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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2003 में बुध का गोचर

2003 में बुध 15 बार राशि बदलता है: 9 जनवरी को धनु (वक्री, पीछे की ओर), 8 फ़रवरी को मकर, 1 मार्च को कुम्भ, 18 मार्च को मीन …। वक्री: 2 जनवरी, 26 अप्रैल, 28 अगस्त, 17 दिसंबर से।

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

2003 में बुध किन राशियों में है

  1. मकर26 दिसंबर, रात 1:29 2002 → 9 जनवरी, शाम 5:27 2003· 15 दिन
  2. धनु(वक्री गति से प्रवेश)9 जनवरी, शाम 5:27 2003 → 8 फ़रवरी, रात 2:44 2003· 29 दिन
  3. मकर8 फ़रवरी, रात 2:44 2003 → 1 मार्च, सुबह 8:47 2003· 21 दिन
  4. कुम्भ1 मार्च, सुबह 8:47 2003 → 18 मार्च, सुबह 9:13 2003· 17 दिन
  5. मीन18 मार्च, सुबह 9:13 2003 → 2 अप्रैल, सुबह 10:16 2003· 15 दिन
  6. मेष2 अप्रैल, सुबह 10:16 2003 → 8 जून, दोपहर 2:12 2003· लगभग 2 महीने
  7. वृषभ8 जून, दोपहर 2:12 2003 → 26 जून, दोपहर 1:29 2003· 18 दिन
  8. मिथुन26 जून, दोपहर 1:29 2003 → 10 जुलाई, दोपहर 1:46 2003· 14 दिन
  9. कर्क10 जुलाई, दोपहर 1:46 2003 → 26 जुलाई, शाम 5:12 2003· 16 दिन
  10. सिंह26 जुलाई, शाम 5:12 2003 → 21 अगस्त, रात 2:33 2003· 25 दिन
  11. कन्या21 अगस्त, रात 2:33 2003 → 4 सितंबर, दोपहर 1:10 2003· 14 दिन
  12. सिंह(वक्री गति से प्रवेश)4 सितंबर, दोपहर 1:10 2003 → 3 अक्टूबर, सुबह 8:38 2003· 29 दिन
  13. कन्या3 अक्टूबर, सुबह 8:38 2003 → 20 अक्टूबर, रात 9:37 2003· 18 दिन
  14. तुला20 अक्टूबर, रात 9:37 2003 → 8 नवंबर, सुबह 8:26 2003· 18 दिन
  15. वृश्चिक8 नवंबर, सुबह 8:26 2003 → 28 नवंबर, सुबह 10:38 2003· 20 दिन
  16. धनु28 नवंबर, सुबह 10:38 2003 → 3 फ़रवरी, रात 1:11 2004· लगभग 2 महीने

तारीखवार

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

जनवरी 2003

  • 2 जनवरीशाम 6:18

    बुध मकर 4°34′ पर वक्री

  • 6 जनवरीरात 2:58

    बुध अस्त (17 जनवरी तक)†

  • 9 जनवरीशाम 5:27

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 जनवरीसुबह 7:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 जनवरीरात 1:08

    बुध धनु 18°24′ पर मार्गी

फ़रवरी 2003

  • 8 फ़रवरीरात 2:44

    बुध का मकर में प्रवेश

मार्च 2003

  • 1 मार्चसुबह 8:47

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 मार्चसुबह 4:57

    बुध अस्त (4 अप्रैल तक)†

  • 18 मार्चसुबह 9:13

    बुध का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2003

  • 2 अप्रैलसुबह 10:16

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 4 अप्रैलरात 10:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 अप्रैलदोपहर 12:58

    बुध मेष 26°39′ पर वक्री

  • 29 अप्रैलरात 12:52

    बुध अस्त (15 मई तक)†

मई 2003

  • 15 मईसुबह 7:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 मईसुबह 8:33

    बुध मेष 17°13′ पर मार्गी

जून 2003

  • 8 जूनदोपहर 2:12

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 7:25

    बुध अस्त (18 जुलाई तक)†

  • 26 जूनदोपहर 1:29

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2003

  • 10 जुलाईदोपहर 1:46

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईसुबह 7:24

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जुलाईशाम 5:12

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2003

  • 21 अगस्तरात 2:33

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 28 अगस्तदोपहर 2:40

    बुध कन्या 2°25′ पर वक्री

सितंबर 2003

  • 4 सितंबरदोपहर 1:10

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 4 सितंबरशाम 6:07

    बुध अस्त (18 सितंबर तक)†

  • 18 सितंबररात 12:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 सितंबरसुबह 9:52

    बुध सिंह 18°18′ पर मार्गी

अक्टूबर 2003

  • 3 अक्टूबरसुबह 8:38

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 6 अक्टूबरसुबह 4:48

    बुध अस्त (19 नवंबर तक)†

  • 20 अक्टूबररात 9:37

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 2003

  • 8 नवंबरसुबह 8:26

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरसुबह 4:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 नवंबरसुबह 10:38

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2003

  • 17 दिसंबरशाम 4:00

    बुध धनु 18°39′ पर वक्री

  • 21 दिसंबरसुबह 11:44

    बुध अस्त (1 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2003: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और