पंचांग · गोचर · बुध
2004 में बुध का गोचर
2004 में बुध 15 बार राशि बदलता है: 3 फ़रवरी को मकर, 22 फ़रवरी को कुम्भ, 9 मार्च को मीन, 26 मार्च को मेष …। वक्री: 6 अप्रैल, 10 अगस्त, 30 नवंबर से।
सभी समय जोहान्सबर्ग के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
2004 में बुध किन राशियों में है
- धनु28 नवंबर, दोपहर 12:38 2003 → 3 फ़रवरी, रात 3:11 2004· लगभग 2 महीने
- मकर3 फ़रवरी, रात 3:11 2004 → 22 फ़रवरी, रात 3:14 2004· 19 दिन
- कुम्भ22 फ़रवरी, रात 3:14 2004 → 9 मार्च, सुबह 9:14 2004· 16 दिन
- मीन9 मार्च, सुबह 9:14 2004 → 26 मार्च, रात 3:42 2004· 17 दिन
- मेष26 मार्च, रात 3:42 2004 → 22 अप्रैल, रात 2:52 2004· 27 दिन
- मीन(वक्री गति से प्रवेश)22 अप्रैल, रात 2:52 2004 → 9 मई, रात 3:50 2004· 17 दिन
- मेष9 मई, रात 3:50 2004 → 2 जून, सुबह 6:55 2004· 24 दिन
- वृषभ2 जून, सुबह 6:55 2004 → 17 जून, रात 3:19 2004· 15 दिन
- मिथुन17 जून, रात 3:19 2004 → 1 जुलाई, सुबह 10:13 2004· 14 दिन
- कर्क1 जुलाई, सुबह 10:13 2004 → 20 जुलाई, सुबह 7:49 2004· 19 दिन
- सिंह20 जुलाई, सुबह 7:49 2004 → 25 सितंबर, सुबह 8:34 2004· लगभग 2 महीने
- कन्या25 सितंबर, सुबह 8:34 2004 → 12 अक्टूबर, सुबह 8:11 2004· 17 दिन
- तुला12 अक्टूबर, सुबह 8:11 2004 → 31 अक्टूबर, दोपहर 12:23 2004· 19 दिन
- वृश्चिक31 अक्टूबर, दोपहर 12:23 2004 → 24 नवंबर, सुबह 5:01 2004· 24 दिन
- धनु24 नवंबर, सुबह 5:01 2004 → 6 दिसंबर, सुबह 4:52 2004· 12 दिन
- वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)6 दिसंबर, सुबह 4:52 2004 → 5 जनवरी, शाम 4:11 2005· 30 दिन
तारीखवार
सभी समय जोहान्सबर्ग के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
जनवरी 2004
1 जनवरीदोपहर 1:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 जनवरीदोपहर 3:44
बुध धनु 2°22′ पर मार्गी
फ़रवरी 2004
3 फ़रवरीरात 3:11
बुध का मकर में प्रवेश
14 फ़रवरीरात 3:54
बुध अस्त (19 मार्च तक)†
22 फ़रवरीरात 3:14
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2004
9 मार्चसुबह 9:14
बुध का मीन में प्रवेश
19 मार्चसुबह 5:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मार्चरात 3:42
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2004
6 अप्रैलरात 10:26
बुध मेष 8°01′ पर वक्री
9 अप्रैलसुबह 5:52
बुध अस्त (24 अप्रैल तक)†
22 अप्रैलरात 2:52
बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
24 अप्रैलदोपहर 12:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अप्रैलदोपहर 3:05
बुध मीन 27°12′ पर मार्गी
मई 2004
9 मईरात 3:50
बुध का मेष में प्रवेश
जून 2004
2 जूनसुबह 6:55
बुध का वृषभ में प्रवेश
6 जूनरात 8:20
बुध अस्त (1 जुलाई तक)†
17 जूनरात 3:19
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2004
1 जुलाईसुबह 7:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
1 जुलाईसुबह 10:13
बुध का कर्क में प्रवेश
20 जुलाईसुबह 7:49
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2004
10 अगस्तरात 2:32
बुध सिंह 14°52′ पर वक्री
17 अगस्तसुबह 4:16
बुध अस्त (31 अगस्त तक)†
31 अगस्तसुबह 6:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
सितंबर 2004
2 सितंबरदोपहर 3:09
बुध सिंह 1°49′ पर मार्गी
18 सितंबरशाम 6:26
बुध अस्त (28 अक्टूबर तक)†
25 सितंबरसुबह 8:34
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2004
12 अक्टूबरसुबह 8:11
बुध का तुला में प्रवेश
28 अक्टूबरसुबह 6:52
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अक्टूबरदोपहर 12:23
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2004
24 नवंबरसुबह 5:01
बुध का धनु में प्रवेश
30 नवंबरदोपहर 2:16
बुध धनु 2°49′ पर वक्री
दिसंबर 2004
4 दिसंबररात 10:44
बुध अस्त (15 दिसंबर तक)†
6 दिसंबरसुबह 4:52
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
15 दिसंबररात 9:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 दिसंबरसुबह 8:29
बुध वृश्चिक 16°32′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2004: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
