पंचांग · गोचर · बुध
2021 में बुध का गोचर
2021 में बुध 19 बार राशि बदलता है: 5 जनवरी को मकर, 25 जनवरी को कुम्भ, 4 फ़रवरी को मकर (वक्री, पीछे की ओर), 11 मार्च को कुम्भ …। वक्री: 30 जनवरी, 30 मई, 27 सितंबर से।
सभी समय डरबन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
2021 में बुध किन राशियों में है
- धनु17 दिसंबर, सुबह 8:08 2020 → 5 जनवरी, रात 12:25 2021· 19 दिन
- मकर5 जनवरी, रात 12:25 2021 → 25 जनवरी, दोपहर 12:59 2021· 21 दिन
- कुम्भ25 जनवरी, दोपहर 12:59 2021 → 4 फ़रवरी, शाम 7:34 2021· 10 दिन
- मकर(वक्री गति से प्रवेश)4 फ़रवरी, शाम 7:34 2021 → 11 मार्च, सुबह 9:04 2021· 35 दिन
- कुम्भ11 मार्च, सुबह 9:04 2021 → 31 मार्च, रात 9:14 2021· 21 दिन
- मीन31 मार्च, रात 9:14 2021 → 16 अप्रैल, शाम 5:28 2021· 16 दिन
- मेष16 अप्रैल, शाम 5:28 2021 → 1 मई, रात 2:12 2021· 14 दिन
- वृषभ1 मई, रात 2:12 2021 → 26 मई, सुबह 5:04 2021· 25 दिन
- मिथुन26 मई, सुबह 5:04 2021 → 2 जून, रात 11:00 2021· 8 दिन
- वृषभ(वक्री गति से प्रवेश)2 जून, रात 11:00 2021 → 7 जुलाई, सुबह 7:43 2021· 34 दिन
- मिथुन7 जुलाई, सुबह 7:43 2021 → 25 जुलाई, सुबह 8:12 2021· 18 दिन
- कर्क25 जुलाई, सुबह 8:12 2021 → 8 अगस्त, रात 10:02 2021· 15 दिन
- सिंह8 अगस्त, रात 10:02 2021 → 26 अगस्त, सुबह 7:48 2021· 17 दिन
- कन्या26 अगस्त, सुबह 7:48 2021 → 22 सितंबर, सुबह 4:41 2021· 27 दिन
- तुला22 सितंबर, सुबह 4:41 2021 → 1 अक्टूबर, रात 11:30 2021· 10 दिन
- कन्या(वक्री गति से प्रवेश)1 अक्टूबर, रात 11:30 2021 → 2 नवंबर, सुबह 6:25 2021· 31 दिन
- तुला2 नवंबर, सुबह 6:25 2021 → 21 नवंबर, रात 1:20 2021· 19 दिन
- वृश्चिक21 नवंबर, रात 1:20 2021 → 10 दिसंबर, रात 2:35 2021· 19 दिन
- धनु10 दिसंबर, रात 2:35 2021 → 29 दिसंबर, सुबह 8:00 2021· 19 दिन
- मकर29 दिसंबर, सुबह 8:00 2021 → 6 मार्च, सुबह 7:52 2022· लगभग 2 महीने
तारीखवार
सभी समय डरबन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।
जनवरी 2021
5 जनवरीरात 12:25
बुध का मकर में प्रवेश
12 जनवरीदोपहर 1:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जनवरीदोपहर 12:59
बुध का कुम्भ में प्रवेश
30 जनवरीशाम 5:51
बुध कुम्भ 2°20′ पर वक्री
फ़रवरी 2021
2 फ़रवरीदोपहर 12:04
बुध अस्त (14 फ़रवरी तक)†
4 फ़रवरीशाम 7:34
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
14 फ़रवरीसुबह 9:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 फ़रवरीरात 2:52
बुध मकर 16°52′ पर मार्गी
मार्च 2021
11 मार्चसुबह 9:04
बुध का कुम्भ में प्रवेश
31 मार्चरात 9:14
बुध का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2021
4 अप्रैलरात 11:18
बुध अस्त (1 मई तक)†
16 अप्रैलशाम 5:28
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2021
1 मईरात 2:12
बुध का वृषभ में प्रवेश
1 मईशाम 7:41
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मईसुबह 5:04
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 मईरात 12:33
बुध मिथुन 0°34′ पर वक्री
जून 2021
2 जूनदोपहर 3:35
बुध अस्त (19 जून तक)†
2 जूनरात 11:00
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
19 जूनशाम 4:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 जूनरात 12:00
बुध वृषभ 21°58′ पर मार्गी
जुलाई 2021
7 जुलाईसुबह 7:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
19 जुलाईरात 10:47
बुध अस्त (16 अगस्त तक)†
25 जुलाईसुबह 8:12
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2021
8 अगस्तरात 10:02
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तरात 1:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अगस्तसुबह 7:48
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2021
22 सितंबरसुबह 4:41
बुध का तुला में प्रवेश
27 सितंबरसुबह 7:09
बुध तुला 1°19′ पर वक्री
अक्टूबर 2021
1 अक्टूबररात 11:30
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
3 अक्टूबररात 9:47
बुध अस्त (16 अक्टूबर तक)†
16 अक्टूबररात 12:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
18 अक्टूबरशाम 5:17
बुध कन्या 15°58′ पर मार्गी
नवंबर 2021
2 नवंबरसुबह 6:25
बुध का तुला में प्रवेश
5 नवंबरदोपहर 1:22
बुध अस्त (24 दिसंबर तक)†
21 नवंबररात 1:20
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2021
10 दिसंबररात 2:35
बुध का धनु में प्रवेश
24 दिसंबरदोपहर 1:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 दिसंबरसुबह 8:00
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2021: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
