पंचांग · गोचर · बुध
2010 में बुध का गोचर
2010 में बुध 13 बार राशि बदलता है: 5 फ़रवरी को मकर, 25 फ़रवरी को कुम्भ, 14 मार्च को मीन, 29 मार्च को मेष …। वक्री: 17 अप्रैल, 20 अगस्त, 10 दिसंबर से।
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
2010 में बुध किन राशियों में है
- धनु1 दिसंबर, सुबह 8:25 2009 → 5 फ़रवरी, दोपहर 3:35 2010· लगभग 2 महीने
- मकर5 फ़रवरी, दोपहर 3:35 2010 → 25 फ़रवरी, शाम 4:09 2010· 20 दिन
- कुम्भ25 फ़रवरी, शाम 4:09 2010 → 14 मार्च, सुबह 8:04 2010· 17 दिन
- मीन14 मार्च, सुबह 8:04 2010 → 29 मार्च, शाम 4:01 2010· 15 दिन
- मेष29 मार्च, शाम 4:01 2010 → 6 जून, सुबह 4:25 2010· लगभग 2 महीने
- वृषभ6 जून, सुबह 4:25 2010 → 22 जून, सुबह 8:54 2010· 16 दिन
- मिथुन22 जून, सुबह 8:54 2010 → 6 जुलाई, सुबह 8:50 2010· 14 दिन
- कर्क6 जुलाई, सुबह 8:50 2010 → 23 जुलाई, सुबह 9:27 2010· 17 दिन
- सिंह23 जुलाई, सुबह 9:27 2010 → 29 सितंबर, रात 10:17 2010· लगभग 2 महीने
- कन्या29 सितंबर, रात 10:17 2010 → 17 अक्टूबर, रात 12:19 2010· 17 दिन
- तुला17 अक्टूबर, रात 12:19 2010 → 4 नवंबर, शाम 5:37 2010· 19 दिन
- वृश्चिक4 नवंबर, शाम 5:37 2010 → 25 नवंबर, दोपहर 2:20 2010· 21 दिन
- धनु25 नवंबर, दोपहर 2:20 2010 → 22 दिसंबर, शाम 6:44 2010· 27 दिन
- वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)22 दिसंबर, शाम 6:44 2010 → 7 जनवरी, सुबह 10:48 2011· 16 दिन
तारीखवार
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
जनवरी 2010
9 जनवरीरात 9:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जनवरीसुबह 8:52
बुध धनु 11°34′ पर मार्गी
फ़रवरी 2010
5 फ़रवरीदोपहर 3:35
बुध का मकर में प्रवेश
24 फ़रवरीदोपहर 1:40
बुध अस्त (28 मार्च तक)†
25 फ़रवरीशाम 4:09
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2010
14 मार्चसुबह 8:04
बुध का मीन में प्रवेश
28 मार्चदोपहर 3:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 मार्चशाम 4:01
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2010
17 अप्रैलरात 9:05
बुध मेष 18°38′ पर वक्री
20 अप्रैलसुबह 6:15
बुध अस्त (6 मई तक)†
मई 2010
6 मईरात 3:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 मईदोपहर 3:27
बुध मेष 8°40′ पर मार्गी
जून 2010
6 जूनसुबह 4:25
बुध का वृषभ में प्रवेश
16 जूनरात 2:10
बुध अस्त (10 जुलाई तक)†
22 जूनसुबह 8:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2010
6 जुलाईसुबह 8:50
बुध का कर्क में प्रवेश
10 जुलाईशाम 7:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जुलाईसुबह 9:27
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2010
20 अगस्तदोपहर 12:57
बुध सिंह 25°04′ पर वक्री
27 अगस्तशाम 4:50
बुध अस्त (10 सितंबर तक)†
सितंबर 2010
10 सितंबरसुबह 7:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 सितंबरशाम 4:09
बुध सिंह 11°22′ पर मार्गी
28 सितंबरसुबह 11:31
बुध अस्त (9 नवंबर तक)†
29 सितंबररात 10:17
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2010
17 अक्टूबररात 12:19
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2010
4 नवंबरशाम 5:37
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
9 नवंबरदोपहर 2:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 नवंबरदोपहर 2:20
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2010
10 दिसंबरसुबह 4:04
बुध धनु 11°56′ पर वक्री
14 दिसंबरसुबह 4:56
बुध अस्त (25 दिसंबर तक)†
22 दिसंबरशाम 6:44
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
25 दिसंबररात 3:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 दिसंबररात 11:20
बुध वृश्चिक 25°37′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2010: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
