पंचांग · गोचर · बुध
2011 में बुध का गोचर
2011 में बुध 16 बार राशि बदलता है: 8 जनवरी को धनु, 31 जनवरी को मकर, 18 फ़रवरी को कुम्भ, 6 मार्च को मीन …। वक्री: 31 मार्च, 3 अगस्त, 24 नवंबर से।
सभी समय पर्थ के स्थानीय समय (Australia/Perth, AWST) में।
2011 में बुध किन राशियों में है
- वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)23 दिसंबर, सुबह 10:44 2010 → 8 जनवरी, रात 2:48 2011· 16 दिन
- धनु8 जनवरी, रात 2:48 2011 → 31 जनवरी, सुबह 8:15 2011· 23 दिन
- मकर31 जनवरी, सुबह 8:15 2011 → 18 फ़रवरी, शाम 7:56 2011· 18 दिन
- कुम्भ18 फ़रवरी, शाम 7:56 2011 → 6 मार्च, रात 10:41 2011· 16 दिन
- मीन6 मार्च, रात 10:41 2011 → 28 मार्च, रात 8:04 2011· 22 दिन
- मेष28 मार्च, रात 8:04 2011 → 2 अप्रैल, दोपहर 3:00 2011· 5 दिन
- मीन(वक्री गति से प्रवेश)2 अप्रैल, दोपहर 3:00 2011 → 11 मई, सुबह 11:05 2011· 39 दिन
- मेष11 मई, सुबह 11:05 2011 → 31 मई, रात 2:30 2011· 20 दिन
- वृषभ31 मई, रात 2:30 2011 → 14 जून, सुबह 9:20 2011· 14 दिन
- मिथुन14 जून, सुबह 9:20 2011 → 29 जून, रात 3:05 2011· 15 दिन
- कर्क29 जून, रात 3:05 2011 → 20 जुलाई, दोपहर 1:59 2011· 21 दिन
- सिंह20 जुलाई, दोपहर 1:59 2011 → 17 अगस्त, रात 3:18 2011· 28 दिन
- कर्क(वक्री गति से प्रवेश)17 अगस्त, रात 3:18 2011 → 5 सितंबर, सुबह 4:45 2011· 19 दिन
- सिंह5 सितंबर, सुबह 4:45 2011 → 22 सितंबर, रात 11:18 2011· 18 दिन
- कन्या22 सितंबर, रात 11:18 2011 → 10 अक्टूबर, रात 1:54 2011· 17 दिन
- तुला10 अक्टूबर, रात 1:54 2011 → 29 अक्टूबर, शाम 5:40 2011· 20 दिन
- वृश्चिक29 अक्टूबर, शाम 5:40 2011 → 4 जनवरी, सुबह 9:33 2012· लगभग 2 महीने
तारीखवार
सभी समय पर्थ के स्थानीय समय (Australia/Perth, AWST) में।
जनवरी 2011
8 जनवरीरात 2:48
बुध का धनु में प्रवेश
31 जनवरीसुबह 8:15
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2011
5 फ़रवरीदोपहर 2:38
बुध अस्त (13 मार्च तक)†
18 फ़रवरीशाम 7:56
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2011
6 मार्चरात 10:41
बुध का मीन में प्रवेश
13 मार्चसुबह 9:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 मार्चरात 8:04
बुध का मेष में प्रवेश
31 मार्चसुबह 4:47
बुध मेष 0°21′ पर वक्री
अप्रैल 2011
2 अप्रैलसुबह 11:25
बुध अस्त (17 अप्रैल तक)†
2 अप्रैलदोपहर 3:00
बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अप्रैलसुबह 7:19
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अप्रैलशाम 6:04
बुध मीन 18°53′ पर मार्गी
मई 2011
11 मईसुबह 11:05
बुध का मेष में प्रवेश
31 मईरात 2:30
बुध का वृषभ में प्रवेश
जून 2011
1 जूनरात 3:30
बुध अस्त (25 जून तक)†
14 जूनसुबह 9:20
बुध का मिथुन में प्रवेश
25 जूनदोपहर 1:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जूनरात 3:05
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 2011
20 जुलाईदोपहर 1:59
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2011
3 अगस्तसुबह 11:49
बुध सिंह 7°11′ पर वक्री
10 अगस्तसुबह 9:51
बुध अस्त (24 अगस्त तक)†
17 अगस्तरात 3:18
बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
24 अगस्तरात 9:32
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अगस्तसुबह 6:03
बुध कर्क 24°41′ पर मार्गी
सितंबर 2011
5 सितंबरसुबह 4:45
बुध का सिंह में प्रवेश
12 सितंबररात 8:43
बुध अस्त (20 अक्टूबर तक)†
22 सितंबररात 11:18
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2011
10 अक्टूबररात 1:54
बुध का तुला में प्रवेश
20 अक्टूबरसुबह 10:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 अक्टूबरशाम 5:40
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2011
24 नवंबरदोपहर 3:19
बुध वृश्चिक 26°06′ पर वक्री
29 नवंबरसुबह 5:30
बुध अस्त (10 दिसंबर तक)†
दिसंबर 2011
10 दिसंबरसुबह 5:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 दिसंबरसुबह 9:43
बुध वृश्चिक 9°50′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2011: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
