:24
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईरात 11:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 जुलाईरात 12:27
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जुलाईदोपहर 2:00
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
27 जुलाईरात 3:14
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2049
17 अगस्तसुबह 11:46
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 2:46
शुक्र का कर्क में प्रवेश
21 अगस्तरात 2:17
बुध का कन्या में प्रवेश
23 अगस्तशाम 4:49
मंगल का सिंह में प्रवेश
27 अगस्तशाम 6:25
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
29 अगस्तसुबह 7:20
बुध कन्या 2°52′ पर वक्री
सितंबर 2049
5 सितंबरसुबह 10:45
बुध अस्त (18 सितंबर तक)†
5 सितंबररात 8:30
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
13 सितंबररात 11:46
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 11:44
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरशाम 4:49
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 सितंबररात 2:09
बुध सिंह 18°44′ पर मार्गी
25 सितंबरसुबह 4:07
शनि धनु 26°13′ पर मार्गी
25 सितंबरदोपहर 1:29
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2049
3 अक्टूबरशाम 6:08
बुध का कन्या में प्रवेश
6 अक्टूबररात 9:09
बुध अस्त (20 नवंबर तक)†
8 अक्टूबरसुबह 9:17
शुक्र का कन्या में प्रवेश
9 अक्टूबररात 9:45
मंगल का कन्या में प्रवेश
17 अक्टूबररात 11:46
सूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टूबरसुबह 8:10
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2049
1 नवंबरसुबह 11:17
शुक्र का तुला में प्रवेश
8 नवंबरशाम 7:41
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबररात 11:40
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नवंबरसुबह 5:20
शुक्र अस्त (10 फ़रवरी तक)†
20 नवंबररात 12:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 नवंबररात 12:24
गुरु (बृहस्पति) कर्क 9°49′ पर वक्री
25 नवंबरसुबह 9:16
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबररात 2:19
मंगल का तुला में प्रवेश
28 नवंबररात 9:05
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2049
4 दिसंबरदोपहर 12:21
शनि का मकर में प्रवेश
16 दिसंबरदोपहर 2:23
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरसुबह 8:58
बुध धनु 19°04′ पर वक्री
19 दिसंबरसुबह 5:38
शुक्र का धनु में प्रवेश
22 दिसंबरसुबह 4:28
बुध अस्त (2 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
