पंचांग · गोचर
गोचर 2049: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2049 में शनि 6 मार्च को मकर में, गुरु (बृहस्पति) 3 अप्रैल को मिथुन में, शनि 9 जुलाई को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 27 अगस्त को कर्क में, शनि 3 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।
1 जनवरी 2049 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2048 से, 14 जनवरी 2049 तक
- चन्द्रवृश्चिक में31 दिसंबर 2048 से, 2 जनवरी 2049 तक
- मंगलकुम्भ में5 दिसंबर 2048 से, 14 जनवरी 2049 तक
- बुधमकर में25 दिसंबर 2048 से, 10 जनवरी 2049 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीवृषभ में27 दिसंबर 2048 से, 3 अप्रैल 2049 तक
- शुक्रकुम्भ में28 दिसंबर 2048 से, 30 जनवरी 2049 तक
- शनिधनु में7 दिसंबर 2046 से, 6 मार्च 2049 तक
- राहुवृश्चिक में17 अगस्त 2048 से, 6 मार्च 2050 तक
- केतुवृषभ में17 अगस्त 2048 से, 6 मार्च 2050 तक
2049 का गोचर कैलेंडर
सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2049
2 जनवरीशाम 6:14
बुध मकर 4°59′ पर वक्री
6 जनवरीरात 2:41
बुध अस्त (17 जनवरी तक)†
10 जनवरीरात 1:22
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
14 जनवरीरात 1:55
सूर्य का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 9:36
मंगल का मीन में प्रवेश
17 जनवरीसुबह 7:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जनवरीरात 1:19
बुध धनु 18°49′ पर मार्गी
24 जनवरीशाम 4:06
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जनवरीरात 3:09
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2049
7 फ़रवरीशाम 6:40
बुध का मकर में प्रवेश
12 फ़रवरीदोपहर 2:54
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीशाम 7:40
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 26°25′ पर मार्गी
22 फ़रवरीदोपहर 3:41
शुक्र मीन 9°20′ पर वक्री
24 फ़रवरीरात 9:28
मंगल का मेष में प्रवेश
मार्च 2049
1 मार्चरात 3:04
बुध का कुम्भ में प्रवेश
5 मार्चसुबह 6:03
बुध अस्त (4 अप्रैल तक)†
6 मार्चरात 3:39
शनि का मकर में प्रवेश
10 मार्चशाम 5:22
शुक्र अस्त (20 मार्च तक)†
14 मार्चदोपहर 12:47
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चदोपहर 3:04
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
18 मार्चसुबह 5:13
बुध का मीन में प्रवेश
20 मार्चशाम 5:03
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2049
2 अप्रैलसुबह 5:08
बुध का मेष में प्रवेश
3 अप्रैलरात 2:43
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
4 अप्रैलरात 10:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 अप्रैलदोपहर 2:38
शुक्र कुम्भ 23°12′ पर मार्गी
8 अप्रैलसुबह 8:32
मंगल का वृषभ में प्रवेश
13 अप्रैलरात 9:16
सूर्य का मेष में प्रवेश
25 अप्रैलशाम 6:10
शुक्र का मीन में प्रवेश
26 अप्रैलदोपहर 2:19
बुध मेष 27°07′ पर वक्री
29 अप्रैलरात 2:23
बुध अस्त (15 मई तक)†
मई 2049
6 मईसुबह 4:38
शनि मकर 2°52′ पर वक्री
14 मईशाम 6:05
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईसुबह 9:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 मईसुबह 9:57
बुध मेष 17°43′ पर मार्गी
22 मईदोपहर 12:21
मंगल का मिथुन में प्रवेश
31 मईरात 3:30
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2049
8 जूनसुबह 5:51
बुध का वृषभ में प्रवेश
10 जूनरात 3:04
मंगल अस्त (24 सितंबर तक)†
15 जूनरात 12:36
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जूनरात 3:05
गुरु (बृहस्पति) अस्त (19 जुलाई तक)†
23 जूनसुबह 7:05
बुध अस्त (18 जुलाई तक)†
26 जूनसुबह 8:34
बुध का मिथुन में प्रवेश
28 जूनसुबह 10:33
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2049
7 जुलाईसुबह 5:53
मंगल का कर्क में प्रवेश
9 जुलाईशाम 6:42
शनि का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
10 जुलाईसुबह 8:59
बुध का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 11:24
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईसुबह 7:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
19 जुलाईसुबह 8:27
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जुलाईरात 10:00
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
26 जुलाईसुबह 11:14
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2049
16 अगस्तशाम 7:46
सूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अगस्तसुबह 10:46
शुक्र का कर्क में प्रवेश
20 अगस्तसुबह 10:17
बुध का कन्या में प्रवेश
23 अगस्तरात 12:49
मंगल का सिंह में प्रवेश
27 अगस्तरात 2:25
गुरु (बृहस्पति) का कर्क में प्रवेश
28 अगस्तदोपहर 3:20
बुध कन्या 2°52′ पर वक्री
सितंबर 2049
4 सितंबरशाम 6:45
बुध अस्त (18 सितंबर तक)†
5 सितंबरसुबह 4:30
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
13 सितंबरसुबह 7:46
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 सितंबरशाम 7:44
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबररात 12:49
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 सितंबरसुबह 10:09
बुध सिंह 18°44′ पर मार्गी
24 सितंबरदोपहर 12:07
शनि धनु 26°13′ पर मार्गी
24 सितंबररात 9:29
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2049
3 अक्टूबररात 2:08
बुध का कन्या में प्रवेश
6 अक्टूबरसुबह 5:09
बुध अस्त (19 नवंबर तक)†
7 अक्टूबरशाम 5:17
शुक्र का कन्या में प्रवेश
9 अक्टूबरसुबह 5:45
मंगल का कन्या में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 7:46
सूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टूबरशाम 4:10
बुध का तुला में प्रवेश
31 अक्टूबरशाम 7:17
शुक्र का तुला में प्रवेश
नवंबर 2049
8 नवंबररात 2:41
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 6:40
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरदोपहर 12:20
शुक्र अस्त (9 फ़रवरी तक)†
19 नवंबरसुबह 7:15
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 नवंबरसुबह 7:24
गुरु (बृहस्पति) कर्क 9°49′ पर वक्री
24 नवंबरशाम 4:16
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
25 नवंबरसुबह 9:19
मंगल का तुला में प्रवेश
28 नवंबरसुबह 4:05
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2049
3 दिसंबरशाम 7:21
शनि का मकर में प्रवेश
15 दिसंबररात 9:23
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबरदोपहर 3:58
बुध धनु 19°04′ पर वक्री
18 दिसंबरदोपहर 12:38
शुक्र का धनु में प्रवेश
21 दिसंबरसुबह 11:28
बुध अस्त (1 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
