मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2020 में बुध का गोचर

2020 में बुध 12 बार राशि बदलता है: 13 जनवरी को मकर, 30 जनवरी को कुम्भ, 7 अप्रैल को मीन, 24 अप्रैल को मेष …। वक्री: 16 फ़रवरी, 17 जून, 13 अक्टूबर से।

सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।

2020 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु25 दिसंबर, सुबह 4:16 2019 → 13 जनवरी, रात 12:05 2020· 19 दिन
  2. मकर13 जनवरी, रात 12:05 2020 → 30 जनवरी, दोपहर 3:23 2020· 18 दिन
  3. कुम्भ30 जनवरी, दोपहर 3:23 2020 → 7 अप्रैल, रात 3:54 2020· लगभग 2 महीने
  4. मीन7 अप्रैल, रात 3:54 2020 → 24 अप्रैल, शाम 4:05 2020· 18 दिन
  5. मेष24 अप्रैल, शाम 4:05 2020 → 8 मई, रात 11:17 2020· 14 दिन
  6. वृषभ8 मई, रात 11:17 2020 → 24 मई, दोपहर 1:24 2020· 16 दिन
  7. मिथुन24 मई, दोपहर 1:24 2020 → 1 अगस्त, शाम 5:03 2020· लगभग 2 महीने
  8. कर्क1 अगस्त, शाम 5:03 2020 → 16 अगस्त, रात 9:58 2020· 15 दिन
  9. सिंह16 अगस्त, रात 9:58 2020 → 2 सितंबर, रात 1:32 2020· 16 दिन
  10. कन्या2 सितंबर, रात 1:32 2020 → 22 सितंबर, सुबह 6:23 2020· 20 दिन
  11. तुला22 सितंबर, सुबह 6:23 2020 → 27 नवंबर, शाम 7:35 2020· लगभग 2 महीने
  12. वृश्चिक27 नवंबर, शाम 7:35 2020 → 17 दिसंबर, रात 12:08 2020· 19 दिन
  13. धनु17 दिसंबर, रात 12:08 2020 → 4 जनवरी, शाम 4:25 2021· 19 दिन

तारीखवार

सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।

जनवरी 2020

  • 13 जनवरीरात 12:05

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 30 जनवरीदोपहर 3:23

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 31 जनवरीरात 2:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

फ़रवरी 2020

  • 16 फ़रवरीशाम 6:53

    बुध कुम्भ 18°46′ पर वक्री

  • 19 फ़रवरीसुबह 7:11

    बुध अस्त (2 मार्च तक)†

मार्च 2020

  • 2 मार्चरात 8:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 मार्चरात 10:49

    बुध कुम्भ 4°05′ पर मार्गी

अप्रैल 2020

  • 7 अप्रैलरात 3:54

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 21 अप्रैलसुबह 10:38

    बुध अस्त (16 मई तक)†

  • 24 अप्रैलशाम 4:05

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2020

  • 8 मईरात 11:17

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 16 मईरात 11:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 मईदोपहर 1:24

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2020

  • 17 जूनरात 11:58

    बुध मिथुन 20°38′ पर वक्री

  • 22 जूनशाम 5:44

    बुध अस्त (9 जुलाई तक)†

जुलाई 2020

  • 9 जुलाईसुबह 9:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जुलाईरात 3:27

    बुध मिथुन 11°21′ पर मार्गी

अगस्त 2020

  • 1 अगस्तशाम 5:03

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 4 अगस्तरात 1:07

    बुध अस्त (2 सितंबर तक)†

  • 16 अगस्तरात 9:58

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2020

  • 2 सितंबररात 1:32

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 2 सितंबरसुबह 5:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 सितंबरसुबह 6:23

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2020

  • 13 अक्टूबररात 8:04

    बुध तुला 17°32′ पर वक्री

  • 19 अक्टूबररात 9:36

    बुध अस्त (31 अक्टूबर तक)†

  • 31 अक्टूबरदोपहर 12:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

नवंबर 2020

  • 3 नवंबरसुबह 11:50

    बुध तुला 1°45′ पर मार्गी

  • 24 नवंबरसुबह 7:20

    बुध अस्त (12 जनवरी तक)†

  • 27 नवंबरशाम 7:35

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2020

  • 17 दिसंबररात 12:08

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2020: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और