मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

1978 में बुध का गोचर

1978 में बुध 16 बार राशि बदलता है: 7 जनवरी को धनु, 31 जनवरी को मकर, 19 फ़रवरी को कुम्भ, 7 मार्च को मीन …। वक्री: 1 अप्रैल, 5 अगस्त, 26 नवंबर से।

1978 में बुध किन राशियों में है

  1. वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)26 दिसंबर, शाम 7:06 1977 → 7 जनवरी, सुबह 5:40 1978· 11 दिन
  2. धनु7 जनवरी, सुबह 5:40 1978 → 31 जनवरी, दोपहर 3:15 1978· 24 दिन
  3. मकर31 जनवरी, दोपहर 3:15 1978 → 19 फ़रवरी, सुबह 6:11 1978· 19 दिन
  4. कुम्भ19 फ़रवरी, सुबह 6:11 1978 → 7 मार्च, सुबह 9:31 1978· 16 दिन
  5. मीन7 मार्च, सुबह 9:31 1978 → 26 मार्च, सुबह 10:12 1978· 19 दिन
  6. मेष26 मार्च, सुबह 10:12 1978 → 8 अप्रैल, रात 11:21 1978· 14 दिन
  7. मीन(वक्री गति से प्रवेश)8 अप्रैल, रात 11:21 1978 → 11 मई, रात 12:00 1978· 32 दिन
  8. मेष11 मई, रात 12:00 1978 → 31 मई, दोपहर 12:31 1978· 21 दिन
  9. वृषभ31 मई, दोपहर 12:31 1978 → 14 जून, रात 10:37 1978· 14 दिन
  10. मिथुन14 जून, रात 10:37 1978 → 29 जून, दोपहर 12:40 1978· 15 दिन
  11. कर्क29 जून, दोपहर 12:40 1978 → 20 जुलाई, रात 12:53 1978· 21 दिन
  12. सिंह20 जुलाई, रात 12:53 1978 → 21 अगस्त, सुबह 11:17 1978· 32 दिन
  13. कर्क(वक्री गति से प्रवेश)21 अगस्त, सुबह 11:17 1978 → 4 सितंबर, शाम 5:39 1978· 14 दिन
  14. सिंह4 सितंबर, शाम 5:39 1978 → 23 सितंबर, सुबह 10:13 1978· 19 दिन
  15. कन्या23 सितंबर, सुबह 10:13 1978 → 10 अक्टूबर, सुबह 11:38 1978· 17 दिन
  16. तुला10 अक्टूबर, सुबह 11:38 1978 → 29 अक्टूबर, रात 11:40 1978· 20 दिन
  17. वृश्चिक29 अक्टूबर, रात 11:40 1978 → 4 जनवरी, दोपहर 1:37 1979· लगभग 2 महीने

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 1978

  • 1 जनवरीरात 3:32

    बुध वृश्चिक 27°36′ पर मार्गी

  • 7 जनवरीसुबह 5:40

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 31 जनवरीदोपहर 3:15

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1978

  • 7 फ़रवरीदोपहर 2:31

    बुध अस्त (14 मार्च तक)†

  • 19 फ़रवरीसुबह 6:11

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 1978

  • 7 मार्चसुबह 9:31

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 8:21

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 मार्चसुबह 10:12

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 1978

  • 1 अप्रैलरात 9:46

    बुध मेष 2°35′ पर वक्री

  • 4 अप्रैलसुबह 4:35

    बुध अस्त (19 अप्रैल तक)†

  • 8 अप्रैलरात 11:21

    बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 19 अप्रैलरात 3:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 अप्रैलदोपहर 12:18

    बुध मीन 21°18′ पर मार्गी

मई 1978

  • 11 मईरात 12:00

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 31 मईदोपहर 12:31

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 1978

  • 2 जूनदोपहर 1:32

    बुध अस्त (26 जून तक)†

  • 14 जूनरात 10:37

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 26 जूनरात 11:38

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जूनदोपहर 12:40

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1978

  • 20 जुलाईरात 12:53

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 1978

  • 5 अगस्तसुबह 4:36

    बुध सिंह 9°28′ पर वक्री

  • 12 अगस्तरात 3:54

    बुध अस्त (26 अगस्त तक)†

  • 21 अगस्तसुबह 11:17

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 अगस्तदोपहर 12:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 अगस्तरात 9:11

    बुध कर्क 26°47′ पर मार्गी

सितंबर 1978

  • 4 सितंबरशाम 5:39

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 14 सितंबरसुबह 8:01

    बुध अस्त (22 अक्टूबर तक)†

  • 23 सितंबरसुबह 10:13

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 1978

  • 10 अक्टूबरसुबह 11:38

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 22 अक्टूबरसुबह 11:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अक्टूबररात 11:40

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 1978

  • 26 नवंबररात 3:11

    बुध वृश्चिक 28°04′ पर वक्री

  • 30 नवंबरदोपहर 3:38

    बुध अस्त (11 दिसंबर तक)†

दिसंबर 1978

  • 11 दिसंबरदोपहर 3:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 दिसंबररात 9:26

    बुध वृश्चिक 11°48′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1978: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और