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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2025 में बुध का गोचर

2025 में बुध 15 बार राशि बदलता है: 4 जनवरी को धनु, 24 जनवरी को मकर, 11 फ़रवरी को कुम्भ, 27 फ़रवरी को मीन …। वक्री: 15 मार्च, 18 जुलाई, 10 नवंबर से।

सभी समय जनकपुर के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

2025 में बुध किन राशियों में है

  1. वृश्चिक29 अक्टूबर, रात 10:50 2024 → 4 जनवरी, दोपहर 12:16 2025· लगभग 2 महीने
  2. धनु4 जनवरी, दोपहर 12:16 2025 → 24 जनवरी, शाम 5:51 2025· 20 दिन
  3. मकर24 जनवरी, शाम 5:51 2025 → 11 फ़रवरी, दोपहर 1:06 2025· 18 दिन
  4. कुम्भ11 फ़रवरी, दोपहर 1:06 2025 → 27 फ़रवरी, रात 11:53 2025· 16 दिन
  5. मीन27 फ़रवरी, रात 11:53 2025 → 7 मई, सुबह 4:19 2025· लगभग 2 महीने
  6. मेष7 मई, सुबह 4:19 2025 → 23 मई, दोपहर 1:14 2025· 16 दिन
  7. वृषभ23 मई, दोपहर 1:14 2025 → 6 जून, सुबह 9:38 2025· 14 दिन
  8. मिथुन6 जून, सुबह 9:38 2025 → 22 जून, रात 9:39 2025· 17 दिन
  9. कर्क22 जून, रात 9:39 2025 → 30 अगस्त, शाम 4:56 2025· लगभग 2 महीने
  10. सिंह30 अगस्त, शाम 4:56 2025 → 15 सितंबर, सुबह 11:18 2025· 16 दिन
  11. कन्या15 सितंबर, सुबह 11:18 2025 → 3 अक्टूबर, रात 3:54 2025· 18 दिन
  12. तुला3 अक्टूबर, रात 3:54 2025 → 24 अक्टूबर, दोपहर 12:42 2025· 21 दिन
  13. वृश्चिक24 अक्टूबर, दोपहर 12:42 2025 → 23 नवंबर, रात 8:28 2025· 30 दिन
  14. तुला(वक्री गति से प्रवेश)23 नवंबर, रात 8:28 2025 → 6 दिसंबर, रात 8:52 2025· 13 दिन
  15. वृश्चिक6 दिसंबर, रात 8:52 2025 → 29 दिसंबर, सुबह 7:33 2025· 22 दिन
  16. धनु29 दिसंबर, सुबह 7:33 2025 → 17 जनवरी, सुबह 10:33 2026· 19 दिन

तारीखवार

सभी समय जनकपुर के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

जनवरी 2025

  • 4 जनवरीदोपहर 12:16

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 18 जनवरीसुबह 7:18

    बुध अस्त (26 फ़रवरी तक)†

  • 24 जनवरीशाम 5:51

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2025

  • 11 फ़रवरीदोपहर 1:06

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 26 फ़रवरीरात 9:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 फ़रवरीरात 11:53

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 2025

  • 15 मार्चदोपहर 12:30

    बुध मीन 15°23′ पर वक्री

  • 17 मार्चशाम 7:44

    बुध अस्त (31 मार्च तक)†

  • 31 मार्चशाम 6:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 2025

  • 7 अप्रैलशाम 4:53

    बुध मीन 2°37′ पर मार्गी

मई 2025

  • 7 मईसुबह 4:19

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 18 मईरात 12:37

    बुध अस्त (11 जून तक)†

  • 23 मईदोपहर 1:14

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 2025

  • 6 जूनसुबह 9:38

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 11 जूनदोपहर 12:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 जूनरात 9:39

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2025

  • 18 जुलाईसुबह 10:29

    बुध कर्क 21°22′ पर वक्री

  • 24 जुलाईरात 8:01

    बुध अस्त (9 अगस्त तक)†

अगस्त 2025

  • 9 अगस्तरात 3:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 अगस्तदोपहर 1:15

    बुध कर्क 10°02′ पर मार्गी

  • 29 अगस्तशाम 4:05

    बुध अस्त (2 अक्टूबर तक)†

  • 30 अगस्तशाम 4:56

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2025

  • 15 सितंबरसुबह 11:18

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2025

  • 2 अक्टूबरशाम 5:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 3 अक्टूबररात 3:54

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 24 अक्टूबरदोपहर 12:42

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2025

  • 10 नवंबररात 12:46

    बुध वृश्चिक 12°39′ पर वक्री

  • 15 नवंबररात 3:20

    बुध अस्त (26 नवंबर तक)†

  • 23 नवंबररात 8:28

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 नवंबरसुबह 6:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 नवंबररात 11:23

    बुध तुला 26°29′ पर मार्गी

दिसंबर 2025

  • 6 दिसंबररात 8:52

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 दिसंबररात 12:30

    बुध अस्त (10 फ़रवरी तक)†

  • 29 दिसंबरसुबह 7:33

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2025: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और