पंचांग · गोचर · बुध
2033 में बुध का गोचर
2033 में बुध 12 बार राशि बदलता है: 14 जनवरी को मकर, 31 जनवरी को कुम्भ, 9 अप्रैल को मीन, 26 अप्रैल को मेष …। वक्री: 19 फ़रवरी, 21 जून, 17 अक्टूबर से।
सभी समय लौटोका के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।
2033 में बुध किन राशियों में है
- धनु26 दिसंबर, सुबह 8:18 2032 → 14 जनवरी, सुबह 5:35 2033· 19 दिन
- मकर14 जनवरी, सुबह 5:35 2033 → 31 जनवरी, शाम 7:01 2033· 18 दिन
- कुम्भ31 जनवरी, शाम 7:01 2033 → 9 अप्रैल, रात 1:34 2033· लगभग 2 महीने
- मीन9 अप्रैल, रात 1:34 2033 → 26 अप्रैल, रात 10:39 2033· 18 दिन
- मेष26 अप्रैल, रात 10:39 2033 → 11 मई, सुबह 7:50 2033· 14 दिन
- वृषभ11 मई, सुबह 7:50 2033 → 26 मई, दोपहर 12:44 2033· 15 दिन
- मिथुन26 मई, दोपहर 12:44 2033 → 3 अगस्त, शाम 5:53 2033· लगभग 2 महीने
- कर्क3 अगस्त, शाम 5:53 2033 → 19 अगस्त, सुबह 5:50 2033· 15 दिन
- सिंह19 अगस्त, सुबह 5:50 2033 → 4 सितंबर, सुबह 6:19 2033· 16 दिन
- कन्या4 सितंबर, सुबह 6:19 2033 → 24 सितंबर, रात 1:59 2033· 20 दिन
- तुला24 सितंबर, रात 1:59 2033 → 29 नवंबर, रात 10:42 2033· लगभग 2 महीने
- वृश्चिक29 नवंबर, रात 10:42 2033 → 19 दिसंबर, सुबह 5:04 2033· 19 दिन
- धनु19 दिसंबर, सुबह 5:04 2033 → 6 जनवरी, रात 9:08 2034· 19 दिन
तारीखवार
सभी समय लौटोका के स्थानीय समय (Pacific/Fiji, UTC+12) में।
जनवरी 2033
14 जनवरीसुबह 5:35
बुध का मकर में प्रवेश
31 जनवरीशाम 7:01
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2033
2 फ़रवरीरात 8:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
19 फ़रवरीसुबह 9:19
बुध कुम्भ 21°15′ पर वक्री
21 फ़रवरीरात 8:59
बुध अस्त (6 मार्च तक)†
मार्च 2033
6 मार्चदोपहर 12:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 मार्चदोपहर 2:57
बुध कुम्भ 6°43′ पर मार्गी
अप्रैल 2033
9 अप्रैलरात 1:34
बुध का मीन में प्रवेश
24 अप्रैलरात 11:47
बुध अस्त (20 मई तक)†
26 अप्रैलरात 10:39
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2033
11 मईसुबह 7:50
बुध का वृषभ में प्रवेश
20 मईसुबह 8:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मईदोपहर 12:44
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 2033
21 जूनरात 10:04
बुध मिथुन 23°37′ पर वक्री
26 जूनरात 8:12
बुध अस्त (13 जुलाई तक)†
जुलाई 2033
13 जुलाईसुबह 9:03
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईरात 2:20
बुध मिथुन 14°11′ पर मार्गी
अगस्त 2033
3 अगस्तशाम 5:53
बुध का कर्क में प्रवेश
7 अगस्तसुबह 10:40
बुध अस्त (5 सितंबर तक)†
19 अगस्तसुबह 5:50
बुध का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2033
4 सितंबरसुबह 6:19
बुध का कन्या में प्रवेश
5 सितंबररात 11:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
24 सितंबररात 1:59
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2033
17 अक्टूबरसुबह 10:02
बुध तुला 19°56′ पर वक्री
23 अक्टूबरसुबह 9:31
बुध अस्त (3 नवंबर तक)†
नवंबर 2033
3 नवंबररात 11:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 नवंबररात 12:39
बुध तुला 4°07′ पर मार्गी
28 नवंबरसुबह 9:36
बुध अस्त (16 जनवरी तक)†
29 नवंबररात 10:42
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2033
19 दिसंबरसुबह 5:04
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2033: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
