पंचांग · गोचर · बुध
2035 में बुध का गोचर
2035 में बुध 12 बार राशि बदलता है: 7 मार्च को कुम्भ, 26 मार्च को मीन, 10 अप्रैल को मेष, 26 अप्रैल को वृषभ …। वक्री: 17 जनवरी, 14 मई, 13 सितंबर से।
2035 में बुध किन राशियों में है
- मकर30 दिसंबर, शाम 6:20 2034 → 7 मार्च, शाम 6:10 2035· लगभग 2 महीने
- कुम्भ7 मार्च, शाम 6:10 2035 → 26 मार्च, रात 12:01 2035· 18 दिन
- मीन26 मार्च, रात 12:01 2035 → 10 अप्रैल, रात 2:48 2035· 15 दिन
- मेष10 अप्रैल, रात 2:48 2035 → 26 अप्रैल, रात 12:23 2035· 16 दिन
- वृषभ26 अप्रैल, रात 12:23 2035 → 3 जुलाई, शाम 7:43 2035· लगभग 2 महीने
- मिथुन3 जुलाई, शाम 7:43 2035 → 18 जुलाई, दोपहर 3:55 2035· 15 दिन
- कर्क18 जुलाई, दोपहर 3:55 2035 → 2 अगस्त, शाम 4:06 2035· 15 दिन
- सिंह2 अगस्त, शाम 4:06 2035 → 22 अगस्त, रात 1:35 2035· 19 दिन
- कन्या22 अगस्त, रात 1:35 2035 → 28 अक्टूबर, रात 12:59 2035· लगभग 2 महीने
- तुला28 अक्टूबर, रात 12:59 2035 → 15 नवंबर, सुबह 8:31 2035· 18 दिन
- वृश्चिक15 नवंबर, सुबह 8:31 2035 → 4 दिसंबर, दोपहर 3:56 2035· 19 दिन
- धनु4 दिसंबर, दोपहर 3:56 2035 → 26 दिसंबर, शाम 6:59 2035· 22 दिन
- मकर26 दिसंबर, शाम 6:59 2035 → 6 जनवरी, दोपहर 1:41 2036· 11 दिन
तारीखवार
समय भारतीय मानक समय (IST) में।
जनवरी 2035
17 जनवरीदोपहर 12:14
बुध मकर 18°35′ पर वक्री
20 जनवरीदोपहर 12:52
बुध अस्त (1 फ़रवरी तक)†
फ़रवरी 2035
1 फ़रवरीरात 12:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 फ़रवरीसुबह 6:55
बुध मकर 2°41′ पर मार्गी
मार्च 2035
7 मार्चशाम 6:10
बुध का कुम्भ में प्रवेश
21 मार्चशाम 5:16
बुध अस्त (19 अप्रैल तक)†
26 मार्चरात 12:01
बुध का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2035
10 अप्रैलरात 2:48
बुध का मेष में प्रवेश
19 अप्रैलसुबह 4:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अप्रैलरात 12:23
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2035
14 मईरात 12:09
बुध वृषभ 13°38′ पर वक्री
16 मईरात 9:59
बुध अस्त (2 जून तक)†
जून 2035
2 जूनशाम 7:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 जूनरात 8:23
बुध वृषभ 4°58′ पर मार्गी
जुलाई 2035
3 जुलाईशाम 7:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
7 जुलाईसुबह 9:50
बुध अस्त (2 अगस्त तक)†
18 जुलाईदोपहर 3:55
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2035
2 अगस्तसुबह 6:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
2 अगस्तशाम 4:06
बुध का सिंह में प्रवेश
22 अगस्तरात 1:35
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2035
13 सितंबरसुबह 7:57
बुध कन्या 17°16′ पर वक्री
20 सितंबरसुबह 6:58
बुध अस्त (2 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 2035
2 अक्टूबररात 10:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 अक्टूबरसुबह 10:23
बुध कन्या 2°26′ पर मार्गी
21 अक्टूबरशाम 7:24
बुध अस्त (8 दिसंबर तक)†
28 अक्टूबररात 12:59
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2035
15 नवंबरसुबह 8:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2035
4 दिसंबरदोपहर 3:56
बुध का धनु में प्रवेश
8 दिसंबररात 1:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 दिसंबरशाम 6:59
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2035: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
