पंचांग · गोचर · बुध
1998 में बुध का गोचर
1998 में बुध 14 बार राशि बदलता है: 7 जनवरी को धनु, 29 जनवरी को मकर, 16 फ़रवरी को कुम्भ, 4 मार्च को मीन …। वक्री: 27 मार्च, 30 जुलाई, 21 नवंबर से।
सभी समय डैलस के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1998 में बुध किन राशियों में है
- वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)18 दिसंबर, सुबह 5:31 1997 → 7 जनवरी, रात 2:07 1998· 20 दिन
- धनु7 जनवरी, रात 2:07 1998 → 29 जनवरी, सुबह 9:22 1998· 22 दिन
- मकर29 जनवरी, सुबह 9:22 1998 → 16 फ़रवरी, शाम 5:27 1998· 18 दिन
- कुम्भ16 फ़रवरी, शाम 5:27 1998 → 4 मार्च, शाम 7:51 1998· 16 दिन
- मीन4 मार्च, शाम 7:51 1998 → 10 मई, सुबह 5:50 1998· लगभग 2 महीने
- मेष10 मई, सुबह 5:50 1998 → 29 मई, रात 12:50 1998· 19 दिन
- वृषभ29 मई, रात 12:50 1998 → 12 जून, सुबह 4:22 1998· 14 दिन
- मिथुन12 जून, सुबह 4:22 1998 → 27 जून, रात 3:16 1998· 15 दिन
- कर्क27 जून, रात 3:16 1998 → 20 जुलाई, रात 3:42 1998· 23 दिन
- सिंह20 जुलाई, रात 3:42 1998 → 10 अगस्त, सुबह 7:17 1998· 21 दिन
- कर्क(वक्री गति से प्रवेश)10 अगस्त, सुबह 7:17 1998 → 3 सितंबर, शाम 7:25 1998· 25 दिन
- सिंह3 सितंबर, शाम 7:25 1998 → 20 सितंबर, रात 8:56 1998· 17 दिन
- कन्या20 सितंबर, रात 8:56 1998 → 8 अक्टूबर, रात 1:21 1998· 17 दिन
- तुला8 अक्टूबर, रात 1:21 1998 → 27 अक्टूबर, रात 9:12 1998· 20 दिन
- वृश्चिक27 अक्टूबर, रात 9:12 1998 → 2 जनवरी, दोपहर 1:46 1999· लगभग 2 महीने
तारीखवार
सभी समय डैलस के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
जनवरी 1998
7 जनवरीरात 2:07
बुध का धनु में प्रवेश
29 जनवरीसुबह 9:22
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 1998
1 फ़रवरीदोपहर 2:41
बुध अस्त (10 मार्च तक)†
16 फ़रवरीशाम 5:27
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 1998
4 मार्चशाम 7:51
बुध का मीन में प्रवेश
10 मार्चरात 12:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मार्चदोपहर 1:41
बुध मीन 27°40′ पर वक्री
29 मार्चरात 8:13
बुध अस्त (13 अप्रैल तक)†
अप्रैल 1998
13 अप्रैलदोपहर 1:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 अप्रैलरात 2:31
बुध मीन 15°58′ पर मार्गी
मई 1998
10 मईसुबह 5:50
बुध का मेष में प्रवेश
28 मईरात 9:06
बुध अस्त (22 जून तक)†
29 मईरात 12:50
बुध का वृषभ में प्रवेश
जून 1998
12 जूनसुबह 4:22
बुध का मिथुन में प्रवेश
22 जूनसुबह 6:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 जूनरात 3:16
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 1998
20 जुलाईरात 3:42
बुध का सिंह में प्रवेश
30 जुलाईरात 9:27
बुध सिंह 4°26′ पर वक्री
अगस्त 1998
6 अगस्तशाम 5:52
बुध अस्त (21 अगस्त तक)†
10 अगस्तसुबह 7:17
बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
21 अगस्तसुबह 8:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अगस्तशाम 5:35
बुध कर्क 22°08′ पर मार्गी
सितंबर 1998
3 सितंबरशाम 7:25
बुध का सिंह में प्रवेश
9 सितंबरदोपहर 1:16
बुध अस्त (16 अक्टूबर तक)†
20 सितंबररात 8:56
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 1998
8 अक्टूबररात 1:21
बुध का तुला में प्रवेश
16 अक्टूबरसुबह 11:50
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अक्टूबररात 9:12
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 1998
21 नवंबरसुबह 5:45
बुध वृश्चिक 23°43′ पर वक्री
25 नवंबररात 10:02
बुध अस्त (6 दिसंबर तक)†
दिसंबर 1998
6 दिसंबररात 10:08
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 दिसंबररात 12:29
बुध वृश्चिक 7°28′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1998: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
