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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2012 में बुध का गोचर

2012 में बुध 17 बार राशि बदलता है: 4 जनवरी को धनु, 24 जनवरी को मकर, 10 फ़रवरी को कुम्भ, 27 फ़रवरी को मीन …। वक्री: 12 मार्च, 15 जुलाई, 6 नवंबर से।

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

2012 में बुध किन राशियों में है

  1. वृश्चिक29 अक्टूबर, सुबह 10:40 2011 → 4 जनवरी, रात 1:33 2012· लगभग 2 महीने
  2. धनु4 जनवरी, रात 1:33 2012 → 24 जनवरी, रात 1:17 2012· 20 दिन
  3. मकर24 जनवरी, रात 1:17 2012 → 10 फ़रवरी, शाम 6:33 2012· 18 दिन
  4. कुम्भ10 फ़रवरी, शाम 6:33 2012 → 27 फ़रवरी, सुबह 10:26 2012· 17 दिन
  5. मीन27 फ़रवरी, सुबह 10:26 2012 → 2 अप्रैल, दोपहर 12:29 2012· 35 दिन
  6. कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)2 अप्रैल, दोपहर 12:29 2012 → 6 अप्रैल, सुबह 10:40 2012· 4 दिन
  7. मीन6 अप्रैल, सुबह 10:40 2012 → 5 मई, शाम 4:29 2012· 29 दिन
  8. मेष5 मई, शाम 4:29 2012 → 21 मई, शाम 5:16 2012· 16 दिन
  9. वृषभ21 मई, शाम 5:16 2012 → 4 जून, दोपहर 1:54 2012· 14 दिन
  10. मिथुन4 जून, दोपहर 1:54 2012 → 21 जून, दोपहर 1:58 2012· 17 दिन
  11. कर्क21 जून, दोपहर 1:58 2012 → 29 अगस्त, रात 12:35 2012· लगभग 2 महीने
  12. सिंह29 अगस्त, रात 12:35 2012 → 13 सितंबर, शाम 4:55 2012· 16 दिन
  13. कन्या13 सितंबर, शाम 4:55 2012 → 1 अक्टूबर, दोपहर 1:02 2012· 18 दिन
  14. तुला1 अक्टूबर, दोपहर 1:02 2012 → 23 अक्टूबर, सुबह 10:10 2012· 22 दिन
  15. वृश्चिक23 अक्टूबर, सुबह 10:10 2012 → 18 नवंबर, रात 9:51 2012· 27 दिन
  16. तुला(वक्री गति से प्रवेश)18 नवंबर, रात 9:51 2012 → 6 दिसंबर, रात 3:30 2012· 17 दिन
  17. वृश्चिक6 दिसंबर, रात 3:30 2012 → 27 दिसंबर, शाम 4:28 2012· 22 दिन
  18. धनु27 दिसंबर, शाम 4:28 2012 → 15 जनवरी, शाम 5:10 2013· 19 दिन

तारीखवार

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

जनवरी 2012

  • 4 जनवरीरात 1:33

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 15 जनवरीदोपहर 12:40

    बुध अस्त (24 फ़रवरी तक)†

  • 24 जनवरीरात 1:17

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2012

  • 10 फ़रवरीशाम 6:33

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीशाम 7:13

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 फ़रवरीसुबह 10:26

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 2012

  • 12 मार्चसुबह 7:48

    बुध मीन 12°48′ पर वक्री

  • 14 मार्चदोपहर 3:16

    बुध अस्त (28 मार्च तक)†

  • 28 मार्चसुबह 11:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 2012

  • 2 अप्रैलदोपहर 12:29

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 4 अप्रैलसुबह 11:11

    बुध कुम्भ 29°49′ पर मार्गी

  • 6 अप्रैलसुबह 10:40

    बुध का मीन में प्रवेश

मई 2012

  • 5 मईशाम 4:29

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 15 मईरात 1:39

    बुध अस्त (8 जून तक)†

  • 21 मईशाम 5:16

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 2012

  • 4 जूनदोपहर 1:54

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 8 जूनदोपहर 2:29

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 जूनदोपहर 1:58

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2012

  • 15 जुलाईरात 3:15

    बुध कर्क 18°31′ पर वक्री

  • 21 जुलाईसुबह 9:42

    बुध अस्त (5 अगस्त तक)†

अगस्त 2012

  • 5 अगस्तरात 8:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 अगस्तसुबह 6:40

    बुध कर्क 7°24′ पर मार्गी

  • 26 अगस्तशाम 5:52

    बुध अस्त (29 सितंबर तक)†

  • 29 अगस्तरात 12:35

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2012

  • 13 सितंबरशाम 4:55

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 29 सितंबरसुबह 6:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अक्टूबर 2012

  • 1 अक्टूबरदोपहर 1:02

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरसुबह 10:10

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2012

  • 6 नवंबररात 11:03

    बुध वृश्चिक 10°16′ पर वक्री

  • 12 नवंबररात 3:46

    बुध अस्त (23 नवंबर तक)†

  • 18 नवंबररात 9:51

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 नवंबरसुबह 7:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 नवंबररात 10:47

    बुध तुला 24°08′ पर मार्गी

दिसंबर 2012

  • 6 दिसंबररात 3:30

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 24 दिसंबरसुबह 5:26

    बुध अस्त (7 फ़रवरी तक)†

  • 27 दिसंबरशाम 4:28

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2012: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और