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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

1998 में बुध का गोचर

1998 में बुध 14 बार राशि बदलता है: 7 जनवरी को धनु, 29 जनवरी को मकर, 17 फ़रवरी को कुम्भ, 5 मार्च को मीन …। वक्री: 28 मार्च, 31 जुलाई, 21 नवंबर से।

सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

1998 में बुध किन राशियों में है

  1. वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)18 दिसंबर, शाम 5:16 1997 → 7 जनवरी, दोपहर 1:52 1998· 20 दिन
  2. धनु7 जनवरी, दोपहर 1:52 1998 → 29 जनवरी, रात 9:07 1998· 22 दिन
  3. मकर29 जनवरी, रात 9:07 1998 → 17 फ़रवरी, सुबह 5:12 1998· 18 दिन
  4. कुम्भ17 फ़रवरी, सुबह 5:12 1998 → 5 मार्च, सुबह 7:36 1998· 16 दिन
  5. मीन5 मार्च, सुबह 7:36 1998 → 10 मई, शाम 4:35 1998· लगभग 2 महीने
  6. मेष10 मई, शाम 4:35 1998 → 29 मई, सुबह 11:35 1998· 19 दिन
  7. वृषभ29 मई, सुबह 11:35 1998 → 12 जून, दोपहर 3:07 1998· 14 दिन
  8. मिथुन12 जून, दोपहर 3:07 1998 → 27 जून, दोपहर 2:01 1998· 15 दिन
  9. कर्क27 जून, दोपहर 2:01 1998 → 20 जुलाई, दोपहर 2:27 1998· 23 दिन
  10. सिंह20 जुलाई, दोपहर 2:27 1998 → 10 अगस्त, शाम 6:02 1998· 21 दिन
  11. कर्क(वक्री गति से प्रवेश)10 अगस्त, शाम 6:02 1998 → 4 सितंबर, सुबह 6:10 1998· 25 दिन
  12. सिंह4 सितंबर, सुबह 6:10 1998 → 21 सितंबर, सुबह 7:41 1998· 17 दिन
  13. कन्या21 सितंबर, सुबह 7:41 1998 → 8 अक्टूबर, दोपहर 12:06 1998· 17 दिन
  14. तुला8 अक्टूबर, दोपहर 12:06 1998 → 28 अक्टूबर, सुबह 8:57 1998· 20 दिन
  15. वृश्चिक28 अक्टूबर, सुबह 8:57 1998 → 3 जनवरी, रात 1:31 1999· लगभग 2 महीने

तारीखवार

सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

जनवरी 1998

  • 7 जनवरीदोपहर 1:52

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 29 जनवरीरात 9:07

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1998

  • 2 फ़रवरीरात 2:26

    बुध अस्त (10 मार्च तक)†

  • 17 फ़रवरीसुबह 5:12

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 1998

  • 5 मार्चसुबह 7:36

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 10 मार्चदोपहर 12:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मार्चरात 1:26

    बुध मीन 27°40′ पर वक्री

  • 30 मार्चसुबह 7:58

    बुध अस्त (13 अप्रैल तक)†

अप्रैल 1998

  • 13 अप्रैलरात 11:59

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 अप्रैलदोपहर 1:16

    बुध मीन 15°58′ पर मार्गी

मई 1998

  • 10 मईशाम 4:35

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 29 मईसुबह 7:51

    बुध अस्त (22 जून तक)†

  • 29 मईसुबह 11:35

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 1998

  • 12 जूनदोपहर 3:07

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 22 जूनशाम 5:22

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 जूनदोपहर 2:01

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1998

  • 20 जुलाईदोपहर 2:27

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 31 जुलाईसुबह 8:12

    बुध सिंह 4°26′ पर वक्री

अगस्त 1998

  • 7 अगस्तसुबह 4:37

    बुध अस्त (21 अगस्त तक)†

  • 10 अगस्तशाम 6:02

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 21 अगस्तशाम 7:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 अगस्तसुबह 4:20

    बुध कर्क 22°08′ पर मार्गी

सितंबर 1998

  • 4 सितंबरसुबह 6:10

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 10 सितंबररात 12:01

    बुध अस्त (16 अक्टूबर तक)†

  • 21 सितंबरसुबह 7:41

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 1998

  • 8 अक्टूबरदोपहर 12:06

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 16 अक्टूबररात 10:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 अक्टूबरसुबह 8:57

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 1998

  • 21 नवंबरशाम 5:30

    बुध वृश्चिक 23°43′ पर वक्री

  • 26 नवंबरसुबह 9:47

    बुध अस्त (7 दिसंबर तक)†

दिसंबर 1998

  • 7 दिसंबरसुबह 9:53

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 दिसंबरदोपहर 12:14

    बुध वृश्चिक 7°28′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1998: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और